सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के बदरवास जनपद के खतौरा गांव स्थित उपार्जन केंद्र बुधवार को उस वक्त रणभूमि में बदल गया, जब फसल तुलाई में देरी और कथित रिश्वतखोरी से नाराज किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। चना और मसूर की उपज लेकर कई दिनों से केंद्र पर डटे किसानों ने आखिरकार सड़क पर बैठकर खतौरा-ईसागढ़ मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। करीब दो घंटे तक चले इस प्रदर्शन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए।
किसानों का आरोप है कि स्लॉट बुकिंग होने के बावजूद उनकी फसल की तुलाई नहीं की जा रही थी। कई किसान पिछले सात दिनों से ट्रॉलियां लेकर उपार्जन केंद्र पर डटे हुए थे। दिन-रात खुले आसमान के नीचे इंतजार करने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। किसानों का कहना था कि बुधवार स्लॉट बुकिंग का आखिरी दिन था, फिर भी उनकी उपज को तौलने में लगातार टालमटोल की जा रही थी।
मामला तब और भड़क गया जब किसानों ने आरोप लगाया कि प्रति ट्रॉली अनाज पास कराने के लिए 3 हजार रुपए रिश्वत मांगी जा रही थी। किसानों का कहना था कि “बिना पैसे दिए तुलाई नहीं हो रही।” यही आरोप आग में घी का काम कर गया और देखते ही देखते किसान सड़क पर उतर आए। सड़क पर बैठकर नारेबाजी शुरू हो गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
चक्काजाम के कारण खतौरा-ईसागढ़ मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। राहगीर परेशान होते रहे, लेकिन किसानों का कहना था कि जब तक उनकी सुनवाई नहीं होगी, वे पीछे नहीं हटेंगे। कई किसानों ने आरोप लगाया कि उपार्जन केंद्रों पर हर साल इसी तरह की अव्यवस्था और कथित वसूली का खेल चलता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रहते हैं।
सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को समझाइश दी और भरोसा दिलाया कि तुलाई प्रक्रिया दोबारा शुरू कराई जाएगी। काफी देर तक चली बातचीत और आश्वासन के बाद किसानों ने जाम समाप्त किया, लेकिन उनके चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान राजनीतिक रंग भी देखने को मिला। अनाज तुलाई को लेकर कोलारस विधायक महेंद्र यादव के चचेरे भाई मानवेंद्र यादव और वेयरहाउस संचालक राजीव यादव के बीच भी तीखी बहस और गहमागहमी की स्थिति बनी रही। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक माहौल कुछ समय के लिए बेहद तनावपूर्ण हो गया था।
वहीं अनूप श्रीवास्तव ने सफाई देते हुए कहा कि उपार्जन और हैंडलिंग चालान जनरेट करने वाला कर्मचारी दिव्यांग है, जिसकी वजह से काम की गति धीमी रही। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ किसान मानकों के अनुरूप अनाज लेकर नहीं पहुंचे थे, जिससे तुलाई में दिक्कत आई। हालांकि किसानों का कहना है कि यह सिर्फ जिम्मेदारी से बचने के बहाने हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसानों को अपनी मेहनत की फसल तौलवाने के लिए सड़क पर उतरना क्यों पड़ रहा है? क्या उपार्जन केंद्र किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए हैं या फिर उन्हें परेशान करने के लिए? प्रशासन ने तुलाई दोबारा शुरू होने का दावा जरूर किया है, लेकिन किसानों के मन में सिस्टम को लेकर जो गुस्सा और अविश्वास पैदा हुआ है, वह फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा।