बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले की कोलारस तहसील के ग्राम मोहरा में पिछले करीब दो महीनों से गहराए बिजली और पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकजुट होकर विद्युत वितरण कंपनी के कार्यालय और अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया तथा शीघ्र समाधान की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही नियमित बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई और पेयजल संकट का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो वे मजबूर होकर धरना-प्रदर्शन और जन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत वितरण कंपनी और संबंधित विभाग की होगी।
ग्रामीणों के अनुसार, मड़ीखेड़ा विद्युत पंप लाइन पर पिछले दो महीनों से नियमित रूप से बिजली उपलब्ध नहीं हो रही है। स्थिति यह है कि तीन फेज बिजली आने के बावजूद आपूर्ति केवल एक से दो घंटे के लिए ही मिलती है। इतनी कम अवधि में न तो खेतों की सिंचाई हो पाती है और न ही गांव की जलापूर्ति व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो पाती है। इसका सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ रहा है, वहीं ग्रामीणों को पेयजल के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस समय खरीफ फसलों का महत्वपूर्ण सीजन चल रहा है। खेतों में समय पर सिंचाई नहीं होने से फसलें प्रभावित होने लगी हैं। जिन किसानों ने महंगे बीज और खाद का उपयोग कर खेती की है, उन्हें अब अपनी मेहनत और निवेश दोनों पर संकट दिखाई दे रहा है। कई किसानों का कहना है कि यदि जल्द बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो उनकी फसलें खराब हो सकती हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
पेयजल संकट भी गांव में लगातार गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण पानी की मोटरें पर्याप्त समय तक नहीं चल पातीं, जिससे पानी की टंकियां नहीं भर पातीं। परिणामस्वरूप लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों को दूर-दराज के स्थानों से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस समस्या को लेकर उन्होंने कई बार स्थानीय लाइनमैन और विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को मौखिक एवं लिखित रूप से शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी केवल आश्वासन देते रहे, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत दर्ज कराई थी, ताकि शासन स्तर से उनकी समस्या का समाधान हो सके। इसके बावजूद न तो कोई अधिकारी मौके पर निरीक्षण के लिए पहुंचा और न ही बिजली व्यवस्था में कोई सुधार दिखाई दिया। इससे ग्रामीणों में विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार बिजली लाइन के तार टूट जाते हैं या करंट फैलने जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे समय में जब तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता होती है, तब संबंधित लाइनमैन और सुपरवाइजर के मोबाइल फोन तक नहीं उठते। उनका कहना है कि इस लापरवाही के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है और लोगों के साथ-साथ मवेशियों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने मांग की है कि मड़ीखेड़ा पंप लाइन को जल्द से जल्द कोलारस फीडर से जोड़ा जाए, ताकि नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। उनका कहना है कि इससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली मिलेगी और गांव की पेयजल व्यवस्था भी सामान्य हो जाएगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन और विद्युत वितरण कंपनी से मांग की है कि गांव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद यदि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई नहीं करता है, तो ग्रामीणों के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में बिजली और पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो गांव के लोग एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर व्यापक जन आंदोलन भी शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कानून-व्यवस्था या अन्य किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और विद्युत वितरण कंपनी की होगी।