1 हजार KM दूर से बेटी की तलाश में शिवपुरी पहुंचा पिता, बोला- नाम और पहचान बदली:बेटी को बेचने का डर

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा ईसीजी:खबर शिवपुरी जिले में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से करीब 1 हजार किलोमीटर का सफर तय कर एक पिता अपनी 5 वर्षीय नाबालिग बेटी की तलाश में शिवपुरी पहुंचा है। पिता ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन देकर बेटी की सकुशल बरामदगी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

उसका आरोप है कि वर्ष 2024 में शिकायत देने के बावजूद उसकी बेटी की तलाश और मामले की जांच को लेकर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पिता का दावा है कि उसकी बेटी को शिवपुरी लाने के बाद उसका नाम और पहचान बदलकर निजी स्कूल में प्रवेश कराया गया है। उसने आशंका जताई है कि यदि समय रहते बेटी का पता नहीं लगाया गया तो उसके साथ कोई गंभीर घटना हो सकती है।

प्रार्थी नसरत अली के मुताबिक, वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का रहने वाला है और वर्तमान में मुंबई में टैक्सी चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है। उसका कहना है कि वर्ष 2024 में उसकी पत्नी अंजली गुहरैया उर्फ आफरीन बेगम उसके दो बेटों को अपने पास छोड़कर 5 वर्षीय नाबालिग बेटी को साथ लेकर शिवपुरी आ गई थी।

बेटी के शिवपुरी आने के बाद जब पिता ने उससे संपर्क करने और उसे वापस ले जाने का प्रयास किया तो कथित तौर पर पत्नी के परिजनों ने उसे बच्ची से मिलने नहीं दिया। पिता का आरोप है कि उस समय उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और धमकाकर वापस भेज दिया गया। बेटी से बिछड़ने के बाद उसने कई बार शिवपुरी आकर जानकारी जुटाने का प्रयास किया, लेकिन उसे कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।

पिता ने बताया कि बेटी की तलाश को लेकर उसने 20 जून 2024 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन दिया था। इसके अलावा देहात थाना पुलिस को भी शिकायत देकर बच्ची का पता लगाने और उसे सकुशल बरामद करने की मांग की थी।


उसका आरोप है कि शिकायत दिए जाने के बावजूद अब तक मामले में ऐसी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उसकी बेटी उसके सामने आ सके। पिता का कहना है कि करीब दो साल से वह अपनी बेटी की तलाश में परेशान है और अलग-अलग जगहों पर जाकर उसके बारे में जानकारी जुटाता रहा है। शुक्रवार को वह एक बार फिर लंबी दूरी तय करके शिवपुरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए मामले की जांच कराने की गुहार लगाई। उसका कहना है कि उसके लिए उसकी बेटी से बढ़कर कुछ भी नहीं है और वह उसे किसी भी कीमत पर सुरक्षित देखना चाहता है।

आवेदन में सबसे गंभीर आरोप बच्ची की पहचान और स्कूल रिकॉर्ड में कथित बदलाव को लेकर लगाए गए हैं। पिता का दावा है कि शिवपुरी के एक निजी बाल वाटिका प्लेस्कूल में उसकी नाबालिग बेटी का प्रवेश कराया गया, लेकिन वहां बच्ची का नाम बदल दिया गया। इतना ही नहीं, आवेदन में आरोप लगाया गया है कि स्कूल के रिकॉर्ड में बच्ची के वास्तविक माता-पिता के स्थान पर उसके नाना-नानी के नाम दर्ज कराए गए हैं।

पिता ने इस पूरे मामले की दस्तावेजों के आधार पर जांच कराने की मांग की है। उसने शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, स्कूल प्रवेश संबंधी दस्तावेज और अन्य सरकारी अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है। यदि दस्तावेजों में वास्तव में बदलाव हुआ है तो वह किस आधार पर और किसके द्वारा कराया गया, इसकी भी जांच की मांग की गई है।

प्रार्थी ने पुलिस को दिए आवेदन में अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जताई है। उसका कहना है कि उसकी पत्नी अपने परिजनों के साथ शिवपुरी के बजरिया क्षेत्र के जिस इलाके में रह रही है, वहां को लेकर उसे बच्ची की सुरक्षा की चिंता है। पिता ने आरोप लगाया है कि उसे आशंका है कि उसकी नाबालिग बेटी के साथ कुछ गलत हो सकता है अथवा उसे किसी के हाथों बेचने का प्रयास किया जा सकता है।

हालांकि ये सभी आरोप पिता द्वारा पुलिस को दिए गए आवेदन में लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है। पिता ने पुलिस से मांग की है कि मामले को संवेदनशील मानते हुए तत्काल जांच की जाए, बच्ची का पता लगाया जाए और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही उसने पत्नी तथा उसके परिजनों से कथित खतरे की भी शिकायत करते हुए अपनी सुरक्षा की मांग की है। अब देखना यह है कि पुलिस इस आवेदन पर क्या कार्रवाई करती है और जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों से बच्ची की वास्तविक स्थिति क्या स्पष्ट होती है।

शिवपुरी फर्स्ट की नजर: एक पिता का अपनी 5 वर्षीय बेटी के लिए करीब 1 हजार किलोमीटर दूर से शिवपुरी तक पहुंचना इस मामले की गंभीरता को सामने लाता है। पिता के आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच का विषय है, लेकिन सवाल यह जरूर है कि वर्ष 2024 में शिकायत दिए जाने के बाद यदि मामला लंबित रहा तो उसकी जांच अब तक किस स्तर तक पहुंची? नाबालिग बच्ची से जुड़े मामले में दस्तावेजों में नाम या अभिभावकों की जानकारी बदले जाने के आरोप भी गंभीर हैं। ऐसे में पुलिस और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएं। बच्ची जहां भी हो, उसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पिता का कहना है— “मेरी बेटी से बड़ा मेरे लिए कुछ नहीं है।” अब उसकी नजर पुलिस की कार्रवाई और बेटी की सकुशल बरामदगी पर टिकी है।

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