मेडिकल कॉलेज के पीछे माफिया का खेल बेनकाब:शासकीय जमीन छलनी, शिकायतों के बाद जागा प्रशासन

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी: खबर शिवपुरी शहर के मेडिकल कॉलेज के पीछे स्थित शासकीय भूमि पर लंबे समय से चल रहे अवैध खनन के खेल का आखिरकार शुक्रवार को पर्दाफाश हो गया। महीनों तक लाल मुरम और पत्थरों का अवैध उत्खनन होता रहा, लेकिन जिम्मेदार विभाग मौन बना रहा। लगातार शिकायतों और सोशल मीडिया पर मामला जोर-शोर से उठने के बाद खनिज विभाग हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हुए अवैध खनन में लगी दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर लीं। अब पूरे मामले का प्रकरण तैयार कर कलेक्टर न्यायालय भेजा जाएगा, जहां नियमानुसार जुर्माना और अन्य वैधानिक कार्रवाई होगी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि स्थानीय लोग आवाज नहीं उठाते और सोशल मीडिया पर मामला वायरल नहीं होता, तो क्या यह कार्रवाई होती? आखिर महीनों तक सरकारी जमीन से लाखों रुपए की मुरम और पत्थर निकलते रहे और जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? यह सवाल अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज के पीछे स्थित शासकीय भूमि पर लंबे समय से अवैध खनन का कारोबार बेखौफ तरीके से संचालित हो रहा था। खनन माफियाओं ने जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से बड़े पैमाने पर खुदाई कर जमीन को गहरे गड्ढों में तब्दील कर दिया। क्षेत्र में जगह-जगह बने गहरे खड्डे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां लंबे समय से अवैध उत्खनन होता रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले की शिकायत कई बार संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों से की गई थी, लेकिन हर बार शिकायतें फाइलों तक सीमित रह गईं। कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिलता रहा, जबकि दूसरी ओर खनन माफिया लगातार सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते रहे।

जब शिकायतों पर भी सुनवाई नहीं हुई तो लोगों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। अवैध खनन की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। इसके बाद खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए अवैध खनन में उपयोग की जा रही दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर लीं।

खनिज निरीक्षक ऋषभ सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद टीम ने मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान अवैध खनन की पुष्टि होने पर दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की गई हैं। दोनों वाहनों को यातायात थाना पुलिस की अभिरक्षा में रखा गया है। पूरे मामले का प्रकरण तैयार कर कलेक्टर न्यायालय भेजा जाएगा, जहां नियमानुसार जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका आरोप है कि इस पूरे अवैध कारोबार के पीछे संगठित गिरोह सक्रिय है, जिसने लंबे समय तक सरकारी जमीन से लाखों रुपए की मुरम और पत्थर निकालकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। लोगों ने मांग की है कि पूरे नेटवर्क की जांच कर मुख्य आरोपियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि अवैध खनन से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ है, बल्कि इलाके की भौगोलिक संरचना भी पूरी तरह बदल गई है। गहरे गड्ढों के कारण भविष्य में हादसों की आशंका भी बढ़ गई है। बरसात के मौसम में ये गड्ढे पानी से भर सकते हैं, जिससे आसपास के लोगों और पशुओं के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

अब इस कार्रवाई के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि महीनों तक सरकारी जमीन पर अवैध खनन चलता रहा, तो निगरानी करने वाले जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे थे? क्या संबंधित अधिकारियों ने समय-समय पर क्षेत्र का निरीक्षण किया था? यदि शिकायतें पहले से मिल रही थीं, तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई?

फिलहाल खनिज विभाग ने कार्रवाई कर दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर ली हैं और मामला कलेक्टर न्यायालय भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या केवल वाहन जब्त करने तक कार्रवाई सीमित रहेगी या फिर सरकारी जमीन को नुकसान पहुंचाने वाले पूरे खनन नेटवर्क पर भी प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले में चल रहे अन्य अवैध खनन स्थलों की भी व्यापक जांच कराई जाए, ताकि सरकारी भूमि और प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। उनके अनुसार, यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो खनन माफियाओं के हौसले और बुलंद हो सकते हैं।
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