बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के डेहरवारा गांव में बारिश ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। गांव से कुशयारा के बीच करीब ढाई किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क भारी बारिश के बाद कीचड़ में तब्दील हो गई है। सड़क की हालत इतनी खराब है कि पिछले दो दिनों से स्कूल बसों ने गांव में आना बंद कर दिया है। इसका सीधा असर गांव के करीब 100 स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
अब बच्चों को स्कूल भेजने के लिए ग्रामीण रोजाना मोटरसाइकिल से करीब 5 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगा रहे हैं। पहले बच्चों को गांव से ही स्कूल बस मिल जाती थी, लेकिन सड़क पर कीचड़ होने के कारण बस संचालकों ने गांव तक वाहन भेजने से इनकार कर दिया है।
बारिश के बाद सड़क बनी मुसीबत
डेहरवारा से कुशयारा को जोड़ने वाली यह सड़क लंबे समय से कच्ची है। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क की हालत सामान्य दिनों में भी खराब रहती है, लेकिन बारिश के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है।
हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद सड़क पर जगह-जगह पानी और कीचड़ जमा हो गया है। कई स्थानों पर सड़क इतनी खराब हो गई है कि बड़े वाहनों का निकलना मुश्किल है। इसी वजह से स्कूल बस संचालकों ने सुरक्षा को देखते हुए गांव तक बसें भेजना बंद कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को स्कूल पहुंचाना अब उनके लिए रोज की चुनौती बन गया है।
100 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
डेहरवारा गांव के करीब 100 बच्चे शिवपुरी शहर के अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हैं। इन बच्चों के लिए पहले स्कूल बस गांव तक आती थी और उन्हें सीधे स्कूल ले जाती थी।
अब बसों का संचालन बंद होने के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों को बच्चों को मोटरसाइकिल से राजगढ़ तक छोड़ने जाना पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल भेजने के बाद ग्रामीणों को वापस गांव लौटना पड़ता है और छुट्टी के समय दोबारा राजगढ़ जाकर उन्हें वापस लाना पड़ता है।
इस पूरी प्रक्रिया में ग्रामीणों का रोजाना काफी समय और पैसा खर्च हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ खेती-किसानी का काम भी प्रभावित हो रहा है।
20 साल से पक्की सड़क का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या आज की नहीं है। वे पिछले करीब 20 वर्षों से सड़क को पक्का कराने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका।
ग्रामीणों के अनुसार, कई बार उन्हें सड़क निर्माण का आश्वासन भी मिला। क्षेत्र के दोनों विधायकों की ओर से भी सड़क बनवाने की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक जमीन पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान उन्हें इसी समस्या का सामना करना पड़ता है। सड़क पक्की होने से न केवल बच्चों को स्कूल जाने में आसानी होगी, बल्कि किसानों और अन्य ग्रामीणों को भी आवागमन में राहत मिलेगी।
खेती-किसानी पर भी पड़ रहा असर
सड़क खराब होने का असर केवल बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। गांव के अधिकांश लोग खेती-किसानी से जुड़े हैं। बारिश के मौसम में खेतों पर जाने और कृषि कार्य के लिए सामान लाने-ले जाने में भी ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे किसानों को अपनी उपज और कृषि सामग्री के परिवहन में भी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
सड़क पर कीचड़ से हादसे का खतरा
ग्रामीणों के मुताबिक कच्ची सड़क पर जमा कीचड़ के कारण दोपहिया वाहन चलाना भी जोखिम भरा हो गया है। फिसलन के चलते कभी भी हादसा हो सकता है। बच्चों को मोटरसाइकिल से राजगढ़ तक ले जाने वाले अभिभावकों को भी खराब रास्ते पर काफी सावधानी बरतनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फिलहाल सड़क पर मुरम या अन्य सामग्री डालकर रास्ते को आवागमन योग्य बनाया जाए, ताकि स्कूल बसों का संचालन दोबारा शुरू हो सके। साथ ही स्थायी समाधान के लिए सड़क को पक्का कराया जाए।
एसडीएम बोले- टीम भेजकर कराएंगे मौका मुआयना
मामले को लेकर कोलारस एसडीएम अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि गांव में टीम भेजकर सड़क की स्थिति का मौका मुआयना कराया जाएगा। मौके पर सड़क की वास्तविक स्थिति देखने के बाद जो भी विकल्प सामने आएगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब ग्रामीणों को प्रशासन की टीम के मौके पर पहुंचने और सड़क की समस्या का समाधान होने का इंतजार है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग है कि वर्षों पुरानी कच्ची सड़क को जल्द पक्का कराया जाए, ताकि बारिश के मौसम में हर साल पैदा होने वाली समस्या से स्थायी रूप से निजात मिल सके।