बंटी शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिला न्यायालय परिसर मंगलवार को उस समय हंगामे का केंद्र बन गया, जब पारिवारिक विवाद के एक मामले की सुनवाई के बाद एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर मारपीट करने तथा छह माह की मासूम बच्ची को जबरन उठाकर ले जाने की कोशिश का आरोप लगाया। महिला का दावा है कि घटना न्यायालय परिसर में हुई और न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद सुरक्षाकर्मियों ने बच्ची को आरोपियों के कब्जे से छुड़ाया। पीड़िता ने कोतवाली थाना पुलिस को लिखित आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है।
महिला द्वारा पुलिस को दिए गए आवेदन के अनुसार, वह 28 जुलाई 2026 को अपने पारिवारिक विवाद से जुड़े प्रकरण की पेशी के लिए प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय, शिवपुरी में उपस्थित हुई थी। सुनवाई पूरी होने के बाद वह अपने माता-पिता और छह माह की पुत्री के साथ न्यायालय परिसर से बाहर निकल रही थी। इसी दौरान उसका पति और ससुराल पक्ष के कुछ लोग वहां पहुंच गए।
महिला का आरोप है कि आरोपियों ने पहले उसके साथ अभद्रता और मारपीट की। इसके बाद उसकी छह माह की बच्ची को जबरन उठाकर ले जाने का प्रयास किया। जब उसने और उसके माता-पिता ने इसका विरोध किया तो उनके साथ भी मारपीट की गई। महिला का आरोप है कि इसके बाद उन्हें जबरन एक वाहन में बैठाने का भी प्रयास किया गया।
आवेदन में महिला ने बताया कि घटना के दौरान उसने तत्काल कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद न्यायालय के निर्देश पर मौजूद सुरक्षाकर्मी सक्रिय हुए और बच्ची को आरोपियों के कब्जे से छुड़ाया। महिला का आरोप है कि जाते समय आरोपी धमकी देकर गए कि वे दोबारा आकर उसे और उसकी बेटी को उठा ले जाएंगे।
महिला ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि यह पहली घटना नहीं है। उसके अनुसार, पहले भी उसके और उसकी मासूम पुत्री के साथ इस प्रकार की घटनाएं हो चुकी हैं। उसका कहना है कि यदि आरोपियों के खिलाफ समय रहते सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो उसके, उसकी बेटी और उसके माता-पिता की जान को खतरा हो सकता है।
महिला ने कोतवाली थाना पुलिस से पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ उसे और उसके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। पुलिस ने आवेदन प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों, सुरक्षाकर्मियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि महिला और उसका पति पहले इंदौर में लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रहते थे। दोनों की एक छह माह की बेटी भी है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से दोनों के संबंधों में विवाद चल रहा है। महिला अब युवक के साथ नहीं रहना चाहती, जबकि युवक अपनी बेटी को अपने साथ रखना चाहता है। इसी विवाद को लेकर मामला कुटुंब न्यायालय तक पहुंचा है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि महिला द्वारा लगाए गए आरोप फिलहाल शिकायत का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, इस मामले में आरोपी पक्ष का बयान अभी सामने नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि सभी पक्षों के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल न्यायालय परिसर में कथित तौर पर हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और पारिवारिक विवादों के बढ़ते तनाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।