सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के पोहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूता को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के बाद शुरू हुआ विवाद अब पुलिस केस तक पहुंच गया है। डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ से अभद्रता, शासकीय कार्य में बाधा और धमकी देने के आरोप में कांग्रेस नेता किशोरी कुशवाह, राकेश यादव और अन्य साथियों के खिलाफ पोहरी थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, रविवार देर रात प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला ख्वी यादव को इलाज के लिए पोहरी सीएचसी लाया गया था। ड्यूटी पर मौजूद डॉ. अंकेश धाकड़ ने जांच के दौरान पाया कि महिला की बच्चेदानी की थैली फट चुकी थी। स्थिति को गंभीर मानते हुए जच्चा और बच्चा दोनों की सुरक्षा के लिए महिला को तत्काल जिला अस्पताल शिवपुरी रेफर किया गया।
बताया गया कि रेफर किए जाने के बाद मरीज को ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी, जिससे परिजनों की नाराजगी बढ़ गई। कुछ देर बाद दूसरी व्यवस्था कर मरीज को जिला अस्पताल भेजा गया, लेकिन तब तक मामला गर्म हो चुका था।
डॉक्टर की शिकायत के मुताबिक, इसी मुद्दे को लेकर किशोरी कुशवाह, राकेश यादव और उनके कुछ साथी अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और स्टाफ के साथ गाली-गलौज की। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि स्टाफ नर्स सीमा वरवा और रघुराज धाकड़ के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया।
शिकायत में अस्पताल प्रशासन की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि हंगामे के दौरान शासकीय कार्य प्रभावित हुआ और कर्मचारियों को डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। अस्पताल स्टाफ का कहना है कि घटना के बाद कर्मचारियों में भय का माहौल बन गया और ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों ने खुद को असहज महसूस किया।
डॉ. अंकेश धाकड़ द्वारा दी गई शिकायत में यह भी कहा गया कि जाते समय आरोपियों ने चेतावनी दी कि यदि मामले की रिपोर्ट पुलिस में की गई तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच शुरू हुई।
मंगलवार दोपहर पोहरी थाना पुलिस ने डॉक्टर की शिकायत के आधार पर किशोरी कुशवाह और राकेश यादव के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को भी खंगाला जा रहा है।
अब इस पूरे मामले में दो बड़े सवाल चर्चा में हैं — अगर एंबुलेंस समय पर मिल जाती तो क्या विवाद की स्थिति बनती? और क्या स्वास्थ्य सेवाओं की कमी ने इस विवाद को बढ़ाने में भूमिका निभाई? वहीं दूसरी ओर अस्पताल स्टाफ सुरक्षा और सम्मान की मांग उठा रहा है, जबकि राजनीतिक हलकों में भी मामला चर्चा का विषय बन गया है।