सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले में बुधवार का दिन दो दर्दनाक हादसों के नाम रहा। एक तरफ रेलवे ट्रैक किनारे एक युवक गंभीर हालत में मिला, जिसका हाथ का पंजा कटा हुआ था, तो दूसरी ओर क्रेशर प्लांट में काम कर रहे मजदूर का हाथ मशीन में फंसकर कंधे तक उखड़ गया। दोनों घटनाओं ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहला मामला लुकवासा चौकी क्षेत्र का है। लिलवारा गांव निवासी 26 वर्षीय जसवीर यादव मंगलवार को बदरवास में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे, लेकिन अगली सुबह उनकी हालत देखकर हर कोई दहल गया। बुधवार सुबह जसवीर रेलवे ट्रैक किनारे गंभीर हालत में पड़े मिले। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची तो देखा कि उनका एक हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त था और पंजा कटा हुआ था।
घायल युवक को तत्काल कोलारस स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर शिवपुरी और फिर ग्वालियर रेफर कर दिया गया। फिलहाल जसवीर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। घटना को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कोई इसे हादसा बता रहा है तो कोई इसके पीछे किसी साजिश की आशंका जता रहा है।
मामले ने तब और रहस्य बढ़ा दिया जब पुलिस को जसवीर यादव की बाइक कुल्हाड़ी गांव के पास हाईवे किनारे लावारिस हालत में मिली। आखिर जसवीर रेलवे ट्रैक तक कैसे पहुंचे? क्या वह किसी हादसे का शिकार हुए या फिर उनके साथ कुछ और हुआ? इन सवालों के जवाब फिलहाल अधूरे हैं। लुकवासा चौकी प्रभारी बैजनाथ मिश्रा का कहना है कि जसवीर के बयान के बाद ही पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकेगी।
वहीं दूसरा हादसा करैरा अनुविभाग के अमोल क्षेत्र स्थित रेत-गिट्टी क्रेशर प्लांट पर हुआ, जहां काम कर रहे 27 वर्षीय धीरज आदिवासी जिंदगीभर का दर्द झेलने को मजबूर हो गए। बताया जा रहा है कि धीरज मशीन की सफाई कर रहे थे, तभी कथित तौर पर बिना जांच किए मशीन चालू कर दी गई। मशीन चालू होते ही उनका हाथ उसमें फंस गया और देखते ही देखते पूरा हाथ कंधे तक उखड़ गया।
हादसे के बाद प्लांट पर चीख-पुकार मच गई। साथी मजदूर तुरंत दौड़े और मशीन बंद कर धीरज को बाहर निकाला। खून से लथपथ हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए आगे रेफर कर दिया। मजदूरों का कहना है कि अगर कुछ सेकंड और देरी हो जाती, तो धीरज की जान भी जा सकती थी।
इन दोनों हादसों ने जिले में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। रेलवे ट्रैक से लेकर क्रेशर प्लांट तक, हर जगह लापरवाही और अव्यवस्था की तस्वीर सामने आ रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी नियमों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा? और क्या हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलती रहेगी?
फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस और संबंधित विभाग जांच में जुटे हैं, लेकिन जिले में चर्चा यही है कि अगर समय रहते सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं हुई, तो ऐसे हादसे आगे भी लोगों की जिंदगी तबाह करते रहेंगे।