बंटी शर्मा ECG:देहात थाना पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर नवविवाहिता अपने लापता पति को खोजने के लिए दर-दर भटक रही है, तो दूसरी ओर उसका आरोप है कि थाना पुलिस ने समय रहते उसकी शिकायत पर गंभीरता नहीं दिखाई।
मामला अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच गया है, जहां पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाते हुए ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना, मारपीट और पति को गायब करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायत मिलने के बाद पुलिस तत्काल सक्रिय होती, तो क्या आज यह मामला इतना गंभीर रूप लेता?
देहात थाना क्षेत्र के गौशाला से जुड़े इस मामले में 22 वर्षीय पूनम बाथम, निवासी नरवर ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में बताया कि उसकी शादी करीब डेढ़ वर्ष पहले दीपू बाथम से हुई थी। शादी के समय उसके पिता ने अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार दहेज दिया था, लेकिन विवाह के कुछ समय बाद ही उसकी सास, ननद और जेठ अतिरिक्त पैसों की मांग करने लगे। पीड़िता का आरोप है कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था तथा उसके पति पर भी परिवार का दबाव बनाया जाता था।
पूनम के अनुसार तीन दिन पहले उसका पति दीपू यह कहकर घर से निकला था कि वह घूमने जा रहा है, लेकिन इसके बाद से उसका मोबाइल बंद है और उसका कोई पता नहीं चल पाया। पति के अचानक लापता होने से परेशान पूनम ने जब अपने ससुराल वालों से जानकारी मांगी तो उसे कोई जवाब नहीं मिला। उल्टा उसके साथ मारपीट की गई।
पीड़िता का आरोप है कि उसके सिर पर पत्थर से हमला किया गया, जिससे वह घायल हो गई। इतना ही नहीं, उसे घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद जब उसने पति के बारे में जानकारी मांगी तो ससुराल पक्ष ने उसी पर पति को गायब करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया। पूनम का कहना है कि वह स्वयं अपने पति की तलाश कर रही है और उसे नहीं पता कि उसका पति कहां है।
सबसे गंभीर आरोप देहात थाना पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए गए हैं। पूनम का कहना है कि उसने सबसे पहले देहात थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत की थी। उसे उम्मीद थी कि पुलिस तुरंत पति की तलाश शुरू करेगी और मारपीट व दहेज प्रताड़ना के आरोपों की जांच करेगी, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण उसे न्याय नहीं मिला और आखिरकार उसे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर गुहार लगानी पड़ी।
यह मामला कई सवाल खड़े करता है। यदि किसी महिला का पति अचानक लापता हो जाए, वह खुद घायल अवस्था में थाने पहुंचे और दहेज प्रताड़ना व मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाए, तो क्या स्थानीय पुलिस की जिम्मेदारी नहीं बनती कि तत्काल कार्रवाई करे? क्या शिकायत को गंभीरता से लेकर लापता व्यक्ति की तलाश शुरू नहीं की जानी चाहिए थी? क्या पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस का पहला दायित्व नहीं था?
पूनम ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि उसके पति का जल्द से जल्द पता लगाया जाए, ससुराल पक्ष के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाए और उसे भविष्य में दहेज प्रताड़ना व हिंसा से सुरक्षा प्रदान की जाए। उसने यह भी अनुरोध किया है कि यदि उसका पति सुरक्षित मिल जाता है तो उसे सुरक्षा के साथ उसके साथ रहने का अवसर दिया जाए।
इस पूरे घटनाक्रम ने देहात थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआती शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई हो, तो कई मामलों को गंभीर होने से रोका जा सकता है। महिलाओं से जुड़े मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।
हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस मामले में लगाए गए आरोप पीड़िता के आवेदन पर आधारित हैं। दूसरी ओर, ससुराल पक्ष पूनम पर ही उसके पति को गायब करने का आरोप लगा रहा है। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने शिकायत प्राप्त कर जांच शुरू करने की बात कही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या इस मामले में लापता युवक का जल्द पता लगाया जाता है, क्या पीड़िता के आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और क्या देहात थाना पुलिस की शुरुआती भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि एक महिला को न्याय के लिए थाना छोड़कर सीधे एसपी कार्यालय जाना पड़े, तो क्या यह स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न नहीं है? जनता को अब निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई का इंतजार है।