माधव टाइगर रिजर्व में इस सीजन पहुंचे 9,620 पर्यटक: देशी सैलानी घटे, विदेशी पर्यटकों की संख्या तीन गुना बढ़ी, सेलिंग क्लब गेट बना पहली पसंद

Shivpuri First
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माधव टाइगर रिजर्व 

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के सबसे नए टाइगर रिजर्व में शामिल माधव टाइगर रिजर्व का वर्ष 2025-26 का पर्यटन सत्र समाप्त हो गया है। 1 जुलाई से रिजर्व को आगामी 30 सितंबर तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। हर साल की तरह इस बार भी मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन, बच्चों की परवरिश और जंगल के प्राकृतिक संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। अब रिजर्व अक्टूबर में नया पर्यटन सत्र शुरू होने पर दोबारा पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। 

पानी पीता हुआ टाइगर


पर्यटन सत्र समाप्त होने के बाद वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों में कई दिलचस्प तथ्य सामने आए हैं। इस बार कुल पर्यटकों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में कम रही, लेकिन विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, रिजर्व में प्रवेश करने वाले लगभग 90 प्रतिशत पर्यटकों ने सेलिंग क्लब गेट से सफारी करना पसंद किया, जबकि भरकुली गेट से केवल करीब 10 प्रतिशत पर्यटक ही पहुंचे। 

विचरण करते हिरण 


वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 के पर्यटन सत्र में माधव टाइगर रिजर्व में कुल 14,467 पर्यटक पहुंचे थे। इनमें केवल 14 विदेशी पर्यटक शामिल थे। वहीं अक्टूबर 2025 से जून 2026 तक चले इस पर्यटन सत्र में कुल 9,620 पर्यटकों ने टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया। इनमें 47 विदेशी सैलानी शामिल रहे। इस प्रकार कुल पर्यटकों की संख्या में 4,847 की कमी दर्ज की गई, लेकिन विदेशी पर्यटकों की संख्या तीन गुना से अधिक बढ़ गई। 

शिकार की तलाश में तेंदुआ


वन अधिकारियों का मानना है कि विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि माधव टाइगर रिजर्व अब राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है। सोशल मीडिया, वन्यजीव फोटोग्राफी और मध्य प्रदेश के टाइगर सर्किट में शामिल होने के कारण विदेशी पर्यटक भी अब इस रिजर्व की ओर आकर्षित होने लगे हैं। 

सेलिंग क्लब गेट से सबसे ज्यादा हुई सफारी 

इस पूरे पर्यटन सत्र में आने वाले करीब 90 प्रतिशत पर्यटकों ने सेलिंग क्लब गेट से प्रवेश कर दक्षिण रेंज का भ्रमण किया। केवल लगभग 10 प्रतिशत पर्यटक ही भरकुली गेट से पूर्वी रेंज में पहुंचे। दोनों क्षेत्रों के बीच यह बड़ा अंतर कई कारणों से देखने को मिला। 

सेलिंग क्लब गेट शहर की सीमा से लगा हुआ है। यहां तक पहुंचना आसान है और पर्यटकों को कम समय में सफारी शुरू करने का अवसर मिल जाता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में स्थित चांदपाठा झील, ऐतिहासिक जॉर्ज कैसल और झील किनारे बना सेलिंग क्लब लंबे समय से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं। 

वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी यह क्षेत्र अधिक पसंदीदा रहा। यहां टाइगर, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय, हाथी और विभिन्न पक्षियों की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलती हैं। झील और अन्य जलस्रोत होने के कारण गर्मी के मौसम में वन्यजीव पानी पीने के लिए अक्सर इस क्षेत्र में पहुंचते हैं, जिससे पर्यटकों को वन्यजीवों के दर्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। 

भरकुली गेट तक कम पहुंचे पर्यटक 

भरकुली गेट शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है। इस गेट से पूर्वी रेंज में प्रवेश मिलता है। यहां बलारपुर मंदिर प्रमुख आकर्षण है, लेकिन सेलिंग क्लब क्षेत्र की तुलना में यहां वन्यजीवों की गतिविधियां अपेक्षाकृत कम दिखाई देती हैं। यही कारण रहा कि इस सीजन अधिकांश पर्यटकों ने इस मार्ग को नहीं चुना। 

वन विभाग का मानना है कि अतिरिक्त दूरी तय करने और ईंधन खर्च बढ़ने के कारण भी पर्यटक भरकुली गेट जाने से बचते हैं। स्थानीय पर्यटक कम समय में सफारी पूरी करना चाहते हैं, इसलिए वे शहर के नजदीक स्थित सेलिंग क्लब गेट को प्राथमिकता देते हैं। 

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि भरकुली क्षेत्र भी प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहां सफारी करने वाले पर्यटकों को अलग तरह का अनुभव मिलता है और भविष्य में इस क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ने के बाद पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है। 

वन विभाग को अगले सीजन से उम्मीद 

वन विभाग का कहना है कि आने वाले पर्यटन सत्र में रिजर्व के दोनों क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं को और बेहतर बनाने की योजना है। यदि भरकुली क्षेत्र में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया जाता है और वहां वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ती हैं तो पर्यटकों का रुझान उस ओर भी बढ़ सकता है। माधव टाइगर रिजर्व में लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही जंगल में अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी भी बेहतर हुई है। यही वजह है कि वन विभाग को उम्मीद है कि अगले पर्यटन सत्र में पर्यटकों की संख्या फिर बढ़ेगी। 

टाइगर रिजर्व के उप संचालक हरिओम ने बताया कि इस सीजन भरकुली गेट से लगभग 5 से 10 प्रतिशत पर्यटक ही भ्रमण के लिए पहुंचे हैं। 

उन्होंने बताया कि अधिकांश पर्यटक पहले से सेलिंग क्लब गेट वाले मार्ग से परिचित हैं, इसलिए वे उसी रास्ते को चुनते हैं। हालांकि भरकुली गेट से जाने वाले पर्यटकों को भी जंगल का अलग अनुभव और रोमांच मिलता है। वन विभाग आने वाले समय में वहां सुविधाएं बढ़ाने पर काम करेगा। 

पिछले कुछ वर्षों में विदेशी पर्यटकों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। हालांकि इस बार देशी पर्यटकों की संख्या कम रही, लेकिन विदेशी सैलानियों की बढ़ती मौजूदगी माधव टाइगर रिजर्व के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। वन विभाग को उम्मीद है कि अक्टूबर से शुरू होने वाले नए पर्यटन सत्र में बेहतर सुविधाएं, बढ़ती बाघों की संख्या और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों की संख्या में फिर से बढ़ोतरी होगी। साथ ही भरकुली गेट क्षेत्र में भी पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि दोनों रेंज में पर्यटकों का संतुलित आवागमन हो सके और पूरे टाइगर रिजर्व का पर्यटन विकास समान रूप से हो।
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