बंटी शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले के खनियाधाना थाना क्षेत्र के कफार गांव में गुरुवार को उस समय अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब वर्षों से अवैध कच्ची शराब के कारोबार से परेशान आदिवासी महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। हाथों में लाठियां लेकर दर्जनों महिलाएं गांव में सक्रिय शराब माफियाओं के ठिकानों पर पहुंचीं और अवैध शराब बनाने के अड्डों पर जमकर कार्रवाई की। महिलाओं ने शराब बनाने के उपकरण तोड़ दिए, महुआ नष्ट कर दिया और तैयार कच्ची शराब को सड़क पर बहा दिया। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
करीब दो हजार की आबादी वाले कफार गांव में लंबे समय से खुलेआम कच्ची शराब बनाए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि कई बार आबकारी विभाग और पुलिस को लिखित व मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। विभागीय निष्क्रियता से परेशान होकर महिलाओं ने खुद ही मोर्चा संभालने का फैसला किया।
गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं एकजुट होकर गांव में उन स्थानों पर पहुंचीं, जहां अवैध शराब तैयार की जा रही थी। महिलाओं ने लाठियों से शराब बनाने के बर्तन, ड्रम और अन्य उपकरण तोड़ दिए। कई जगहों पर रखी महुआ की खेप और तैयार कच्ची शराब को सड़क पर फेंक दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने इस कार्रवाई के वीडियो बनाए, जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
महिलाओं का कहना है कि गांव में अवैध शराब के कारण परिवार बर्बाद हो रहे हैं। पुरुषों को आसानी से शराब मिल जाती है, जिससे घरेलू हिंसा, झगड़े, मारपीट और आर्थिक परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। कई घरों की कमाई शराब में खत्म हो जाती है और बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। महिलाओं ने कहा कि जब प्रशासन ने उनकी नहीं सुनी, तब उन्हें खुद आगे आना पड़ा।
ग्रामीण महिलाओं ने आरोप लगाया कि गांव में वीरन आदिवासी, जितेंद्र सहित तीन-चार स्थानों पर खुलेआम कच्ची शराब बनाई जा रही थी। कई बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब महिलाओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में फिर किसी ने गांव में अवैध शराब बनाने की कोशिश की तो पूरा गांव एकजुट होकर दोबारा इसी तरह कार्रवाई करेगा।
गौरतलब है कि 12 जुलाई को आदिवासी सहरिया संगठन की बैठक आयोजित हुई थी। बैठक में समाज के लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि गांव का कोई भी व्यक्ति शराब का सेवन नहीं करेगा। यदि कोई शराब पीते हुए पाया गया तो उस पर 5100 रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। साथ ही यह भी तय किया गया कि अवैध शराब बनाने वालों के खिलाफ सामूहिक रूप से कार्रवाई कराई जाएगी। गुरुवार की कार्रवाई को उसी निर्णय का परिणाम माना जा रहा है।
इस पूरे मामले में खनियाधाना थाना प्रभारी केदार सिंह यादव ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि यदि ऐसी घटना हुई है तो तत्काल पुलिस बल को गांव भेजकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कफार गांव की महिलाओं की यह कार्रवाई अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आबकारी विभाग और पुलिस शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई करती, तो महिलाओं को कानून अपने हाथ में लेने जैसी स्थिति नहीं बनती। हालांकि महिलाओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी से दुश्मनी नहीं, बल्कि अपने परिवारों और गांव को नशे की बुराई से बचाना है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस घटना के बाद अवैध शराब के कारोबार पर स्थायी रोक लग पाएगी, या फिर कार्रवाई के बाद एक बार फिर शराब माफिया सक्रिय हो जाएंगे। फिलहाल कफार गांव की आदिवासी महिलाओं ने यह संदेश जरूर दे दिया है कि यदि प्रशासन चुप रहेगा तो समाज स्वयं अपनी सुरक्षा और भविष्य के लिए आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेगा।