बीजरी गांव में 5 फीट का मगरमच्छ घुसा, मचा हड़कंप: 4 घंटे बाद पहुंची माधव टाइगर रिजर्व की टीम:घंटों की मशक्कत के बाद किया सुरक्षित रेस्क्यू

Nikk Pandit
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खबर:शिवपुरी जिले के रन्नौद थाना क्षेत्र के बीजरी गांव में सोमवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब ग्रामीणों ने गांव के पास करीब 5 फीट लंबा मगरमच्छ देखा। खेतों और गांव के आसपास मगरमच्छ दिखाई देने की खबर कुछ ही देर में पूरे इलाके में फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मगरमच्छ के गांव की ओर बढ़ने की आशंका से लोगों में दहशत का माहौल बन गया।

ग्रामीणों ने बिना देर किए इसकी सूचना संबंधित विभाग को दी। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के आसपास पहली बार मगरमच्छ दिखाई दिया है। इससे पहले यहां मगरमच्छ देखे जाने की कोई जानकारी सामने नहीं आई थी। ऐसे में अचानक गांव के नजदीक विशालकाय मगरमच्छ के पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई।

चार घंटे तक ग्रामीण करते रहे इंतजार

मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना मिलने के बाद ग्रामीणों ने उसके आसपास जाने से दूरी बनाए रखी और वन विभाग की रेस्क्यू टीम का इंतजार किया। करीब चार घंटे बाद माधव टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। टीम के पहुंचते ही मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ने की कार्रवाई शुरू की गई।

रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती मगरमच्छ को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित पकड़ना था। टीम ने बेहद सावधानी के साथ ऑपरेशन शुरू किया। मगरमच्छ को काबू में करने के दौरान काफी मशक्कत करनी पड़ी। मौके पर मौजूद ग्रामीण भी रेस्क्यू अभियान को देखने के लिए जमा रहे।

घंटों की मशक्कत के बाद पकड़ा गया मगरमच्छ

माधव टाइगर रिजर्व की टीम ने काफी देर तक प्रयास करने के बाद करीब पांच फीट लंबे मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया। मगरमच्छ के रेस्क्यू होते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। टीम ने मगरमच्छ को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी की।

रेस्क्यू के दौरान टीम ने ग्रामीणों को भी मगरमच्छ से पर्याप्त दूरी बनाए रखने की हिदायत दी, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। मगरमच्छ के पकड़े जाने के बाद गांव में बना भय का माहौल धीरे-धीरे सामान्य हुआ।

सिंध नदी से नाले के रास्ते गांव तक पहुंचने का अनुमान
ग्रामीणों और स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे अनुमान के मुताबिक, मगरमच्छ बारिश के पानी के नाले के रास्ते बीजरी गांव के नजदीक पहुंचा होगा। बताया जा रहा है कि यह नाला टामकी गांव से होकर गुजरने वाली सिंध नदी से जुड़ता है।

आशंका जताई जा रही है कि बारिश के दौरान नदी और आसपास के जलस्रोतों में पानी बढ़ने के कारण मगरमच्छ अपने प्राकृतिक क्षेत्र से निकलकर सिंध नदी में पहुंचा होगा। इसके बाद पानी के बहाव के साथ वह नाले में आया और धीरे-धीरे गांव के नजदीक तक पहुंच गया।

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के दौरान आसपास के जलस्रोतों और नालों में पानी का बहाव तेज हो जाता है। ऐसे में जलीय जीवों के अपने सामान्य क्षेत्र से बाहर निकलकर आबादी के नजदीक पहुंचने की संभावना बनी रहती है।

अटल सागर बांध के कैचमेंट से आने की भी आशंका
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह भी संभावना जताई जा रही है कि मगरमच्छ अटल सागर बांध के कैचमेंट एरिया से निकलकर सिंध नदी में आया होगा। इसके बाद बारिश के पानी के साथ जुड़े नाले के रास्ते वह बीजरी गांव के पास तक पहुंच गया।

हालांकि मगरमच्छ के गांव तक पहुंचने का वास्तविक कारण क्या रहा, इसे लेकर विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। मगरमच्छ के रेस्क्यू के बाद अब उसे सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़े जाने की तैयारी है।

सांख्य सागर झील में छोड़ा जाएगा मगरमच्छ
रेस्क्यू किए गए करीब पांच फीट लंबे मगरमच्छ को माधव टाइगर रिजर्व क्षेत्र की सांख्य सागर झील में छोड़े जाने की बात सामने आई है। इससे मगरमच्छ को उसके अनुकूल प्राकृतिक वातावरण मिल सकेगा और ग्रामीण क्षेत्र में भी किसी तरह का खतरा नहीं रहेगा।

बीजरी गांव में मगरमच्छ मिलने की घटना ने एक बार फिर बारिश के मौसम में वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों के नजदीक पहुंचने की संभावना को सामने ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते मगरमच्छ की जानकारी मिलने और रेस्क्यू टीम के पहुंचने से बड़ी घटना टल गई।

मगरमच्छ दिखते ही ग्रामीणों ने दिखाई समझदारी
गनीमत रही कि ग्रामीणों ने मगरमच्छ को देखने के बाद उसे पकड़ने या उसके नजदीक जाने की कोशिश नहीं की। सूचना विभाग तक पहुंचाई गई और रेस्क्यू टीम के आने का इंतजार किया गया। अगर कोई व्यक्ति मगरमच्छ के नजदीक जाकर उसे छेड़ने की कोशिश करता, तो स्थिति खतरनाक हो सकती थी।

फिलहाल मगरमच्छ के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद बीजरी गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। बारिश के बीच गांव के नजदीक करीब पांच फीट लंबे मगरमच्छ के पहुंचने की यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों के लिए यह पहला मौका था, जब उन्होंने अपने गांव के आसपास इतने बड़े मगरमच्छ को देखा।
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