मांगों पर बनी सहमति फिर भी नहीं मानी बात:नियमितीकरण और पदोन्नति ने फंसाया पेंच;करीब 250 कर्मचारियों के रिकॉर्ड तलाश रहा नगर पालिका प्रशासन

Nikk Pandit
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खबर:शिवपुरी शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर एक बार फिर नगर पालिका के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सफाईकर्मियों और नगर पालिका कर्मचारियों की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी रहने से शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है सोमवार से शुरू हुई 11 सूत्रीय मांगों की हड़ताल के कारण मुख्य सड़कों से लेकर कॉलोनियों और गली-मोहल्लों तक कचरा उठाव प्रभावित हो गया है। कई स्थानों पर कचरे के ढेर दिखाई देने लगे हैं और नागरिकों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

एक तरफ कर्मचारी नगर पालिका परिसर में धरने पर बैठकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ नगर पालिका प्रशासन के सामने हड़ताल खत्म कराने की चुनौती खड़ी है खास बात यह है कि 11 में से 8 मांगों पर प्रशासन की ओर से सहमति बनने की बात सामने आ रही है, लेकिन नियमितीकरण और पदोन्नति जैसी प्रमुख मांगों पर पेंच फंस गया है। कर्मचारी इन मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग करते हुए हड़ताल खत्म करने को तैयार नहीं हैं।

ऐसे में सवाल यही है कि आखिर शहर की सफाई व्यवस्था कब पटरी पर लौटेगी और कर्मचारियों की हड़ताल का समाधान कब निकलेगा?

पांच दिन से नहीं उठा कचरा, शहर में बढ़ने लगे कचरे के ढेर

हड़ताल का सबसे सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। पिछले पांच दिनों से सफाईकर्मियों के काम पर नहीं लौटने के कारण कई क्षेत्रों में नियमित कचरा उठाव प्रभावित हुआ है। मुख्य मार्गों, कॉलोनियों और गली-मोहल्लों में जगह-जगह कचरा जमा होने लगा है।

आमतौर पर जिन स्थानों पर रोजाना सफाई और कचरा उठाव होता था, वहां अब कचरे के ढेर नजर आने लगे हैं। इससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो आने वाले दिनों में सफाई व्यवस्था की समस्या और गंभीर हो सकती है।

बारिश के मौसम में कचरा जमा होने से स्थिति और परेशानी वाली हो सकती है। गंदगी के कारण बदबू और मच्छरों की समस्या बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे में शहरवासियों की निगाह अब नगर पालिका प्रशासन और हड़ताली कर्मचारियों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है

11 मांगों को लेकर शुरू हुई थी हड़ताल

नगर पालिका के नियमित, आउटसोर्स और सफाईकर्मी सहित अन्य कर्मचारी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और लगातार मांग उठाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

कर्मचारियों के मुताबिक वे अपनी मांगों को लेकर पहले भी कलेक्टर को ज्ञापन सौंप चुके हैं। उनका कहना है कि जब मांगों का समाधान नहीं हुआ तो मजबूर होकर हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
हड़ताल के दौरान कर्मचारी नगर पालिका परिसर में धरने पर बैठे हैं और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं।

8 मांगों पर सहमति, फिर भी नहीं टूटी हड़ताल
हड़ताल के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि नगर पालिका प्रशासन की ओर से कर्मचारियों की 11 में से 8 मांगों पर सहमति जताई गई है। इसके बावजूद हड़ताल समाप्त नहीं हुई।

दरअसल, कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण और पदोन्नति की मांग सबसे अहम मुद्दा बन गई है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक इन प्रमुख मांगों पर तत्काल कार्रवाई की दिशा स्पष्ट नहीं होती, तब तक हड़ताल समाप्त करने का सवाल ही नहीं उठता।

यानी आठ मांगों पर सहमति बनने के बावजूद दो प्रमुख मांगों ने पूरे मामले को अटका रखा है। यही वजह है कि बातचीत के बावजूद नगर पालिका में कामकाज और सफाई व्यवस्था सामान्य नहीं हो पाई है।

250 कर्मचारियों के रिकॉर्ड ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किल

नियमितीकरण और पदोन्नति की प्रक्रिया में एक और बड़ी अड़चन सामने आई है। बताया जा रहा है कि करीब 250 कर्मचारियों को नियमितीकरण और पदोन्नति का लाभ मिलना है, लेकिन नगर पालिका के पास कई कर्मचारियों से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं।

रिकॉर्ड के अभाव में प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि पात्र कर्मचारियों की सेवा अवधि, पद और अन्य जरूरी जानकारी का सत्यापन किस आधार पर किया जाए। यही कारण है कि अब नगर पालिका प्रशासन कर्मचारियों से संबंधित अनुपलब्ध रिकॉर्ड तलाशने में जुटा हुआ है।

यह रिकॉर्ड मिलने के बाद ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में आसानी हो सकती है। फिलहाल रिकॉर्ड की तलाश और मांगों के समाधान के बीच हड़ताल का गतिरोध बना हुआ है।

कर्मचारियों की मांग बनाम शहर की परेशानी—बीच में फंसे आम लोग

हड़ताल के इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर शहर के आम नागरिकों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर हैं और प्रशासन समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इन दोनों के बीच शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

पांच दिन से कचरा उठाव प्रभावित होने के कारण नागरिकों के सामने रोजाना नई परेशानी खड़ी हो रही है। जिन घरों और दुकानों से प्रतिदिन कचरा निकलता है, वहां जमा कचरे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। कई जगह सार्वजनिक स्थानों के आसपास भी कचरा जमा होने की स्थिति बन गई है।

शहरवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि मांगों का समाधान अपनी जगह है, लेकिन सफाई व्यवस्था आखिर कब सामान्य होगी?

अगर हड़ताल और खिंची तो बढ़ सकती है मुश्किल
हड़ताल पांचवें दिन में पहुंच चुकी है। ऐसे में यदि कर्मचारियों और प्रशासन के बीच जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो सफाई व्यवस्था पर इसका असर और बढ़ सकता है।

शहर में रोजाना निकलने वाले कचरे का समय पर उठाव नहीं होने से जगह-जगह कचरा जमा होता जाएगा। बारिश के बीच यह समस्या नागरिकों के लिए और ज्यादा परेशानी खड़ी कर सकती है।

वहीं कर्मचारियों का रुख भी फिलहाल साफ है। वे नियमितीकरण और पदोन्नति जैसे मुद्दों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं। प्रशासन की चुनौती यह है कि कर्मचारियों की मांगों पर समाधान निकालने के साथ-साथ शहर की सफाई व्यवस्था को भी जल्द से जल्द पटरी पर लाया जाए।

अब निगाह समाधान पर

नगर पालिका कर्मचारियों की 11 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुई हड़ताल अब केवल कर्मचारियों और प्रशासन के बीच का मुद्दा नहीं रह गई है। पांच दिनों से प्रभावित सफाई व्यवस्था के कारण इसका सीधा असर शहरवासियों पर पड़ रहा है।

एक ओर आठ मांगों पर सहमति बनने की बात सामने आ चुकी है, वहीं नियमितीकरण और पदोन्नति की मांग पर कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर करीब 250 कर्मचारियों के रिकॉर्ड की उपलब्धता भी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है।

अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन रिकॉर्ड तलाशने और मांगों के समाधान की प्रक्रिया को कितनी तेजी से आगे बढ़ाता है और कर्मचारियों के साथ बातचीत से यह गतिरोध कब टूटता है।

फिलहाल हालात यही बता रहे हैं कि कचरे के ढेर बढ़ रहे हैं, कर्मचारी धरने पर डटे हैं और शहर समाधान का इंतजार कर रहा है। हड़ताल लंबी खिंची तो सफाई व्यवस्था को लेकर शिवपुरी में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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