बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के पिछोर अनुविभाग क्षेत्र के दविया कला गांव में सोमवार को एक अनोखा और साहसिक अभियान देखने को मिला। गांव की आदिवासी सहरिया महिलाओं ने अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हाथों में लाठियां लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं गांव में संचालित कच्ची शराब के ठिकानों पर पहुंचीं और वहां रखी शराब को सड़क पर फेंककर नष्ट कर दिया। इतना ही नहीं, शराब बनाने में उपयोग होने वाले महुआ और अन्य सामग्री को भी बर्बाद कर दिया। इस पूरी कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और महिलाओं की पहल की व्यापक सराहना की जा रही है।
महिलाओं का कहना है कि गांव में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा था। इसकी वजह से पुरुष नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। शराब पीकर आए दिन घरों में झगड़े, मारपीट और घरेलू हिंसा की घटनाएं होती थीं। कई परिवार आर्थिक रूप से बर्बाद हो गए हैं, जबकि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। इन परिस्थितियों से परेशान होकर महिलाओं ने स्वयं आगे आकर शराब के खिलाफ अभियान शुरू करने का निर्णय लिया।
यह अभियान किसी एक दिन का गुस्सा नहीं, बल्कि आदिवासी सहरिया समाज के सामूहिक संकल्प का परिणाम है। 12 जुलाई को आयोजित आदिवासी सहरिया संगठन की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि समाज का कोई भी व्यक्ति शराब का सेवन नहीं करेगा। यदि कोई व्यक्ति शराब पीते हुए पाया जाता है, तो उस पर 5100 रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि समाज की समिति गांवों में अवैध शराब बनाने और बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करवाएगी तथा सामाजिक स्तर पर उनका विरोध किया जाएगा।
इसी निर्णय के तहत सोमवार को दविया कला गांव की महिलाएं एकजुट होकर लाठियां लेकर शराब के ठिकानों पर पहुंचीं। महिलाओं ने कच्ची शराब से भरे डिब्बों और पात्रों को सड़क पर उड़ेल दिया तथा शराब बनाने के लिए रखा गया महुआ और अन्य सामग्री भी नष्ट कर दी। इस दौरान गांव में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, लेकिन महिलाओं के बुलंद इरादों के आगे किसी ने विरोध करने की हिम्मत नहीं दिखाई।
महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य किसी से दुश्मनी करना नहीं, बल्कि अपने परिवारों और गांव को नशे से मुक्त करना है। उनका कहना है कि शराब ने कई घरों की खुशियां छीन ली हैं। मेहनत की कमाई नशे में बर्बाद हो रही है, महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं और युवा पीढ़ी गलत रास्ते पर जा रही है। अब समाज इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले 16 जुलाई को खनियाधाना थाना क्षेत्र के कफ़ार गांव में भी आदिवासी महिलाओं ने इसी तरह का अभियान चलाया था। उस समय भी महिलाओं ने लाठियां लेकर गांव के कई अवैध शराब ठिकानों पर पहुंचकर शराब बनाने के उपकरण तोड़ दिए थे और तैयार कच्ची शराब व महुआ को सड़क पर फेंककर नष्ट कर दिया था। उस कार्रवाई के वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे और महिलाओं के साहस की जमकर प्रशंसा हुई थी।
लगातार दूसरी बार आदिवासी महिलाओं द्वारा शराब के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई यह संकेत देती है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में लोग स्वयं नशे के खिलाफ जागरूक हो रहे हैं। महिलाएं मानती हैं कि यदि समाज को बचाना है तो शराब जैसी बुराई को जड़ से खत्म करना होगा। उन्होंने प्रशासन से भी मांग की है कि गांवों में चल रहे अवैध शराब कारोबार पर स्थायी रूप से रोक लगाने के लिए नियमित कार्रवाई की जाए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं की यह पहल केवल शराब विरोधी अभियान नहीं, बल्कि परिवार और समाज को बचाने की एक बड़ी मुहिम है। यदि प्रशासन और समाज मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाते हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में नशे की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
फिलहाल दविया कला गांव में महिलाओं की इस कार्रवाई की पूरे क्षेत्र में चर्चा है। वायरल वीडियो के बाद लोग इसे सामाजिक बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम मान रहे हैं। आदिवासी सहरिया समाज ने साफ कर दिया है कि उनका नशामुक्ति अभियान आगे भी जारी रहेगा और गांवों में अवैध शराब का कारोबार किसी भी कीमत पर नहीं चलने दिया जाएगा।