शिवपुरी में बड़ा हादसा टला:यात्रियों से भरी बस के इंजन में स्पार्किंग, धुआं उठते ही मची चीख-पुकार

Nikk Pandit
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मुड़खेड़ा टोल के पास रोकी गई बस, RTO ने जब्त कर शुरू की जांच

सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी-ग्वालियर हाईवे पर शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब यात्रियों से भरी एक निजी बस के इंजन से अचानक स्पार्किंग होने लगी और देखते ही देखते धुआं उठने लगा। घटना सुभाषपुरा थाना क्षेत्र के मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास की बताई जा रही है। गनीमत रही कि चालक ने समय रहते बस रोक दी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

जानकारी के मुताबिक सिकरवार ट्रेवल्स की बस क्रमांक MP07 P 4188 शिवपुरी से ग्वालियर जा रही थी। आरोप है कि बस में क्षमता से अधिक यात्री भरे हुए थे। जैसे ही बस मुड़खेड़ा टोल के पास पहुंची, इंजन में स्पार्किंग शुरू हो गई और धुआं निकलने लगा। बस में बैठे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।

बताया जा रहा है कि चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बस को सड़क किनारे रोका और सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतार लिया। कुछ देर बाद धुआं बंद हुआ, लेकिन एहतियात के तौर पर यात्रियों को दूसरी बस से ग्वालियर रवाना किया गया। इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कई यात्रियों की जान बाल-बाल बची।

🚨 सवालों के घेरे में निजी बसों की फिटनेस

इस घटना ने एक बार फिर शिवपुरी-ग्वालियर-गुना रूट पर दौड़ रही निजी बसों की हालत और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि कई बस संचालक नियमों को ताक पर रखकर क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाते हैं और तकनीकी रूप से खराब बसों को भी सड़कों पर उतार देते हैं।

लोगों का कहना है कि फिटनेस सर्टिफिकेट सिर्फ कागजों में दिखाई देते हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। आखिर सवाल यह है कि अगर बस के इंजन में स्पार्किंग हो रही थी तो फिटनेस कैसे पास हुई? क्या परिवहन विभाग सिर्फ हादसे का इंतजार करता है?

⚠️ हादसे के बाद जागा प्रशासन

घटना के बाद परिवहन विभाग हरकत में आया। सूचना मिलते ही शिवपुरी आरटीओ रंजना भदौरिया मौके पर पहुंचीं और संबंधित बस को जब्त कर सुभाषपुरा थाना परिसर में खड़ा करवाया गया। इसके बाद मुड़खेड़ा टोल प्लाजा पर चेकिंग अभियान चलाकर अन्य बसों की भी जांच की गई।

जांच के दौरान बसों के दस्तावेज, फिटनेस और ओवरलोड सवारियों की पड़ताल की गई। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग पहले से नियमित जांच करता, तो यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाली ऐसी घटनाओं पर पहले ही रोक लग सकती थी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है —
❓ क्या कार्रवाई सिर्फ हादसे के बाद ही होगी?
❓ आखिर कब तक ओवरलोड और जर्जर बसें यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ करती रहेंगी?
❓ क्या परिवहन विभाग जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई करेगा या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
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