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| सड़कों पर गड्ढे, जिनमें भरा पानी |
शिवपुरी। मानसून की पहली बारिश ने शिवपुरी शहर में विकास और प्री-मानसून तैयारियों की हकीकत सामने ला दी है। बारिश के बाद शहर की कई प्रमुख सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई हैं, जबकि जगह-जगह खुले पड़े सीवर चेंबर लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। सबसे ज्यादा खराब हाल रेलवे स्टेशन रोड के हैं, जहां सड़क कई जगह धंस गई है। गड्ढों और जलभराव की वजह से वाहन चालकों को रोज परेशानी उठानी पड़ रही है। कई बार जाम की स्थिति बन रही है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।
रेलवे स्टेशन रोड पर हालात इतने खराब हैं कि सड़क पर करीब तीन फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। शुक्रवार रात एक बाइक सवार इसी गड्ढे में गिरकर घायल हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के पानी में गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे हादसे हो रहे हैं। दो दिन पहले भाजपा नेता धैर्यवर्धन शर्मा की कार भी सड़क पर खुले और टूटे चेंबर में फंस गई थी, जिससे वाहन को नुकसान पहुंचा।
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| सड़कों पर खुले पड़े चैंबर |
इसी सड़क पर दो से तीन स्थानों पर सीवर चेंबर बिना ढक्कन के खुले पड़े हैं। रात के समय यहां से गुजरना बेहद जोखिम भरा हो गया है। पिछले साल भी इसी इलाके में खुले चेंबर में गिरने से दो बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हुए थे और उनकी टांग तक टूट गई थी। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों ने स्थायी व्यवस्था नहीं की।
फतेहपुर रोड सहित शहर की कई अन्य सड़कों पर भी यही स्थिति बनी हुई है। कहीं सड़क धंस गई है तो कहीं चेंबर खुले पड़े हैं। बारिश के कारण इन स्थानों पर पानी भर जाता है, जिससे लोगों को पता ही नहीं चलता कि सड़क कहां है और गड्ढा या चेंबर कहां। ऐसे में हर दिन किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
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| मुसीबत की राह |
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले नगर पालिका और पीएचई विभाग की ओर से सड़कों की मरम्मत और चेंबरों के ढक्कन बदलने के दावे किए जाते हैं। लाखों रुपए खर्च होने की बात भी कही जाती है, लेकिन पहली ही बारिश में सारी व्यवस्था जवाब दे जाती है। जिन सड़कों पर पैचवर्क किया गया था, वहां भी गिट्टी उखड़ गई है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
शहर में खराब सड़कों, खुले चेंबर, जाम और जलभराव की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। सीएम हेल्पलाइन पर भी इन समस्याओं से जुड़ी बड़ी संख्या में शिकायतें लंबित बताई जा रही हैं। लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बाद भी मौके पर सुधार नहीं होता और अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहते हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। वार्ड-1 के पार्षद अमरदीप शर्मा का कहना है कि उन्होंने नगर पालिका को गड्ढे भरने और पीएचई विभाग को खुले चेंबरों पर ढक्कन लगाने के लिए कई बार कहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनके मुताबिक पूरी सड़क पर पानी भर रहा है और लोगों को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि वे एक बार फिर इस मुद्दे को उठाएंगे।
वार्ड-7 के पार्षद अरविंद ठाकुर ने भी रेलवे स्टेशन रोड की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वे इस सड़क की समस्या को लेकर विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार अवगत करा चुके हैं। खुले चेंबरों का मामला भी बार-बार उठाया गया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई। इसी लापरवाही का नतीजा है कि आज सड़कें बदहाल हैं और चेंबर खुले पड़े हैं।
ऑटो चालक राजू कुशवाह का कहना है कि गड्ढों से बचने के चक्कर में रोज जाम लगता है। उनकी गाड़ी के शॉकर दो बार टूट चुके हैं और वाहन की मरम्मत में लगातार खर्च करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि खराब सड़कों की वजह से उन्हें रोज आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और ऐसा लगता है कि शहर की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।
शहर की सड़कों को लेकर नगर पालिका, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और पीएचई विभाग तीनों की जिम्मेदारी तय है। सड़कों का निर्माण और मरम्मत अलग-अलग एजेंसियों के जिम्मे है, जबकि सीवर चेंबरों की जिम्मेदारी पीएचई विभाग की है। इसके बावजूद तीनों विभागों के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। नई बनी कई सड़कें भी गारंटी अवधि के भीतर खराब हो गई हैं, लेकिन अब तक किसी ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।
पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल का कहना है कि सीवर की सफाई का काम चल रहा है। इस दौरान कई चेंबरों के फ्रेम टूटे हुए मिल रहे हैं। संबंधित एजेंसी को निर्देश दिए गए हैं कि नए फ्रेम पहले से उपलब्ध रखें और किसी भी चेंबर को खुला न छोड़ें, ताकि लोगों को परेशानी न हो।
फिलहाल शहरवासियों की मांग है कि बारिश का मौसम अभी शुरू ही हुआ है, इसलिए जिम्मेदार विभाग तत्काल सड़क मरम्मत, गड्ढों को भरने और खुले चेंबरों पर मजबूत ढक्कन लगाने का काम शुरू करें। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो आने वाले दिनों में बड़े हादसे होने से इंकार नहीं किया जा सकता। मानसून की पहली बारिश ने साफ कर दिया है कि कागजों में किए गए विकास और जमीन पर दिखाई देने वाली हकीकत में अभी भी बड़ा अंतर है।



