शिवपुरी में सियासी संग्राम: IPS को धमकाने वाले विधायक के बदले तेवर, नोटिस के बाद चुप्पी… लेकिन सवाल और भी तेज!

Nikk Pandit
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सागर शर्मा शिवपुरीE G C:खबर शिवपुरी जिले की पिछोर सीट से बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी इन दिनों बड़े विवाद में घिरे हुए हैं। करैरा के SDOP (IPS) आयुष जाखड़ को खुलेआम धमकी देने का मामला अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुका है, जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा है।

हैरानी की बात यह है कि जो विधायक कुछ दिन पहले मंच से गरजते हुए 10 हजार लोगों को लेकर SDOP के बंगले को गोबर से भर देने की बात कह रहे थे, वही अब भास्कर के सवालों पर पूरी तरह नरम पड़ते नजर आए। उन्होंने साफ कहा—“पहले नोटिस ले लूं, फिर जवाब दूंगा… परिवार (पार्टी) जो आदेश देगा, वही मानूंगा।” सवाल यह है कि क्या यह बदलाव पार्टी के दबाव का असर है या फिर राजनीतिक नुकसान का डर? 

इस पूरे विवाद की शुरुआत 16 अप्रैल 2026 को हुए एक एक्सीडेंट से हुई, जब विधायक के बेटे दिनेश लोधी की ‘MLA’ लिखी तेज रफ्तार थार ने बाइक सवार तीन लोगों और दो महिलाओं को टक्कर मार दी। हादसे के बाद सामने आए वीडियो में दिनेश लोधी घायलों को ही डांटते नजर आए, जिससे मामला और भड़क गया।

पुलिस ने केस दर्ज किया और करैरा SDOP आयुष जाखड़ ने कार्रवाई करते हुए गाड़ी से अवैध सायरन और काली फिल्म हटवाई, साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की। यहीं से विवाद ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया।

19 अप्रैल को विधायक प्रीतम लोधी का एक वीडियो सामने आया जिसमें उन्होंने SDOP पर आरोप लगाया कि उनके बेटे को करैरा में दोबारा न दिखने और राजनीति न करने की धमकी दी गई है।

इसी के बाद उन्होंने तीखा बयान देते हुए कहा—“करैरा तेरे डैडी का नहीं है, मेरा बेटा आएगा और चुनाव भी लड़ेगा, दम हो तो रोक लेना।” मामला यहीं नहीं रुका, बल्कि 21 अप्रैल को उन्होंने और भी आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि अगर SDOP ने 15 दिन में माफी नहीं मांगी तो वह 10 हजार लोगों को लेकर उनके बंगले का घेराव करेंगे और उसे गोबर से भर देंगे।

इतना ही नहीं, उन्होंने यह तक कह दिया कि “मेरा मुक्का पहले ढाई किलो का था, अब ढाई सौ किलो का हो गया है” और यह भी सवाल उठा दिया कि SDOP को निर्देश आखिर कौन दे रहा है—क्या मोदी, अमित शाह या ज्योतिरादित्य सिंधिया? 

इन बयानों के बाद प्रशासनिक हलकों और सोशल मीडिया में जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली। IPS एसोसिएशन ने भी इस व्यवहार पर आपत्ति जताई, जिससे मामला और गंभीर हो गया। आखिरकार 22 अप्रैल को बीजेपी संगठन ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए विधायक को नोटिस थमा दिया।

नोटिस के बाद जब मीडिया ने उनसे सवाल किए तो वही नेता, जो कुछ दिन पहले खुलकर चुनौती दे रहे थे, अब हर सवाल टालते दिखे। उन्होंने बार-बार यही कहा कि पहले नोटिस हाथ में ले लें, फिर परिवार से चर्चा कर जवाब देंगे।

दिलचस्प बात यह है कि प्रीतम लोधी पहले भी विवादों में रह चुके हैं। 2023 में ब्राह्मण समाज पर की गई टिप्पणी के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था और उनके खिलाफ 20 से ज्यादा FIR दर्ज हुई थीं।

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री तक ने उनके खिलाफ बयान दिया था। बाद में उमा भारती के हस्तक्षेप से उनकी बीजेपी में वापसी हुई और वे चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद भी उन्होंने कई विवादित बयान दिए, जिनमें एक ट्रांसपोर्ट कांस्टेबल के परिवार को लेकर टिप्पणी भी शामिल है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार पार्टी वाकई कड़ा एक्शन लेगी या फिर पहले की तरह मामला ठंडा पड़ जाएगा? क्या एक जनप्रतिनिधि द्वारा IPS अधिकारी को इस तरह खुलेआम धमकाना सिर्फ “बयानबाजी” मानकर छोड़ दिया जाएगा?

और क्या विधायक के बदले तेवर इस बात का संकेत हैं कि उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया है—या यह सिर्फ सियासी रणनीति है? 

📢 फिलहाल निगाहें उन 3 दिनों पर टिकी हैं, जिनमें विधायक को जवाब देना है। यही तय करेगा कि यह मामला यहीं खत्म होगा या शिवपुरी की राजनीति में एक और बड़ा तूफान आने वाला है।
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