ड्रिप लगी हालत में बाइक पर ले जाया गया घायल: वायरल वीडियो से उठे सवाल, जांच में सामने आई पूरी कहानी

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले में एक घायल व्यक्ति को हाथ में ड्रिप लगी हालत में मोटरसाइकिल पर ले जाते हुए दिखाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे और लोगों ने इसे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से जोड़कर देखा। हालांकि, पूरे मामले की पड़ताल में सामने आया कि यह घटना अस्पताल की लापरवाही नहीं, बल्कि परिजनों द्वारा स्वयं मरीज को निजी वाहन से मेडिकल कॉलेज ले जाने के कारण हुई।

जानकारी के अनुसार, यह मामला बुधवार दोपहर कोलारस थाना क्षेत्र के सरजापुर गांव का है। गांव निवासी दयालू जाटव (50) और उनके पुत्र राजेश जाटव के साथ मोहरा रोड स्थित नर्सरी के पास जमीन विवाद को लेकर कुछ लोगों ने मारपीट कर दी। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने दोनों को उपचार के लिए कोलारस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।

अस्पताल में डॉक्टरों ने दोनों घायलों का प्राथमिक उपचार किया और मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) की प्रक्रिया पूरी की। दयालू जाटव की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। इसी दौरान उनके हाथ में ड्रिप लगाकर आवश्यक उपचार शुरू किया गया।

इसी बीच परिजन और भीम आर्मी के कुछ कार्यकर्ता आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए दयालू जाटव और राजेश जाटव को लेकर कोलारस थाने पहुंच गए। थाने में एफआईआर दर्ज कराने को लेकर कुछ समय तक हंगामे की स्थिति बनी रही। परिजनों का आरोप था कि पुलिस कार्रवाई में देरी कर रही है। बाद में पुलिस ने शिकायत के आधार पर राकेश चौबे, महेंद्र यादव, गोलू यादव, मुलायम यादव और पर्वत यादव के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।

एफआईआर दर्ज होने के बाद घायल को आगे के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया। इसी दौरान किसी राहगीर ने दयालू जाटव को हाथ में ड्रिप लगी हालत में मोटरसाइकिल पर बैठे हुए देखा और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि आखिर गंभीर घायल को एंबुलेंस के बजाय बाइक से क्यों ले जाया जा रहा है।

वीडियो के वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आया। मामले को लेकर जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषेश्वर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कोलारस स्वास्थ्य केंद्र में घायल का प्राथमिक उपचार पूरी तरह किया गया था और उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर करते समय एंबुलेंस की व्यवस्था भी उपलब्ध थी। लेकिन परिजनों ने अपनी इच्छा से मरीज को निजी वाहन से ले जाने का निर्णय लिया। इसलिए वायरल वीडियो में जो स्थिति दिखाई दे रही है, वह अस्पताल की लापरवाही का परिणाम नहीं है।

वहीं, कोलारस थाना प्रभारी पुनीत बाजपेयी ने बताया कि दयालू जाटव और उनके बेटे के साथ मारपीट की घटना हुई थी। दोनों थाने पहुंचे थे, जहां उनकी शिकायत पर पांच आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो की वास्तविकता को लेकर बहस छेड़ दी है। कई बार अधूरी जानकारी के आधार पर वायरल होने वाले वीडियो किसी संस्था या विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर देते हैं, जबकि जांच में पूरी तस्वीर कुछ और ही सामने आती है।

हालांकि, यह भी सच है कि गंभीर रूप से घायल मरीज को ड्रिप लगी अवस्था में मोटरसाइकिल से ले जाना सुरक्षित नहीं माना जाता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मरीजों को एंबुलेंस के माध्यम से ही रेफर किया जाना चाहिए, ताकि रास्ते में किसी भी आपात स्थिति का तुरंत इलाज किया जा सके।

फिलहाल इस मामले में पुलिस ने मारपीट के आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल की ओर से एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई थी और मरीज को निजी वाहन से ले जाने का निर्णय परिजनों का था। वायरल वीडियो के बाद सामने आए तथ्यों ने पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ कर दी है, लेकिन यह मामला गंभीर घायलों के सुरक्षित परिवहन को लेकर नई चर्चा जरूर छोड़ गया है।
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