करैरा में लंपी वायरस की दस्तक से हड़कंप:आधा दर्जन गोवंश संक्रमित:वैक्सीन की कमी के आरोपों से बढ़ी पशुपालकों की चिंता

Nikk Pandit
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खबर:शिवपुरी जिले के करैरा अनुविभाग क्षेत्र में गोवंश में लंपी स्किन डिजीज (LSD) के मामले सामने आने के बाद पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र के कई गांवों में गायों के शरीर पर गांठें, बुखार और खाना-पीना कम करने जैसे लक्षण दिखाई देने की बात सामने आई है। करैरा पशु चिकित्सालय के चिकित्सक के अनुसार क्षेत्र में अब तक करीब आधा दर्जन लंपी संक्रमित पशुओं के मामले सामने आए हैं।

वहीं, पशुपालकों का आरोप है कि करैरा और दिनारा के पशु अस्पतालों में लंपी वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। पशुपालकों का कहना है कि बीमारी के शुरुआती दौर में ही यदि बड़े स्तर पर टीकाकरण और निगरानी नहीं की गई, तो संक्रमण दूसरे पशुओं तक फैल सकता है।

हालांकि पशु चिकित्सा विभाग का कहना है कि सामने आए संक्रमित पशुओं का उपचार किया जा रहा है और प्रभावित पशुओं के टीकाकरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

गाय ने खाना-पीना छोड़ा, दूध उत्पादन भी हुआ बंद

ग्राम टकटकी निवासी किसान लखन सिंह लोधी ने बताया कि उनकी एक गाय लंपी वायरस की चपेट में आ गई है। बीमारी के बाद गाय की हालत खराब हो गई और उसने कई दिनों से खाना-पीना लगभग छोड़ दिया है। दूध देना भी बंद कर दिया है।

लखन सिंह का कहना है कि पशु के बीमार होने से परिवार के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। ग्रामीणों के लिए गाय केवल पशु नहीं, बल्कि उनके परिवार की आय का महत्वपूर्ण साधन भी है। ऐसे में एक पशु के संक्रमित होने के बाद दूसरे पशुओं को लेकर भी डर बना हुआ है।

वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर उठे सवाल

क्षेत्रीय निवासी दुर्ग सिंह लोधी ने आरोप लगाया कि करैरा और दिनारा क्षेत्र के पशु अस्पतालों में लंपी वायरस से बचाव की वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि बीमारी के मामले सामने आने के बाद भी यदि समय रहते टीकाकरण नहीं हुआ, तो संक्रमण का दायरा बढ़ सकता है।

पशुपालकों की मांग है कि प्रभावित गांवों में पशु चिकित्सा विभाग की टीमें भेजकर गोवंश की जांच कराई जाए और आवश्यकता के अनुसार वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाए। साथ ही संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया जाए।

डॉक्टर बोले- करीब आधा दर्जन मामले सामने आए

करैरा पशु चिकित्सालय के चिकित्सक अरविंद नरवरिया ने बताया कि क्षेत्र में लंपी वायरस के लगभग आधा दर्जन मामले सामने आए हैं। संक्रमित पशुओं का उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रभावित पशुओं के टीकाकरण को भी सुनिश्चित किया जा रहा है और पशु चिकित्सालय की ओर से स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

पशु चिकित्सा विभाग के स्तर से संक्रमित पशुओं की पहचान और उपचार को लेकर निगरानी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लंपी स्किन डिजीज का संक्रमण एक पशु से दूसरे पशु तक पहुंच सकता है।

आखिर क्या है लंपी स्किन डिजीज?

लंपी स्किन डिजीज (LSD) गोवंश में होने वाली एक संक्रामक वायरल बीमारी है। इसमें पशु को तेज बुखार आ सकता है और शरीर पर अलग-अलग आकार की गांठें या त्वचा पर घाव दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में पशु खाना-पीना कम कर देता है और दूध उत्पादन में भी गिरावट आ सकती है।

इस बीमारी का प्रसार मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और टिक जैसे खून चूसने वाले कीटों के माध्यम से हो सकता है। इसलिए बारिश के मौसम में साफ-सफाई और कीट नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

पशुपालक इन सावधानियों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

1. संक्रमित पशु को तुरंत अलग करें
जिस पशु में शरीर पर गांठें, बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें, उसे स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। उसे खुले में दूसरे पशुओं के बीच न जाने दें।

2. बिना सलाह के दवा न दें
लंपी के लक्षण दिखाई देने पर पशुपालक खुद से कोई दवा या इंजेक्शन देने के बजाय तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

3. पशुशाला की सफाई रखें
गोशाला में गंदगी और पानी जमा न होने दें। नियमित रूप से फर्श और आसपास के क्षेत्र की सफाई करें।

4. मच्छर-मक्खियों पर नियंत्रण करें
क्योंकि बीमारी फैलाने वाले कीट संक्रमण के प्रसार में भूमिका निभा सकते हैं, इसलिए पशुशाला के आसपास पानी जमा न होने दें और पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार कीट नियंत्रण के उपाय करें।

5. बीमार पशु को दूसरे पशुओं के साथ न बांधें
साझा बाड़े, पानी और भोजन की व्यवस्था से बचें। बीमार और स्वस्थ पशुओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था करना बेहतर है।

6. पशु मेले या भीड़ में बीमार पशु न ले जाएं
यदि पशु बीमार है या उसमें लंपी के लक्षण हैं, तो उसे दूसरे पशुओं के संपर्क में आने से रोकें।

7. मृत पशु के निपटारे में सावधानी बरतें
यदि किसी पशु की बीमारी के दौरान मृत्यु होती है, तो उसके शव को खुले में न छोड़ें। स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारियों की सलाह के अनुसार सुरक्षित तरीके से निपटारा करें।

8. समय पर टीकाकरण कराएं
पशुपालक अपने क्षेत्र में उपलब्ध सरकारी टीकाकरण व्यवस्था की जानकारी लें और पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार टीकाकरण कराएं।

बीमारी दिखे तो घबराएं नहीं, तुरंत डॉक्टर को बताएं

पशुपालकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि किसी पशु में संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर घबराने के बजाय तुरंत पशु चिकित्सक को सूचना दें। बीमारी की शुरुआती पहचान, संक्रमित पशु को अलग रखना, साफ-सफाई, कीट नियंत्रण और विभागीय सलाह के अनुसार टीकाकरण संक्रमण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

करैरा क्षेत्र में लंपी के करीब आधा दर्जन मामलों की पुष्टि की जानकारी सामने आने के बाद अब सबसे बड़ी जरूरत प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ाने और पशुपालकों को समय पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। पशुपालकों का कहना है कि यदि वैक्सीन और चिकित्सा टीमों की उपलब्धता समय रहते सुनिश्चित कर दी जाए, तो बीमारी को बड़े स्तर पर फैलने से रोका जा सकता है।

शिवपुरी फर्स्ट की अपील: पशुपालक अपने पशुओं में किसी भी तरह के संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज न करें। संक्रमित पशु को अलग रखें और तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करें। सावधानी ही संक्रमण की रफ्तार रोकने का सबसे महत्वपूर्ण हथियार है।

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