डिलीवरी के बाद मौत… इलाज या लापरवाही:शिवपुरी के निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप, महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

Nikk Pandit
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सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी शहर के निजी सुखदेव हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद एक महिला की मौत ने पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सर्वोदय नगर कॉलोनी निवासी गगन अग्रवाल ने कलेक्टर अर्पित वर्मा को शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी निधि अग्रवाल की मौत इलाज में कथित लापरवाही और समय पर सही उपचार न मिलने के कारण हुई।

मामला सामने आने के बाद शहर में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

शिकायत में मेडिकल कॉलेज की गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. शिखा जैन, जिला अस्पताल के एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. आर.पी. सिंह और सुखदेव हॉस्पिटल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। गगन अग्रवाल के मुताबिक, 28 मार्च 2026 को उनकी पत्नी निधि अग्रवाल को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सिजेरियन ऑपरेशन किया गया। लेकिन ऑपरेशन के बाद हालत सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ती चली गई।

परिजनों का आरोप है कि निधि अग्रवाल को लगातार ब्लीडिंग हो रही थी और यूरिन भी नहीं आ रहा था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। सवाल यह उठ रहा है कि अगर मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी तो समय रहते उचित इलाज और निगरानी क्यों नहीं दी गई? क्या अस्पताल सिर्फ ऑपरेशन तक सीमित रह गया और बाद की जिम्मेदारी से आंखें मूंद ली गईं?

परिवार का कहना है कि जब हालत ज्यादा बिगड़ गई तब महिला को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मेडिकल कॉलेज पहुंचने के कुछ घंटों बाद ही निधि अग्रवाल ने दम तोड़ दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर समय पर सही इलाज मिलता, तो क्या एक मां की जान बच सकती थी?

मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि शासकीय ड्यूटी पर पदस्थ डॉक्टर निजी अस्पताल में ऑपरेशन कर रहे थे। अगर यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ एक अस्पताल की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन सकता है। आखिर सरकारी जिम्मेदारियां निभाने वाले डॉक्टर निजी अस्पतालों में कैसे सक्रिय हैं? और यदि हैं, तो क्या इसकी अनुमति है?

गगन अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन दस्तावेजों के नाम पर मामला लंबा खींचता रहा। अब सभी दस्तावेजों के साथ दोबारा विस्तृत शिकायत कलेक्टर कार्यालय में दी गई है। उन्होंने सुखदेव हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द करने, निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित डॉक्टरों पर विभागीय कार्रवाई की मांग की है।

इस पूरे घटनाक्रम ने शिवपुरी की स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शहर में लोग पूछ रहे हैं कि आखिर निजी अस्पतालों की मॉनिटरिंग कौन कर रहा है? क्या मरीजों की जान सिर्फ “फीस” और “पैकेज” तक सीमित होकर रह गई है? और जब किसी की मौत हो जाती है, तब जांच और आश्वासन के अलावा आखिर मिलता क्या है?

कलेक्टर अर्पित वर्मा ने मामले की जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन अब लोगों की नजर सिर्फ जांच पर नहीं, बल्कि कार्रवाई पर टिकी है। क्योंकि यह मामला सिर्फ एक महिला की मौत का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जिसके सहारे लोग अस्पतालों में अपने परिजनों को जिंदगी देने ले जाते हैं… मौत नहीं।
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