बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले में कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में बुधवार को शिवपुरी जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। जिला मुख्यालय सहित सभी ब्लॉकों में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय उपवास एवं धरना देकर फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की।
शहर के गुना बायपास स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय पर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में धरना-उपवास आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने नामांकन निरस्त किए जाने की कार्रवाई को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
कोर्ट केस की जानकारी नहीं देने पर हुआ नामांकन निरस्त
जानकारी के अनुसार मंगलवार को रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन निरस्त कर दिया था। भाजपा की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई थी कि उन्होंने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित प्रकरण की जानकारी नामांकन पत्र में उल्लेखित नहीं की थी। आपत्ति की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया।
मोहित अग्रवाल बोले – लोकतंत्र पर हमला
धरने को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित अग्रवाल ने कहा कि केवल एक नोटिस और तकनीकी आधार पर राज्यसभा प्रत्याशी का नामांकन खारिज करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सत्ता के प्रभाव का उपयोग कर विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस फैसले से निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता लोकतंत्र को कमजोर करने वाली ऐसी नीतियों का जवाब समय आने पर देगी।
कोलारस सहित सभी ब्लॉकों में हुआ विरोध
वहीं कोलारस नगर के मानीपुरा स्थित अंबेडकर पार्क में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बलभद्र सिंह धाकड़ के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए निर्णय का विरोध जताया। पार्टी नेताओं ने बताया कि जिले के सभी ब्लॉकों में कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई।
अब उठ रहे हैं कई सवाल
क्या नामांकन निरस्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत हुई? क्या कांग्रेस के आरोपों में दम है या फिर निर्वाचन अधिकारी का निर्णय कानूनी रूप से सही है? और क्या यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का नया केंद्र बनेगा?