बंटी शर्मा शिवपुरी: खबर शिवपुरी किसी ढाबे पर बर्तन मांजता बच्चा… किसी दुकान पर सामान उठाता मासूम… या किसी कारखाने के कोने में पसीना बहाते छोटे हाथ… ये सिर्फ तस्वीरें नहीं, बल्कि उन सपनों की चुपचाप होती हत्या हैं जिन्हें स्कूल की घंटियों के बीच खिलना चाहिए था।
इसी दर्द को समझते हुए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने जिले में साफ संदेश दिया है कि दुकानों, ढाबों, कारखानों या किसी भी नियोजन में बाल श्रमिक नहीं होने चाहिए। श्रम निरीक्षक को जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। क्योंकि बाल श्रम सिर्फ कानून तोड़ना नहीं, बल्कि एक बच्चे के भविष्य से खिलवाड़ है।
जिला स्तरीय समिति की बैठक में बाल श्रम और बंधक श्रम प्रथा के उन्मूलन को लेकर समीक्षा हुई। पूर्व में किए गए रेस्क्यू अभियानों को देखा गया और आगे भी संबंधित विभागों व सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर कार्रवाई तेज करने की बात कही गई। प्रशासन का साफ कहना है कि बचपन मजदूरी के लिए नहीं, सपनों के लिए होता है।
बैठक में जानकारी दी गई कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में काम करवाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों को किसी भी खतरनाक कार्य में नहीं लगाया जा सकता। यह सिर्फ नियम नहीं, बल्कि उन बच्चों की सुरक्षा की दीवार है जो मजबूरी में अपने बचपन से दूर हो जाते हैं।
सोचिए… जिस उम्र में बच्चे कॉपी पर अपना नाम लिखना सीखते हैं, उसी उम्र में अगर वे होटल की मेज साफ कर रहे हों या फैक्ट्री की धूल में सांस ले रहे हों… तो यह सिर्फ उनका नुकसान नहीं, समाज की हार भी है।
बाल श्रम कराने वालों पर कानून भी सख्त है। नियमों का उल्लंघन करने पर 2 वर्ष तक की सजा और 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
एक सवाल हम सबके लिए…
अगर कल किसी ढाबे, दुकान या होटल में कोई बच्चा काम करता दिखे… क्या हम सिर्फ देखकर निकल जाएंगे?
या उसके हाथों में फिर से किताबें लौटाने की कोशिश करेंगे…?
“बचपन को मजदूरी नहीं, मंजिल चाहिए…” 🌸
“छोटे हाथों को काम नहीं, कलम का सहारा चाहिए…” ✍️