शिवपुरी में राशन वितरण व्यवस्था पर कलेक्टर अर्पित वर्मा का शिकंजा; 22 उचित मूल्य दुकानों के विक्रेताओं पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत कार्रवाई प्रस्तावित, 4 दुकानों के विक्रेता पद से हटे और धारा 420 में FIR
खबर:शिवपुरी जिले में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाले सरकारी राशन के वितरण में लापरवाही अब उचित मूल्य दुकानों के विक्रेताओं पर भारी पड़ रही है। समय पर राशन वितरण नहीं करने और वितरण व्यवस्था में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। खाद्य विभाग की जांच के बाद जिले की 22 उचित मूल्य दुकानों के विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
वहीं मामला यहीं नहीं रुका। जांच में दोषी पाए गए खरैह, डेहरवारा, श्रीपुर चक्क और खिरिया दुकानों के विक्रेताओं को पद से पृथक करने के साथ संबंधित पुलिस थानों में धारा 420 के तहत प्रकरण दर्ज कराया गया है। कार्रवाई के बाद राशन दुकान संचालकों में हड़कंप की स्थिति है।
3 लाख से ज्यादा परिवारों के राशन पर प्रशासन की नजर
शिवपुरी जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 687 शासकीय उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से 3,16,649 पात्र परिवारों को अगस्त और सितंबर 2026 का गेहूं एवं चावल एकमुश्त वितरित कराया जा रहा है।
इतने बड़े स्तर पर राशन वितरण के बीच किसी भी दुकान पर लापरवाही सीधे हजारों पात्र परिवारों को प्रभावित कर सकती है। इसी को देखते हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तकनीकी दिक्कतों के बावजूद पात्र हितग्राहियों को राशन से वंचित नहीं किया जाए।
कलेक्टर के निर्देश के बाद खाद्य विभाग ने दुकानों की जांच तेज की और विगत एक माह में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया।
22 दुकानों पर जांच के बाद कार्रवाई का शिकंजा
जिला आपूर्ति अधिकारी के अनुसार जांच में अनियमितता पाए जाने पर 22 उचित मूल्य दुकानों के विक्रेताओं के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
इन दुकानों में—
खरईडाबर, सड़ककरई, झिरी, महोबाडामरोन, बरेला, बक्सनपुर, भोडन, खनियाधाना वार्ड 1 से 10, बनगवां, झूलना, दीगोध, चंदोरिया, लालपुर, देहरदा सड़क, पनवारी, बामोरखुर्द, मांगरोल, आकोदा, रिजोदा, शिवपुरी नगर वार्ड 14, गोपालपुर और कपराना की दुकानें शामिल हैं।
इन दुकानों से जुड़े विक्रेताओं पर विभागीय जांच के आधार पर कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
चार दुकानों पर मामला और ज्यादा गंभीर
राशन वितरण में अनियमितताओं से जुड़े मामलों में खरैह, डेहरवारा, श्रीपुर चक्क और खिरिया दुकानों के विक्रेताओं पर अलग से कार्रवाई की गई है।
विभाग के अनुसार शिकायतों की जांच के बाद इन दुकानों के विक्रेताओं को पद से पृथक कर दिया गया है। इतना ही नहीं, संबंधित पुलिस थानों में धारा 420 के तहत प्रकरण भी दर्ज कराया गया है।
इस कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि राशन वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी या पात्र हितग्राहियों के हक के राशन में लापरवाही को प्रशासन अब हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
सर्वर और बायोमीट्रिक की समस्या भी बनी चुनौती
हालांकि खाद्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि राशन वितरण के दौरान कई जगह तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं। पुरानी पीओएस मशीनों और बायोमीट्रिक पहचान आधारित प्रणाली के कारण पर्ची के जरिए राशन वितरण में आंशिक देरी की स्थिति बनी है।
विभाग के अनुसार तकनीकी व्यवस्था को लगातार सुधारा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सर्वर या बायोमीट्रिक सत्यापन में समस्या आने के बावजूद पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार राशन दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
यानी प्रशासन ने तकनीकी खामी और विक्रेता की लापरवाही के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की है। लेकिन जहां जांच में वास्तविक अनियमितता सामने आई है, वहां कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
अंगूठा लगाते ही राशन लेने की जिम्मेदारी उपभोक्ता की
जिला आपूर्ति अधिकारी ने उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण जानकारी जारी की है। विभाग के मुताबिक यदि उपभोक्ता पीओएस मशीन पर अपना अंगूठा लगाता है तो संबंधित दुकान से राशन प्राप्त करने की जिम्मेदारी उपभोक्ता की होगी।
साथ ही शासन की व्यवस्था के अनुसार पिछले माह का राशन वर्तमान माह में प्राप्त करने की सुविधा पीओएस मशीन में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उपभोक्ताओं को राशन वितरण की प्रक्रिया और मशीन में दर्ज विवरण को ध्यान से देखना जरूरी है।
शिकायतों पर भी प्रशासन की नजर
राशन वितरण को लेकर किसी उपभोक्ता को परेशानी होती है तो उसे सीधे विवाद या प्रदर्शन का रास्ता अपनाने के बजाय निर्धारित अधिकारियों से शिकायत करने की अपील की गई है।
जिला आपूर्ति विभाग ने कहा है कि उपभोक्ता सबसे पहले संबंधित संस्था प्रबंधक, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी या अनुविभागीय अधिकारी से संपर्क करें। यदि वहां समस्या का समाधान नहीं होता है तो जिला कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
कलेक्टर के एक्शन से दुकानदारों में मचा हड़कंप
22 दुकानों पर कार्रवाई और चार मामलों में पद से पृथक करने के साथ पुलिस प्रकरण दर्ज होने के बाद राशन दुकान संचालकों के बीच प्रशासन की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सरकारी राशन व्यवस्था सीधे गरीब और पात्र परिवारों से जुड़ी हुई है। ऐसे में प्रशासन का तर्क है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर उसका असर सीधे हितग्राहियों पर पड़ता है। यही वजह है कि जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले विक्रेताओं पर कार्रवाई की जा रही है।
कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देशों के बाद खाद्य विभाग की सक्रियता से यह संदेश भी गया है कि राशन वितरण व्यवस्था में नियमों की अनदेखी करने वाले विक्रेताओं को अब जवाब देना होगा।
687 दुकानों पर नजर, लाखों हितग्राहियों का राशन दांव पर
शिवपुरी जिले में 687 उचित मूल्य दुकानों के जरिए 3,16,649 पात्र परिवारों को राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में वितरण व्यवस्था को सुचारु रखना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।
एक तरफ तकनीकी दिक्कतें व्यवस्था की रफ्तार प्रभावित कर रही हैं, तो दूसरी तरफ अनियमितता की शिकायतें विभाग के लिए चुनौती बनी हुई हैं। प्रशासन अब दोनों मोर्चों पर निगरानी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
फिलहाल 22 दुकानों के विक्रेताओं पर कार्रवाई प्रस्तावित है, जबकि चार दुकानों के विक्रेताओं पर पद से पृथक करने और पुलिस केस जैसी कठोर कार्रवाई हो चुकी है।
कुल मिलाकर शिवपुरी में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त संदेश दे दिया है—पात्र हितग्राही के हक का राशन रोकना, वितरण में अनियमितता करना या नियमों की अनदेखी करना अब महंगा पड़ सकता है। कलेक्टर के निर्देश के बाद खाद्य विभाग की कार्रवाई आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।