अस्पताल के गायनिक वार्ड में हंगामागार्ड-परिजनों में भिड़ंत,CCTV फुटेज से खुलेगा सच

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:जिला अस्पताल के गायनिक वार्ड में शुक्रवार दोपहर उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब सात माह की गर्भवती महिला के परिजनों और गेट पर तैनात महिला सुरक्षा गार्ड के बीच प्रवेश को लेकर विवाद हो गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि गार्ड ने उनके साथ अभद्रता करते हुए हाथ पकड़कर खींचा और थप्पड़ मारने की कोशिश की, जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वार्ड में निर्धारित संख्या से अधिक लोगों को प्रवेश से रोका गया था। अब पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।

घटना ने कुछ देर के लिए जिला अस्पताल के गायनिक वार्ड का माहौल तनावपूर्ण बना दिया। परिजनों और अस्पताल स्टाफ के बीच हुई तीखी बहस के चलते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। बाद में अस्पताल प्रबंधन के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।

जानकारी के अनुसार नरवर निवासी सीमा प्रजापति, जो सात माह की गर्भवती हैं, उन्हें अत्यधिक ब्लीडिंग की शिकायत होने पर जिला अस्पताल लाया गया था। परिजनों ने बताया कि गुरुवार रात ही नरवर के सरकारी अस्पताल से उन्हें शिवपुरी जिला अस्पताल के लिए रेफर कर भर्ती का पर्चा बना दिया गया था। लेकिन लगातार बारिश, जंगल के रास्ते और खराब मौसम के कारण वे रात में शिवपुरी नहीं पहुंच सके। शुक्रवार दोपहर अस्पताल पहुंचने पर पहले पुराने पर्चे पर भर्ती करने से मना कर दिया गया। बाद में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराने के बाद महिला को गायनिक वार्ड में भर्ती किया गया।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद मरीज की ननद चेतना प्रजापति कार की चाबी बाहर खड़े अपने भाई को देने के लिए वार्ड से बाहर निकली थीं। इसी दौरान गेट पर तैनात महिला सुरक्षा गार्ड ने उन्हें रोक लिया। चेतना का आरोप है कि गार्ड ने उनका हाथ पकड़कर खींचा, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और थप्पड़ मारने की धमकी दी। विरोध करने पर पुलिस बुलाने की बात भी कही गई। इतना ही नहीं, बाहर खड़े अन्य परिजनों के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया।

परिजन निशांत प्रजापति ने बताया कि अस्पताल में भर्ती के दौरान कई बार जांच, पर्चे, दवाइयों और अन्य औपचारिकताओं के कारण वार्ड से बाहर आना-जाना पड़ता है। ऐसे समय में अस्पताल स्टाफ से सहयोग की उम्मीद रहती है, लेकिन उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया जिससे पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान हो गया। उनका कहना है कि गर्भवती महिला दर्द से कराह रही थी और दूसरी ओर परिजन सुरक्षा गार्ड से उलझने को मजबूर हो गए।

घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के समक्ष लिखित शिकायत देकर संबंधित महिला सुरक्षा गार्ड के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि मरीजों और उनके परिजनों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए, विशेषकर तब जब मामला गर्भवती महिला और आपातकालीन स्थिति का हो।

वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित महिला सुरक्षा गार्ड से पूछताछ की गई। गार्ड का कहना है कि मरीज के साथ पहले से ही दो अटेंडरों को वार्ड में प्रवेश की अनुमति दी जा चुकी थी। इसके बावजूद दो अन्य लोग भी वार्ड में जाने का प्रयास कर रहे थे। अस्पताल के नियमों के अनुसार अतिरिक्त लोगों को प्रवेश नहीं दिया जा सकता, इसलिए उन्हें रोका गया। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ।

डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अटेंडरों की संख्या निर्धारित की गई है। नियमों का पालन कराना सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारी है, लेकिन यदि किसी स्तर पर अभद्र व्यवहार हुआ है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच की जाएगी।

सिविल सर्जन ने बताया कि मामले की सच्चाई जानने के लिए अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकाली जा रही है। फुटेज की जांच के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि विवाद कैसे शुरू हुआ और किस पक्ष की क्या भूमिका रही। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल यह मामला आरोप और प्रत्यारोप का बना हुआ है। एक ओर परिजन सुरक्षा गार्ड पर अभद्रता और मारपीट की कोशिश के आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर सुरक्षा गार्ड अस्पताल के नियमों का पालन कराने की बात कह रही है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सीसीटीवी फुटेज और जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी।

अब सभी की नजर अस्पताल प्रबंधन की जांच पर टिकी है। यदि जांच में किसी कर्मचारी की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, वहीं यदि नियमों का उल्लंघन परिजनों की ओर से हुआ है तो वह भी स्पष्ट हो जाएगा। फिलहाल जिला अस्पताल प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है और कहा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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