समर्थन मूल्य खरीदी में बड़ा खुलासा: 6756 क्विंटल मसूर निकली अमानक, 4.72 करोड़ रुपए का भुगतान अटका!

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले में समर्थन मूल्य पर चल रही मसूर खरीदी के बीच एक बड़ा मामला सामने आया है। मार्कफेड द्वारा भंडारण के लिए सरकारी गोदामों में भेजी गई 6756 क्विंटल मसूर अमानक पाई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 4.72 करोड़ रुपए बताई जा रही है। जांच में मसूर में तय मानक से अधिक कचरा और मिट्टी मिलने के बाद इसे रिजेक्ट कर दिया गया है और अब किसानों का भुगतान भी अटक गया है।

समर्थन मूल्य खरीदी में मसूर के लिए अधिकतम 2 प्रतिशत तक कचरा-मिट्टी की अनुमति है, लेकिन गोदामों पर जांच के दौरान कई खेपों में 2.50 प्रतिशत से लेकर 5.50 प्रतिशत तक कचरा-मिट्टी मिली। इसके बाद मार्कफेड सर्वेयरों ने संबंधित मसूर को अमानक घोषित कर दिया।

🏢 गोदामों में अलग रखी गई अमानक मसूर

जानकारी के अनुसार उपार्जन केंद्रों से खरीदी गई मसूर को जब सरकारी गोदामों में भंडारण के लिए भेजा गया तो जांच के दौरान भारी गड़बड़ी सामने आई। अमानक मसूर की बोरियों को गोदामों में अलग स्टेक लगाकर सुरक्षित रखवा दिया गया है ताकि सामान्य स्टॉक से अलग पहचान बनी रहे।

अब संबंधित सेवा सहकारी संस्थाओं को मसूर अपग्रेड कराने के लिए पत्र जारी किए जा रहे हैं। अपग्रेडिंग के तहत मसूर की सफाई कर उसमें मौजूद कचरा और मिट्टी को अलग किया जाएगा।

📊 जिले में अब तक कितनी हुई खरीदी?

मार्कफेड के आंकड़ों के अनुसार जिले में अभी तक—
🔹 2316 किसानों से 64,529 क्विंटल मसूर खरीदी गई
🔹 356 किसानों से 8,885 क्विंटल चना खरीदा गया
🔹 कुल खरीदी मूल्य लगभग 31.60 करोड़ रुपए पहुंच चुका है

किसानों के भुगतान के लिए लगभग 21.62 करोड़ रुपए के ईपीओ जारी किए गए हैं, जिनमें से 15.09 करोड़ रुपए किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं।

⚠️ 10 प्रतिशत से अधिक मसूर अमानक होने से बढ़ी चिंता

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिले में खरीदी गई कुल 64,529 क्विंटल मसूर में 10 प्रतिशत से अधिक मात्रा अमानक श्रेणी में पहुंच गई है। इससे न केवल खरीदी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि किसानों के भुगतान पर भी सीधा असर पड़ रहा है।

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रिजेक्ट हुई 6756 क्विंटल मसूर किन किसानों की है, ऐसे में अन्य किसानों की भुगतान प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

💰 4.72 करोड़ का भुगतान रुका, किसानों की बढ़ी चिंता

अमानक घोषित मसूर की कीमत करीब 4.72 करोड़ रुपए है। नियमों के अनुसार जब तक मसूर की सफाई कर उसे मानक स्तर तक नहीं लाया जाएगा, तब तक भुगतान जारी नहीं होगा। इसका पूरा खर्च संबंधित संस्थाओं को उठाना पड़ सकता है।

🗣️ क्या बोले मार्कफेड डीएमओ?

मार्कफेड जिला शिवपुरी के डीएमओ शिशिर सिन्हा ने बताया—
"6756 क्विंटल मसूर अमानक मिली है। गोदामों में अलग स्टेक लगाकर बोरियां रखवाई गई हैं। संबंधित संस्थाओं को अपग्रेडिंग के लिए पत्र जारी किए गए हैं। जब तक मसूर अपग्रेड नहीं होगी, भुगतान जारी नहीं किया जाएगा। चना और मसूर की खरीदी 28 मई तक जारी रहेगी।"

❓उठ रहे बड़े सवाल

👉 जब उपार्जन केंद्रों पर ही जांच होती है तो इतनी बड़ी मात्रा में अमानक मसूर खरीदी कैसे हो गई?
👉 क्या खरीदी के दौरान मानकों की अनदेखी की गई?
👉 अगर किसानों की गलती नहीं है तो भुगतान रुकने की जिम्मेदारी किसकी होगी?
👉 क्या सेवा सहकारी संस्थाओं पर कार्रवाई होगी?

अब सभी की नजर मसूर की अपग्रेडिंग प्रक्रिया और किसानों के अटके भुगतान पर टिकी हुई है।
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