सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के माधव टाइगर रिजर्व में एक बार फिर दहशत की तस्वीर सामने आई है। ग्राम ऐरावन के जंगल में 50 वर्षीय सरवन आदिवासी का क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा शनिवार सुबह फूट पड़ा और उन्होंने नरवर-शिवपुरी मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। करीब 5 घंटे तक सड़क ठप रही—ना प्रशासन तुरंत समाधान दे पाया, ना ही लोगों का डर कम हुआ।
घटना शुक्रवार 24 अप्रैल की है, जब टाइगर ट्रेकिंग टीम को जंगल में शव मिला। आसपास मादा टाइगर MT-6 की लोकेशन भी ट्रेस हुई, जिससे शक और गहरा गया। मौके पर शव की हालत इतनी भयावह थी कि सिर, हाथ-पैर अलग मिले और धड़ का कोई पता नहीं चला। पास में कपड़े और नहाने का सामान मिलने से अंदेशा है कि सरवन नदी में नहाने गया था, तभी उस पर हमला हुआ। पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट ने भी साफ किया कि हमला किसी बड़े जंगली जानवर ने नुकीले दांतों से किया है।
⚠️ 2 दिन से लापता था सरवन, तब कहां था सिस्टम?
ग्रामीणों के मुताबिक सरवन दो दिन से गायब था, लेकिन समय रहते कोई सर्च ऑपरेशन नहीं हुआ। सवाल उठता है—क्या एक आदिवासी की जान की कीमत इतनी कम है कि उसकी तलाश में भी देरी की जाए ?
🚧 गुस्साए ग्रामीणों का चक्काजाम
शनिवार सुबह 7 बजे से ही ग्रामीणों ने रोड जाम कर दिया। पुलिस, प्रशासन और वन विभाग मौके पर पहुंचे, लेकिन लोगों का आक्रोश इतना था कि करीब दोपहर 12 बजे मुआवजे और सुरक्षा के आश्वासन के बाद ही जाम खुल पाया।
💰 8 लाख मुआवजा—जिंदगी की कीमत?
डीएफओ हरिओम के मुताबिक परिजनों को 8 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या हर बार मुआवजा देकर जिम्मेदारी खत्म कर दी जाएगी?
🐅 क्या आदमखोर बनती जा रही MT-6?
27 दिसंबर को छोड़ी गई मादा टाइगर MT-6 लगातार आबादी क्षेत्रों में पहुंच रही है—
• 1 जनवरी: डोंगर गांव में शिवलाल बघेल पर हमला
• खुटेला और सरदारपुरा: मवेशियों का शिकार
• 13 जनवरी: ट्रेंकुलाइज कर जंगल में छोड़ा गया
• 16 अप्रैल: रायपुर धमकन में भैंस का शिकार
• उसी दिन फिर ट्रेंकुलाइज
• और अब ऐरावन में आदिवासी की मौत!
इतनी घटनाओं के बाद भी MT-6 को कंट्रोल करने में नाकामी आखिर क्यों?
❓ बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं—
क्या वन विभाग सिर्फ “ट्रेंकुलाइज” का खेल खेल रहा है?
क्यों बार-बार आबादी में पहुंच रही है MT-6?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
ग्रामीणों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
🔥 जमीन पर डर, फाइलों में दावे!
लगातार घटनाओं के बाद भी ना ठोस सुरक्षा प्लान, ना निगरानी की पुख्ता व्यवस्था। ग्रामीण दहशत में हैं, बच्चे खेतों तक जाने से डर रहे हैं—और सिस्टम अब भी “जांच जारी” में उलझा है।