शिवपुरी में ‘मौत की रफ्तार’ से दौड़ रही बसें:मीडियन की गीली मिट्टी ने बचाई यात्रियों की जान;पलट जाती बस तो कौन होता जिम्मेदार

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा ECG:खबर शिवपुरी जिले की सड़कों पर यात्री बसों की बेलगाम रफ्तार एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। बुधवार तड़के बदरवास थाना क्षेत्र में एनएच-46 पर तेज रफ्तार स्लीपर कोच बस अनियंत्रित होकर हाईवे के मीडियन में उतर गई।

गनीमत रही कि बारिश के कारण मीडियन की मिट्टी गीली थी और बस उसमें फंस गई। यदि बस पलट जाती तो यह हादसा कितना भयावह होता, इसका अंदाजा बस में सवार यात्रियों की संख्या और दुर्घटनास्थल की स्थिति से लगाया जा सकता है। हादसे में कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यात्री बसों की रफ्तार, चालकों की लापरवाही और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार कृष्णा ट्रेवल्स की स्लीपर कोच बस क्रमांक MP 31 ZD 8199 इंदौर से ग्वालियर की ओर जा रही थी। बुधवार सुबह करीब 4:30 बजे बस बदरवास के सड़ बाईपास के पास पहुंची, तभी अचानक चालक बस से नियंत्रण खो बैठा। तेज रफ्तार बस सड़क छोड़कर सीधे हाईवे के मीडियन में उतर गई। बस के मीडियन में उतरते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। नींद में सो रहे यात्री अचानक लगे झटके से घबरा गए और बस के भीतर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्ष स्थिति को देखें तो मीडियन की गीली मिट्टी इस हादसे में यात्रियों के लिए किसी सुरक्षा कवच से कम साबित नहीं हुई। बस मिट्टी में धंसकर रुक गई और पलटने से बच गई। सवाल यह है कि यदि मीडियन की मिट्टी गीली नहीं होती और बस तेज गति से आगे बढ़ते हुए पलट जाती, तो क्या तस्वीर होती? क्या दर्जनों यात्रियों की जिंदगी खतरे में नहीं पड़ती? आखिर यात्री बसों को सड़कों पर मनमानी रफ्तार से दौड़ाने की छूट किसने दे रखी है?

हादसे के बाद सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि बस चालक और अन्य स्टाफ मौके से फरार हो गए। जिन यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी चालक और बस स्टाफ पर थी, दुर्घटना होते ही उन्हें कथित तौर पर अपने हाल पर छोड़ दिया गया। यह स्थिति बस संचालन व्यवस्था और यात्रियों के प्रति जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दुर्घटना के बाद चालक का मौके से चले जाना भी पुलिस जांच का महत्वपूर्ण विषय है।

घटना की सूचना मिलने पर बदरवास थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बस में फंसे और घबराए यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई। हादसे में बामौरकला निवासी मोनिका जाटव सहित कुछ यात्रियों को हल्की चोटें आने की जानकारी सामने आई है। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।

हादसे के बाद यात्रियों ने बस चालक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यात्रियों का कहना है कि चालक शुरुआत से ही बस को तेज रफ्तार और लापरवाही से चला रहा था। यात्रियों के अनुसार रास्ते में कई बार चालक से बस की गति कम करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने यात्रियों की बात पर ध्यान नहीं दिया। यदि यात्रियों के आरोप सही हैं तो सवाल यह है कि आखिर चालक को इतनी जल्दबाजी किस बात की थी? क्या निर्धारित समय पर बस पहुंचाने का दबाव यात्रियों की जिंदगी से बड़ा हो गया है?

शिवपुरी जिले से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री बसें दौड़ती हैं। इनमें कई लंबी दूरी की स्लीपर और यात्री बसें शामिल हैं। रात और तड़के के समय बसों की रफ्तार को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। यात्रियों की शिकायत रहती है कि कई चालक खाली सड़क देखकर बसों की गति बढ़ा देते हैं। ऐसे में अचानक सामने वाहन, मवेशी या सड़क पर कोई अन्य बाधा आने पर बस को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

अब बड़ा सवाल परिवहन विभाग की निगरानी पर भी उठता है। बसों के दस्तावेज, फिटनेस, परमिट और अन्य औपचारिकताओं की जांच तो समय-समय पर होती दिखाई देती है, लेकिन क्या बस चालकों की वास्तविक ड्राइविंग और सड़कों पर दौड़ रही बसों की गति की प्रभावी निगरानी हो रही है? क्या लंबी दूरी की बसों में चालकों के ड्यूटी और आराम के समय की जांच की जाती है? क्या यात्रियों की शिकायत दर्ज करने और तत्काल कार्रवाई के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था धरातल पर दिखाई देती है?

हर बड़े हादसे के बाद कुछ दिनों तक बसों की जांच, चालान और कार्रवाई की खबरें सामने आती हैं। इसके बाद व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर लौटती नजर आती है। बदरवास का यह हादसा बड़ा नहीं बना, इसलिए शायद कुछ दिनों बाद लोग इसे भूल जाएं, लेकिन प्रशासन और परिवहन विभाग को इसे चेतावनी के रूप में देखना चाहिए। हादसे का इंतजार करने के बजाय तेज रफ्तार और लापरवाह बस चालकों के खिलाफ लगातार अभियान चलाना जरूरी है।

फिलहाल बदरवास थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद दुर्घटना के वास्तविक कारण और चालक की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। लेकिन इस हादसे ने जिले में यात्री बसों की रफ्तार और यात्री सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।
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