बंटी शर्मा शिवपुरी:कुछ रिश्ते समय के साथ खत्म नहीं होते, बल्कि जीवनभर प्रेरणा बनकर साथ चलते हैं। पिता का साया भले ही सिर से उठ जाए, लेकिन उनके दिए संस्कार यदि सेवा, करुणा और मानवता के रूप में समाज तक पहुंचें, तो वही सच्ची श्रद्धांजलि कहलाती है।
शिवपुरी में ऐसा ही भावुक और प्रेरणादायक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह रघुवंशी (जीतू) ने अपने पूज्य पिता स्वर्गीय श्री नारायण सिंह रघुवंशी की 18वीं पुण्यतिथि को शोक का दिन नहीं, बल्कि मानव सेवा का महापर्व बना दिया।
दिनभर चले सेवा कार्यों ने यह साबित कर दिया कि माता-पिता की स्मृतियों को केवल फूल अर्पित कर नहीं, बल्कि उनके बताए रास्ते पर चलकर जीवित रखा जा सकता है। जीतू रघुवंशी ने अपने पिता के संस्कारों को समाज के बीच जीवंत करते हुए जरूरतमंदों, मरीजों, गौवंश और बेसहारा पशुओं की सेवा कर हर किसी का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 9:30 बजे माधव चौक स्थित हनुमान मंदिर से हुई। यहां बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों को प्रेमपूर्वक भोजन (लंगर) वितरित किया गया। भोजन ग्रहण कर रहे लोगों के चेहरों पर संतोष और आशीर्वाद की मुस्कान साफ दिखाई दे रही थी। यह केवल अन्नदान नहीं था, बल्कि उन लोगों के प्रति संवेदना का भाव था, जिन्हें समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है।
इसके बाद सुबह 11 बजे जिला चिकित्सालय परिसर स्थित कल्याणी धर्मशाला में भर्ती मरीजों के परिजनों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। अस्पताल में कई ऐसे परिवार रहते हैं जो अपने बीमार परिजनों की सेवा में दिन-रात लगे रहते हैं और कई बार स्वयं भोजन तक नहीं कर पाते। ऐसे लोगों को सम्मानपूर्वक भोजन कराकर जीतू रघुवंशी ने मानवता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसकी उपस्थित लोगों ने मुक्त कंठ से सराहना की।
सेवा का यह सिलसिला शाम तक जारी रहा। शाम 5:30 बजे बाणगंगा रोड स्थित पशु रक्षक संघ द्वारा संचालित गौशाला पहुंचकर उन्होंने विधि-विधान से गौ पूजन किया। इसके बाद गायों को हरा चारा, चुनी, अनाज, दाना, सब्जियां और फल खिलाए गए। वहीं गौशाला में मौजूद बेसहारा डॉगी को भी दूध पिलाकर यह संदेश दिया गया कि सेवा केवल इंसानों तक सीमित नहीं होती, बल्कि हर जीव के प्रति दया और करुणा ही सच्चा धर्म है।
पूरे दिन के इन सेवा कार्यों के दौरान एक भाव बार-बार झलकता रहा—"सेवा में ही सच्ची श्रद्धांजलि है।" यही वह संस्कार हैं, जो स्वर्गीय श्री नारायण सिंह रघुवंशी अपने परिवार को देकर गए थे। आज उनके पुत्र उन्हीं मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
इस अवसर पर जितेन्द्र सिंह रघुवंशी (जीतू) ने कहा कि उनके पिताजी हमेशा जरूरतमंदों की सहायता और मानव सेवा के लिए प्रेरित करते थे। उनका मानना था कि किसी भूखे को भोजन, किसी पीड़ित की मदद और किसी असहाय जीव की सेवा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं हो सकता। आज उन्हीं आदर्शों को आगे बढ़ाने का उनका छोटा-सा प्रयास है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने माता-पिता की पुण्यतिथि पर दिखावे के बजाय सेवा का संकल्प लें, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
इस पुनीत सेवा अभियान में उनके इष्ट मित्र गोपाल शर्मा, महेंद्र वशिष्ठ, राहुल केवट, ललित गर्ग, सागर शर्मा , ऋषि सेन सहित अनेक सहयोगियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने पूरे समर्पण के साथ सेवा कार्यों को सफल बनाया और जरूरतमंदों के बीच आत्मीयता का संदेश पहुंचाया।
रघुवंशी परिवार की यह पहल केवल एक धार्मिक या पारिवारिक आयोजन नहीं रही, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का संदेश बन गई। ऐसे समय में, जब अधिकांश लोग पुण्यतिथि को औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित रखते हैं, वहीं जीतू रघुवंशी ने इसे सेवा, संवेदना और संस्कारों का उत्सव बनाकर यह साबित किया कि माता-पिता की सबसे बड़ी श्रद्धांजलि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारना है।
स्वर्गीय श्री नारायण सिंह रघुवंशी भले आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके संस्कार आज भी उनके परिवार के माध्यम से समाज में जीवित हैं। उनकी पुण्यतिथि पर किया गया यह सेवा संकल्प आने वाली पीढ़ियों को भी यह संदेश देता है कि इंसान अपने कर्मों से अमर होता है, और सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं। यही सच्ची श्रद्धांजलि है, यही सच्चा सम्मान है।