खनियांधाना में बड़ी कार्रवाई: दो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवाएं समाप्त, 20 से अधिक कार्यकर्ता-सहायिकाओं पर गिरी गाज

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासन अब सख्त नजर आ रहा है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण में बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद खनियांधाना क्षेत्र में कार्रवाई की गई है। 

इस कार्रवाई के तहत दो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, जबकि 20 से अधिक कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को नोटिस जारी कर मानदेय कटौती की गई है।

निरीक्षण के दौरान सामने आया कि कई आंगनवाड़ी केंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहे थे। कई जगहों पर हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा था, पोषण ट्रैकर एप पर कार्य अधूरा था और कुपोषित बच्चों के प्रबंधन में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। इसके बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू की।

कार्रवाई के तहत खनियांधाना वार्ड क्रमांक 9 की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता स्नेहलता यादव एवं सिनावलकला की कार्यकर्ता गीता लोधी की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। वहीं दो अन्य कार्यकर्ताओं को सेवा समाप्ति के संबंध में एक माह का अल्टीमेटम दिया गया है।

कलेक्टर अर्पित वर्मा ने पहले ही अधिकारियों को आंगनवाड़ी केंद्रों के नियमित निरीक्षण और लापरवाही मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी, एसडीएम अनुभाग पिछोर की निगरानी में परियोजना अधिकारी प्रियंका बुनकर एवं सेक्टर पर्यवेक्षकों ने निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

जांच में यह भी सामने आया कि कई केंद्रों पर कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अनुपस्थित मिलीं, रिकॉर्ड संधारण नहीं किया जा रहा था, केंद्र नियमित नहीं खुल रहे थे और शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक नहीं पहुंच रहा था। इसके अलावा पोषण ट्रैकर और संपर्क एप पर कार्य न करने तथा मुख्यालय पर निवास नहीं करने जैसी अनियमितताएं भी पाई गईं।

इन लापरवाहियों के चलते 20 से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं का 3 से 15 दिन का मानदेय राजसात किया गया है। कार्रवाई की जद में गूडर, अमुहाय, देवीपुरा, धमधोली, रिजोदा, ढोंगा, दुर्गापुर, मायापुर, कंचनपुर, मुहारी, अमरपुरललन और देवखो क्षेत्रों की कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं शामिल हैं।

प्रशासन की इस कार्रवाई को महिला एवं बाल विकास विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। साफ संकेत दिए गए हैं कि आंगनवाड़ी केंद्रों में लापरवाही, अनुपस्थिति और योजनाओं के क्रियान्वयन में कमी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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