जनचौपाल में जनप्रतिनिधि से जनदूरी? शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीण लौटे खाली हाथ, विरोध में मासूम को विधायक की कार पर रखा

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा ECG:खबर जनता की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने के उद्देश्य से आयोजित जनचौपाल उस समय विवादों में घिर गई, जब शिकायत लेकर पहुंचे कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनकी बात सुने बिना उन्हें लौटा दिया गया। मामला शिवपुरी जिले की नरवर तहसील का है, जहां करैरा विधायक रमेश खटीक की जनचौपाल के दौरान विरोध की स्थिति बन गई। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

बुधवार को नरवर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन में जनसमस्याओं के समाधान के लिए जनचौपाल आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। इसी दौरान पोहरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नानकपुर और बरखाड़ी के कुछ ग्रामीण भी अपनी शिकायत लेकर जनचौपाल में पहुंचे। ग्रामीणों का कहना था कि वे लंबे समय से प्रशासनिक समस्याओं से जूझ रहे हैं और उन्हें उम्मीद थी कि जनप्रतिनिधि उनकी बात सुनेंगे।

ग्रामीणों के अनुसार, जब उन्होंने अपनी समस्या बताने का प्रयास किया तो उन्हें यह कहकर वापस लौटा दिया गया कि वे करैरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं। इस कथित बयान के बाद मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी फैल गई। कुछ देर तक बहस और विरोध की स्थिति बनी रही। हालांकि बाद में अधिकांश ग्रामीण मायूस होकर लौट गए।

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब बरखाड़ी निवासी जितेंद्र केवट और संतोष केवट अपने परिवार के साथ जनचौपाल पहुंचे। उनका आरोप था कि मछली पकड़ने के विवाद में ठेकेदार द्वारा उनके साथ मारपीट की गई थी और पुलिस ने भी उनकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचे परिवार को जब सुनवाई नहीं मिली तो आक्रोश फूट पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध स्वरूप जितेंद्र केवट ने अपने मासूम बच्चे को विधायक की कार के बोनट पर रख दिया। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी और अन्य लोग तुरंत हरकत में आए और बच्चे को सुरक्षित हटाकर स्थिति को नियंत्रित किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि नरवर तहसील का क्षेत्र करैरा और पोहरी दोनों विधानसभा क्षेत्रों में आता है। करैरा से भाजपा के रमेश खटीक विधायक हैं, जबकि पोहरी से कांग्रेस के कैलाश कुशवाह विधायक हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपनी समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर जनचौपाल पहुंचे थे।

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या जनचौपाल का उद्देश्य केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित है, या फिर प्रशासनिक समस्याओं से जूझ रहे किसी भी नागरिक की बात वहां सुनी जानी चाहिए? स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि जनता के प्रतिनिधि होते हैं और उनसे कम से कम समस्या सुनने की अपेक्षा तो हर नागरिक कर सकता है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और वायरल वीडियो को लेकर विधायक रमेश खटीक की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली परिस्थितियों और ग्रामीणों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना भी बाकी है।

इस घटना ने जनचौपाल की व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और आम नागरिक की अपेक्षाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधि इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं और ग्रामीणों की शिकायतों का समाधान कैसे किया जाता है।
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