सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र स्थित ग्राम हाजीनगर में शनिवार को एक ऐसा अनोखा आयोजन हुआ, जिसने पूरे जिले ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। यहां 60 वर्षीय कल्याण पाल उर्फ कल्लू ने जीवित रहते हुए अपने सामने ही अंतिम गंगा पूजन, कर्मकांड और मृत्यु भोज की तर्ज पर विशाल भंडारे का आयोजन कराया।
इस आयोजन का निमंत्रण कार्ड कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद लोग हैरान रह गए थे। कार्ड में लिखा था — “अपना अपने सामने अंतिम गंगा पूजन, भंडारा”। साथ ही लिखी एक शायरी भी चर्चा का केंद्र बनी रही —
💬 “मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था… मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था।”
🌊 प्रयागराज जाकर कराया कर्मकांड
जानकारी के अनुसार, आयोजन से दो दिन पहले कल्याण पाल प्रयागराज गए थे। वहां उन्होंने अपने नाम से कर्मकांड कराया और अस्थि विसर्जन की परंपरा के अनुसार गंगा स्नान व धार्मिक अनुष्ठान भी किए। इसके बाद वह अपने पैतृक गांव हाजीनगर लौट आए।
शुक्रवार को गांव में 24 घंटे का सीताराम रामधुन पाठ आयोजित कराया गया। वहीं शनिवार को धार्मिक विधि-विधान के बाद दोपहर करीब 4 बजे विशाल भंडारे का आयोजन हुआ।
🍛 “जिंदा भोज” देखने उमड़ी भीड़
ग्रामीणों के मुताबिक यह आयोजन पूरी तरह मृत्यु भोज की तर्ज पर किया गया था, लेकिन क्योंकि कल्याण पाल जीवित हैं, इसलिए लोग इसे “जिंदा भोज” कह रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इस भंडारे में आसपास के कई गांवों से करीब 6 से 7 हजार लोग पहुंचे। आयोजन स्थल पर भोजन, बैठने और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। पूरे गांव में दिनभर इसी आयोजन की चर्चा होती रही।
💔 “मेरे बाद कर्मकांड कौन करेगा?”
जानकारी के अनुसार, 60 वर्षीय कल्याण पाल अपने पिता के इकलौते पुत्र हैं और उनका विवाह भी नहीं हुआ है। परिवार में उनके पीछे ऐसा कोई सदस्य नहीं है, जो उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार और कर्मकांड की जिम्मेदारी निभा सके।
कल्याण पाल का कहना है कि उन्हें हमेशा यह चिंता सताती थी कि उनकी मौत के बाद अंतिम संस्कार, गंगा पूजन और भंडारा सही तरीके से होगा या नहीं। इसी चिंता के चलते उन्होंने अपने जीवन में ही सारी रस्में पूरी करा लीं।
उन्होंने कहा —
💬 “अब मुझे किसी बात की चिंता नहीं है। जब भी मौत आएगी, मैं सुकून से मर सकूंगा, क्योंकि अपने अंतिम संस्कार से जुड़े सारे कर्मकांड मैं अपनी आंखों के सामने पूरे कर चुका हूं।”
❓ समाज के लिए बड़ा सवाल
यह अनोखा आयोजन अब पूरे शिवपुरी जिले और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे अकेलेपन की पीड़ा बता रहे हैं, तो कुछ इसे परंपरा और मानसिक संतोष से जोड़कर देख रहे हैं।
लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इंसान को ऐसा कदम उठाने की जरूरत क्यों पड़ती है? क्या बदलते सामाजिक रिश्तों में बुजुर्ग खुद को इतना अकेला महसूस करने लगे हैं?