बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के पोहरी अनुविभाग के ग्राम अनभौरा में आदिवासी परिवारों की पट्टाशुदा जमीन पर दोबारा अवैध कब्जे का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिस जमीन को कुछ समय पहले राजस्व और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान दबंगों के कब्जे से मुक्त कराया गया था, उसी भूमि पर फिर से अतिक्रमण की शिकायत मिलने पर पोहरी एसडीएम जेपी गुप्ता ने मंगलवार को तीन आरोपियों के खिलाफ जेल वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। प्रशासन का साफ संदेश है कि गरीब, दलित और आदिवासी परिवारों की जमीन पर दोबारा कब्जे की कोशिश करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
जानकारी के अनुसार जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर कुछ समय पहले ग्राम अनभौरा में राजस्व और पुलिस विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर करीब 150 बीघा शासकीय एवं पट्टे की भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया था। प्रशासन के अनुसार इस भूमि की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ रुपए है। कार्रवाई के बाद यह जमीन 64 आदिवासी पट्टाधारियों को विधिवत सौंप दी गई थी, जिससे वर्षों से अपने अधिकार से वंचित परिवारों को राहत मिली थी।
प्रशासन ने उस समय संबंधित लोगों से बाउंड ओवर भी भरवाए थे और स्पष्ट चेतावनी दी थी कि भविष्य में यदि किसी ने दोबारा जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद आरोप है कि कुछ लोगों ने फिर से आदिवासी परिवारों की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया। इससे परेशान पट्टाधारियों ने सामूहिक रूप से पोहरी एसडीएम कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और न्याय की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराई। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर एसडीएम जेपी गुप्ता ने ग्राम अनभौरा निवासी अशोक कुमार पिता इंदर सिंह जाट, विनीत कुमार पिता जय सिंह जाट और जुगवीर पिता गजेसिंह जाट के खिलाफ जेल वारंट जारी करने के आदेश दिए। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति है।
एसडीएम जेपी गुप्ता ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता गरीब, दलित और आदिवासी परिवारों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन भूमियों को प्रशासन ने कब्जा मुक्त कराकर वास्तविक पट्टाधारियों को सौंपा है, उन पर दोबारा अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति कानून हाथ में लेकर दोबारा अतिक्रमण करेगा तो उसके खिलाफ सीधे कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई को आदिवासी परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से भूमि विवादों से जूझ रहे ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होगी, जिससे भविष्य में कोई भी दबंग गरीबों की जमीन पर कब्जा करने का साहस नहीं कर सकेगा। अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि पूरे जिले में ऐसे मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है और जहां भी शिकायत मिलेगी, वहां तत्काल कार्रवाई की जाएगी।