खबर:शिवपुरी जिले के कोलारस तहसील क्षेत्र के रिजौदा गांव में रविवार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन दुकान पर उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब बड़ी संख्या में ग्रामीण राशन लेने पहुंचे। ग्रामीणों ने राशन दुकान के सेल्समैन पर पिछले दो महीने का राशन नहीं देने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि कई हितग्राहियों से राशन वितरण के नाम पर मशीन पर अंगूठा लगवा लिया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पूरा राशन उपलब्ध नहीं कराया गया।
राशन नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने दुकान पर पहुंचकर विरोध जताया। हंगामे के बीच सेल्समैन दुकान बंद कर मौके से चला गया। इसके बाद ग्रामीणों ने मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की। शिकायत की जानकारी मिलने पर कोलारस तहसीलदार प्रदीप भार्गव मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि राशन दुकान के सेल्समैन द्वारा कई हितग्राहियों से दो माह का राशन देने की बात कहकर ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवा लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अंगूठा लगने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें दोनों माह का निर्धारित राशन मिल जाएगा, लेकिन राशन नहीं दिया गया।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उन्हें केवल एक महीने का राशन ही प्राप्त हुआ है, जबकि उनके अनुसार दूसरे महीने का राशन भी उनके खाते में दर्ज या वितरण के लिए उपलब्ध होना चाहिए था। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती गई और रविवार को उन्होंने राशन दुकान पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों ने सेल्समैन पर हितग्राहियों से निर्धारित राशि से अधिक पैसे लेने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि कई हितग्राहियों से कथित तौर पर 10 से 20 रुपए अतिरिक्त लिए गए। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
हंगामे के बाद दुकान बंद कर चला गया सेल्समैन
राशन वितरण को लेकर ग्रामीणों और सेल्समैन के बीच विवाद बढ़ने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि हंगामे के दौरान सेल्समैन दुकान बंद कर वहां से चला गया। इसके बाद ग्रामीणों ने अधिकारियों को मामले की जानकारी दी और राशन वितरण व्यवस्था की जांच कराने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना था कि गरीब परिवारों को मिलने वाले सरकारी राशन में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद राशन नहीं दिया गया है तो पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
मौके पर पहुंचे तहसीलदार
ग्रामीणों की शिकायत के बाद कोलारस तहसीलदार प्रदीप भार्गव मौके पर पहुंचे। उन्होंने राशन दुकान की स्थिति का जायजा लिया और सेल्समैन तथा प्रबंधक से जानकारी ली। अधिकारियों की मौजूदगी में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर जानकारी जुटाई गई।
जांच के दौरान राशन वितरण में इस्तेमाल होने वाली ई-पॉस मशीन खराब पाई गई। मशीन के खराब होने के कारण भी राशन वितरण प्रभावित होने की बात सामने आई। इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल दूसरी मशीन की व्यवस्था कराई, ताकि ग्रामीणों को राशन के लिए ज्यादा इंतजार न करना पड़े।
दूसरी मशीन से शुरू कराया गया राशन वितरण
तहसीलदार के निर्देश के बाद दूसरी मशीन की व्यवस्था कर राशन वितरण शुरू कराया गया। इससे मौके पर मौजूद ग्रामीणों को राहत मिली। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि पात्र हितग्राहियों को उनका निर्धारित राशन उपलब्ध कराया जा सके।
राशन वितरण शुरू होने के बाद ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं भी रखीं। ग्रामीणों ने मांग की कि पिछले दो माह के राशन वितरण का रिकॉर्ड जांचा जाए और यह पता लगाया जाए कि किस हितग्राही को कितना राशन दिया गया है।
दुकान के स्टॉक का होगा मिलान
तहसीलदार प्रदीप भार्गव ने बताया कि मौके पर राशन वितरण शुरू करा दिया गया है। इसके साथ ही राशन दुकान में उपलब्ध स्टॉक का मिलान भी कराया जाएगा। स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद राशन की जांच की जाएगी।
तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि यदि जांच के दौरान राशन के स्टॉक में कमी या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हितग्राहियों से निर्धारित राशि से अधिक रुपए लिए जाने के आरोप की भी जांच की जा रही है।
मशीन खराब होने के साथ उठे कई सवाल
मौके पर राशन वितरण मशीन खराब मिलने के बाद यह सवाल भी खड़ा हुआ कि मशीन खराब होने की जानकारी पहले से थी या नहीं और यदि मशीन खराब थी तो समय पर वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि तकनीकी समस्या के कारण उन्हें राशन लेने के लिए परेशान होना पड़ा।
हालांकि प्रशासन की ओर से दूसरी मशीन की व्यवस्था कर तत्काल राशन वितरण शुरू करा दिया गया है। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि राशन वितरण में वास्तविक समस्या मशीन की खराबी के कारण थी या इसके अलावा भी कोई अनियमितता हुई है।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
रिजौदा गांव की राशन दुकान पर हुए हंगामे के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। फिलहाल राशन वितरण दोबारा शुरू करा दिया गया है, जबकि दुकान के स्टॉक और वितरण रिकॉर्ड का मिलान किया जाना है।
यदि जांच में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो प्रशासन की जांच के बाद वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
फिलहाल ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग यही है कि उन्हें उनके हिस्से का पूरा और समय पर राशन मिले। प्रशासन द्वारा शुरू कराए गए राशन वितरण और प्रस्तावित स्टॉक मिलान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।