थाली-कटोरी लेकर राशन दुकान पहुंचा ग्रामीण:5 मिनट रखा मौन

Nikk Pandit
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खबर:शिवपुरी रक्षाबंधन का त्योहार... घरों में पकवानों की खुशबू, बहनों की राखियां और भाइयों की कलाई पर स्नेह का धागा। लेकिन शिवपुरी जिले के मढ़वासा गांव में एक ग्रामीण का परिवार और कई अन्य परिवार इस त्योहार पर राशन की समस्या से जूझते नजर आए। दो माह से राशन नहीं मिलने से नाराज एक ग्रामीण ने व्यवस्था के खिलाफ ऐसा अनोखा विरोध किया, जिसने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया।

मढ़वासा गांव निवासी पुखराज सिंह खाली थाली और कटोरी लेकर राशन की दुकान पर पहुंचे। हाथों में खाली बर्तन और चेहरे पर नाराजगी लिए उन्होंने करीब पांच मिनट तक मौन व्रत रखकर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि जब घर में खाने के लिए राशन ही नहीं है, तो त्योहार की खुशियां कैसे मनाई जाएं।

खाली थाली-कटोरी बनी विरोध का हथियार

पुखराज सिंह का यह विरोध किसी नारेबाजी या हंगामे के रूप में नहीं था। उन्होंने खाली थाली और कटोरी को ही अपनी आवाज बना दिया। राशन दुकान के सामने खड़े होकर उन्होंने कुछ देर तक मौन रहकर जिम्मेदारों का ध्यान ग्रामीणों की समस्या की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।

ग्रामीण का कहना था कि अगस्त और सितंबर माह का राशन अभी तक वितरित नहीं किया गया है। राशन वितरण में देरी के कारण मढ़वासा गांव के कई परिवार प्रभावित बताए जा रहे हैं। पुखराज सिंह ने आरोप लगाया कि राशन वितरण व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में लंबे समय से नाराजगी है और जिम्मेदारों को बार-बार समस्या से अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं हो रहा।

उनका कहना था कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर भी घर में आवश्यक राशन उपलब्ध नहीं था। ऐसे में परिवार के साथ त्योहार मनाना मुश्किल हो गया। इसी पीड़ा को सामने रखने के लिए उन्होंने खाली बर्तन लेकर राशन दुकान पहुंचने का फैसला किया।

बोले—खाली बर्तन प्रशासन तक पहुंचाएंगे ग्रामीणों की आवाज

पुखराज सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष से विवाद करना नहीं, बल्कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक ग्रामीणों की परेशानी पहुंचाना है। उनका कहना था कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकारी राशन केवल सुविधा नहीं, बल्कि उनके घर की रसोई का महत्वपूर्ण सहारा है।

ग्रामीण ने राशन वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से गांव में राशन वितरण की स्थिति की जांच कराने और पात्र परिवारों को समय पर राशन उपलब्ध कराने की मांग की।

पुखराज सिंह ने विरोध के दौरान प्रशासन को सद्बुद्धि देने और व्यवस्था में सुधार की उम्मीद के साथ मौन व्रत रखा। उनका यह शांतिपूर्ण विरोध ग्रामीणों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया।

दो माह का राशन नहीं मिला तो त्योहार भी फीका

ग्रामीणों का कहना है कि राशन वितरण में देरी का सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ता है। जिन परिवारों की रसोई सरकारी राशन पर निर्भर है, उनके लिए समय पर खाद्यान्न नहीं मिलना बड़ी परेशानी बन जाता है।

रक्षाबंधन के दिन पुखराज सिंह का खाली थाली-कटोरी लेकर राशन दुकान पहुंचना इसी परेशानी की तस्वीर सामने लाता है। एक तरफ लोग त्योहार की तैयारियों में जुटे थे, वहीं दूसरी तरफ राशन की आस लगाए ग्रामीण अपनी समस्या के समाधान का इंतजार कर रहे थे।

सेल्समैन बोले—बारिश के कारण हुई देरी

इधर, राशन दुकान के सेल्समैन सोनपाल यादव ने राशन वितरण में देरी के पीछे बारिश को कारण बताया है। उनका कहना है कि संबंधित राशन दुकान से केवल मढ़वासा गांव ही नहीं, बल्कि अन्य गांव भी जुड़े हुए हैं और वहां भी राशन वितरण का काम किया जा रहा है।

सेल्समैन के अनुसार, लगातार बारिश के कारण राशन वितरण का काम प्रभावित हुआ और इसी वजह से मढ़वासा गांव में वितरण में देरी हुई। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि एक-दो दिन के भीतर मढ़वासा गांव में भी राशन का वितरण कर दिया जाएगा।

अब सवाल—कब तक मिलेगा ग्रामीणों को राशन?

सेल्समैन की ओर से एक-दो दिन में राशन बांटने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि यह आश्वासन जमीन पर कब तक दिखाई देता है।

राशन वितरण व्यवस्था में देरी को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी इस अनोखे मौन प्रदर्शन के जरिए सामने आई है। खाली थाली और कटोरी लेकर किया गया यह प्रदर्शन प्रशासन के लिए भी एक संदेश है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर हितग्राहियों तक पहुंचना जरूरी है।

अब देखना होगा कि मढ़वासा के ग्रामीणों को तय समय पर राशन मिल पाता है या नहीं और राशन वितरण में देरी के कारणों की प्रशासनिक स्तर पर जांच होती है या नहीं।

फिलहाल, रक्षाबंधन के दिन खाली थाली और कटोरी लेकर राशन दुकान पहुंचे पुखराज सिंह का पांच मिनट का मौन प्रदर्शन सरकारी राशन व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर गया है—आखिर जरूरतमंद परिवारों की थाली कब भरेगी?

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