सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र में सोमवार को एक प्रेमी जोड़े ने ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। गणेशखेड़ा गांव के रहने वाले मोहर सिंह आदिवासी और ललिता आदिवासी, जो एक-दूसरे से प्रेम करते हैं
परिवार की नाराजगी से परेशान होकर सीधे जिओ कंपनी के करीब 40 मीटर ऊंचे मोबाइल टॉवर पर चढ़ गए। दोपहर करीब 12:30 बजे शुरू हुआ यह हंगामा तेज धूप और 42 डिग्री तापमान के बीच चलता रहा, जहां नीचे खड़े लोग सांसें थामकर यह नजारा देखते रहे।
टॉवर पर चढ़े इस जोड़े ने साफ कहा—“हमें शादी करनी है, नहीं तो नीचे नहीं उतरेंगे!” जैसे-जैसे खबर फैली, मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। हालात ऐसे बन गए कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को समझाने की कोशिश शुरू की, लेकिन प्रेम और जिद के बीच मामला उलझता गया।
⏳ 3 घंटे तक चला ड्रामा, फिर पुलिस की समझाइश काम आगे
करीब तीन घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस ने आखिरकार दोनों को शादी कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद करीब साढ़े तीन बजे दोनों टॉवर से नीचे उतरने को तैयार हुए। सुरक्षित नीचे उतारकर पुलिस उन्हें तेंदुआ थाने ले गई, जहां आगे की कार्रवाई की जा रही है।
❗ अब सबसे बड़ा सवाल—ये नौबत आई ही क्यों?
यह घटना सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़े कई बड़े सवालों को उजागर करती है।
❓ क्या आज भी प्रेम विवाह को लेकर समाज इतना कठोर है कि युवाओं को जान जोखिम में डालनी पड़े?
❓ परिवार और समाज की असहमति के बीच युवाओं के पास संवाद का रास्ता क्यों नहीं बचता?
❓ क्या प्रशासन को ऐसे मामलों के लिए पहले से कोई काउंसलिंग या समाधान व्यवस्था नहीं बनानी चाहिए?
❓ अगर समय रहते पुलिस नहीं पहुंचती तो क्या इस घटना का अंत किसी बड़ी त्रासदी में बदल सकता था?
⚠️ सामाजिक और प्रशासनिक मसला
यह मामला सिर्फ एक “ड्रामा” नहीं, बल्कि सामाजिक टकराव, पारिवारिक दबाव और संवाद की कमी का गंभीर उदाहरण है। एक तरफ परंपराएं हैं, दूसरी तरफ नई पीढ़ी के फैसले—बीच में फंसी है उनकी ज़िंदगी। प्रशासन के सामने भी चुनौती है कि ऐसे संवेदनशील मामलों को कैसे संभाला जाए ताकि किसी की जान खतरे में न पड़े।
अब देखने वाली बात यह है कि क्या इस जोड़े की शादी वाकई हो पाएगी या फिर मामला फिर से उलझेगा? और सबसे अहम—क्या समाज ऐसे मामलों से कुछ सीख लेगा या ऐसे ही टॉवर पर चढ़कर फैसले होते रहेंगे?