सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले में ई-उपार्जन व्यवस्था की अव्यवस्थाओं को लेकर किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है
भारतीय किसान यूनियन एकता (सिद्धपुर) के बैनर तले किसानों ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन को 24 अप्रैल 2026 तक का अल्टीमेटम दे दिया है। किसानों का साफ कहना है—अगर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो बड़ा और उग्र आंदोलन होगा।
📌 क्या हैं किसानों की मुख्य शिकायतें?
ई-उपार्जन पोर्टल बार-बार डाउन रहने से स्लॉट बुकिंग के मैसेज समय पर नहीं मिल रहे। सत्यापन के नाम पर किसानों को चक्कर कटवाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, छोटे-बड़े किसानों के वर्गीकरण के जरिए उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से वंचित करने का आरोप भी लगाया गया है।
⚠️ गिरदावरी बनी सिर्फ औपचारिकता?
किसानों का कहना है कि गिरदावरी प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित हो गई है। जमीन की वास्तविक स्थिति और रिकॉर्ड में भारी अंतर है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है—आपत्तियां, देरी और मानसिक परेशानी अलग।
💰 उपार्जन केंद्रों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
किसानों ने खुलकर आरोप लगाया कि पैसों के आधार पर फसल के सैंपल पास किए जा रहे हैं, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाली फसल को भी रिजेक्ट किया जा रहा है। क्यूआर टैगिंग में देरी ने हालात और खराब कर दिए हैं।
🌾 खाद और बिजली ने बढ़ाई मुश्किलें
खाद वितरण में ई-टोकन समय पर नहीं मिल रहे, मात्रा भी पर्याप्त नहीं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर बिजली लाइनें और बार-बार कटौती किसानों के लिए नई मुसीबत बन गई है।
❓ अब सवाल प्रशासन और शासन से…
क्या डिजिटल व्यवस्था किसानों के लिए सुविधा बनी या सिरदर्द?
क्या भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई होगी या सिस्टम ऐसे ही चलता रहेगा?
क्या MSP का हक किसानों तक सही तरीके से पहुंच रहा है?
🛑 किसानों की चेतावनी साफ
यदि तय समय सीमा तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो किसान सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक उग्र आंदोलन करेंगे—और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
👥 ज्ञापन सौंपने में ये नेता रहे मौजूद
जिला महासचिव मजिन्दर सिंह रंधावा, जिलाध्यक्ष हीरा सिंह निबोदा, संयुक्त किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह बड़ेरा सहित कई किसान नेता शामिल रहे।