बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश अब केवल जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति ही नहीं बना रही, बल्कि जंगली जीवों की गतिविधियां भी तेजी से बढ़ने लगी हैं। इसी बीच शिवपुरी जिले के ग्राम अकोदा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद करीब 5 से 6 फीट लंबा मगरमच्छ धान के खेत तक पहुंच गया। खेत में काम कर रहे मजदूरों ने जैसे ही मगरमच्छ को देखा, वहां अफरा-तफरी मच गई और सभी मजदूर अपनी जान बचाकर खेत से बाहर निकल आए। घटना की खबर पूरे गांव में फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई।
जानकारी के अनुसार यह घटना शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे की है। गांव के पास बहने वाली नदी के किनारे स्थित खेत में किसान और मजदूर धान की रोपाई का कार्य कर रहे थे। लगातार बारिश के कारण खेत में पर्याप्त पानी भरा हुआ था और रोपाई का काम तेजी से चल रहा था। इसी दौरान खेत के बीच पानी में अचानक तेज हलचल दिखाई दी। पहले मजदूरों को लगा कि कोई बड़ा जानवर या मछली होगी, लेकिन जब उन्होंने पास जाकर देखा तो पानी के बीच एक विशाल मगरमच्छ बैठा हुआ था।
करीब 5 से 6 फीट लंबे मगरमच्छ को सामने देखकर मजदूरों के होश उड़ गए। किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए सभी मजदूर तुरंत खेत से बाहर निकल आए। कुछ देर तक मगरमच्छ खेत के बीच ही शांत बैठा रहा। इसके बाद मजदूरों ने गांव के लोगों को इसकी जानकारी दी। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और सुरक्षित दूरी बनाकर मगरमच्छ को देखने लगे।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से जिले में लगातार बारिश हो रही है, जिससे नदी और नालों का जलस्तर काफी बढ़ गया है। संभावना जताई जा रही है कि तेज बहाव के कारण मगरमच्छ नदी से बहकर खेत तक पहुंच गया। खेत नदी के काफी नजदीक होने के कारण बारिश के दौरान इस तरह की घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
शाम ढलने के बाद मगरमच्छ कुछ सक्रिय जरूर दिखाई दिया, लेकिन वह खेत से बाहर नहीं निकला। रात तक आसपास के गांवों से भी लोग मगरमच्छ को देखने पहुंचते रहे। हालांकि ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखी और किसी ने भी उसे छेड़ने या पकड़ने का प्रयास नहीं किया। घटना के चलते क्षेत्र में काफी देर तक लोगों की भीड़ लगी रही।
स्थानीय किसानों का कहना है कि बारिश के मौसम में खेतों में काम करने वाले मजदूरों और किसानों के सामने अब नई चुनौती खड़ी हो गई है। जहां एक ओर खेती का काम जारी रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर नदी से निकलकर आने वाले मगरमच्छ और अन्य जंगली जीवों का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में खेतों में काम करने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक हो गया है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में नदियों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलकर नए क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। कई बार तेज बहाव उन्हें खेतों, तालाबों और आबादी वाले इलाकों तक भी ले आता है। ऐसे समय लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत होती है। यदि कहीं मगरमच्छ दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे भगाने का प्रयास नहीं करना चाहिए, बल्कि तत्काल वन विभाग या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना देना चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में वन विभाग और प्रशासन की टीम भेजी जाए ताकि मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से पकड़कर वापस उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके। इससे किसानों और ग्रामीणों में व्याप्त भय भी समाप्त होगा और किसी प्रकार की अप्रिय घटना की आशंका भी नहीं रहेगी।
लगातार हो रही बारिश के बीच यह घटना प्रशासन और ग्रामीणों दोनों के लिए चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो नदी-नालों से मगरमच्छ सहित अन्य जंगली जीव आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच सकते हैं। इसलिए विशेष रूप से नदी किनारे रहने वाले लोग, किसान और खेतों में काम करने वाले मजदूर पूरी सावधानी बरतें तथा किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें। फिलहाल अकोदा गांव में मगरमच्छ दिखाई देने की घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं।