बंटी शर्मा शिवपुरी: खबर शिवपुरी जिले के पिछोर अनुविभाग अंतर्गत बामौरकलां थाना क्षेत्र में चर्चित दीक्षा आत्महत्या कांड में पुलिस जांच के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि विवाह के बाद से लगातार मानसिक और घरेलू प्रताड़ना झेल रही महिला ने आखिरकार परेशान होकर आत्मघाती कदम उठाया। मामले में पुलिस ने मृतका के पति और ससुर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार ग्राम सेकरा निवासी 31 वर्षीय दीक्षा यादव 16 मई 2026 को खेत पर बनी एक टपरिया में फांसी के फंदे पर लटकी मिली थी। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की। शुरुआत में मामला सामान्य आत्महत्या का प्रतीत हो रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आते गए।
पुलिस ने मृतका के मायके पक्ष, ग्रामीणों और अन्य लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में पता चला कि दीक्षा यादव को उसके पति कृष्णपाल यादव और ससुर रामसहाय यादव द्वारा शादी के बाद से लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। घरेलू विवाद, मानसिक दबाव और बार-बार होने वाली प्रताड़ना ने दीक्षा को इस कदर तोड़ दिया कि उसने अपनी जीवन लीला समाप्त करने का फैसला कर लिया।
मामले में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद बामौरकलां थाना पुलिस ने अपराध क्रमांक 70/2026 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 एवं 3(5) के तहत प्रकरण कायम किया। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की और 1 जून को पति कृष्णपाल यादव (33 वर्ष) तथा ससुर रामसहाय यादव (66 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव मुले एवं एसडीओपी पिछोर प्रशांत शर्मा के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध और प्रताड़ना के मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को खनियाधाना न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल वारंट जारी होने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है और यदि जांच के दौरान अन्य तथ्य या अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दीक्षा की मौत ने एक बार फिर घरेलू प्रताड़ना और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कब तक बेटियां और बहुएं मानसिक उत्पीड़न का शिकार होती रहेंगी? क्या समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता तो एक परिवार की यह दर्दनाक कहानी टल सकती थी? अब पूरे क्षेत्र की नजर इस मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।