खबर:शिवपुरी रक्षाबंधन का त्योहार... बहनों की आंखें भाइयों के घर लौटने की राह देख रही थीं। हर किसी को जल्द से जल्द अपने परिवार तक पहुंचने की चिंता थी। लेकिन शिवपुरी के रन्नौद-पिछोर क्षेत्र में यही जल्दबाजी कुछ लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ते-पड़ते बची। शुक्रवार को तेज बारिश के बाद मुतलेड़ी नदी अचानक उफान पर आ गई। नदी पर बनी पुलिया के ऊपर से तेज रफ्तार में पानी बह रहा था, बावजूद इसके लोग जान जोखिम में डालकर उसे पार करने की कोशिश करते रहे।
इसी दौरान एक बाइक सवार युवक अपनी बाइक समेत नदी के तेज बहाव में बह गया। कुछ दूरी तक पानी के साथ बहने के बाद युवक ने किसी तरह खुद को संभाला और सुरक्षित बाहर निकल आया, लेकिन उसकी बाइक तेज बहाव में समा गई। घटना ने मौके पर मौजूद लोगों की सांसें रोक दीं।
पुलिया के ऊपर से बह रहा था तेज पानी
मामला रन्नौद थाना क्षेत्र के पिछोर-रन्नौद मार्ग का है। शुक्रवार को क्षेत्र में हुई तेज बारिश के बाद मुतलेड़ी नदी का जलस्तर बढ़ गया। देखते ही देखते नदी का पानी पुलिया के ऊपर से बहने लगा। पानी का बहाव इतना तेज था कि पुलिया पार करना बेहद खतरनाक हो गया था।
पानी बढ़ने के कारण पुलिया के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोग नदी का पानी कम होने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन रक्षाबंधन का पर्व होने के कारण कई लोग जल्द घर पहुंचना चाहते थे।यही जल्दबाजी कुछ लोगों को जिंदगी और मौत के बीच ले गई।
तीन युवक एक बाइक पर निकले, अचानक बिगड़ा संतुलन
जानकारी के मुताबिक, इसी दौरान तीन युवक एक बाइक पर सवार होकर उफनती नदी को पार करने की कोशिश करने लगे। तीनों बाइक लेकर तेज बहाव वाले पानी में उतर गए।
शुरुआत में बाइक आगे बढ़ती दिखाई दी, लेकिन कुछ ही पल बाद पानी के तेज बहाव ने बाइक का संतुलन बिगाड़ दिया। बाइक बहने लगी तो उस पर सवार दो युवकों ने किसी तरह खुद को बाइक से अलग कर लिया। लेकिन तीसरा युवक बाइक के साथ ही पानी के तेज बहाव में बह गया।
कुछ दूर तक युवक पानी के साथ बहता रहा। मौके पर मौजूद लोगों की नजरें उसी पर टिक गईं। गनीमत रही कि युवक ने किसी तरह खुद को संभाला और नदी से बाहर निकलने में कामयाब हो गया।
युवक की जान तो बच गई, लेकिन उसकी बाइक नदी की तेज धार में डूब गई।
दूसरी बाइक पर फंसे दो युवकों के लिए देवदूत बने ग्रामीण
इसी दौरान एक अन्य बाइक पर सवार दो युवकों ने भी नदी पार करने की कोशिश की। दोनों जैसे ही तेज बहाव में पहुंचे, उनकी बाइक भी पानी के दबाव में असंतुलित होने लगी।
दोनों युवक पानी के बीच फंस गए। हालात बिगड़ते देख मौके पर मौजूद करीब 7-8 ग्रामीण तत्काल मदद के लिए दौड़ पड़े।
ग्रामीणों ने अपनी जान की परवाह किए बिना दोनों युवकों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने दोनों युवकों को सुरक्षित बाहर खींच लिया। अगर ग्रामीणों ने समय रहते हिम्मत नहीं दिखाई होती, तो यह घटना किसी बड़े हादसे में बदल सकती थी।
उफनती नदी में स्टंट करने की कोशिश भी
घटना के दौरान लापरवाही की एक और तस्वीर सामने आई। बताया गया कि मौके पर मौजूद एक ग्रामीण ने उफनती नदी में छलांग लगाकर स्टंट करने की कोशिश की।
तेज बहाव के बीच इस तरह की हरकत बेहद खतरनाक थी। हालांकि वह भी सुरक्षित बाहर निकल आया, लेकिन ऐसी लापरवाही किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकती है।
बारिश के मौसम में नदी और नालों का बहाव ऊपर से देखने में जितना सामान्य नजर आता है, जमीन पर उसकी ताकत का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। कुछ सेकंड की गलती जिंदगी भर का दर्द दे सकती है।
रक्षाबंधन पर घर पहुंचने की जल्दबाजी, जिंदगी पर भारी पड़ते-पड़ते बची
रक्षाबंधन का त्योहार परिवार को जोड़ने वाला पर्व है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए उनका इंतजार करती हैं। इसी त्योहार पर घर पहुंचने की जल्दबाजी में कुछ लोगों ने जिस तरह उफनती नदी को पार करने की कोशिश की, उसने त्योहार की खुशियों को कुछ ही पलों के लिए मातम में बदलने का खतरा पैदा कर दिया था।
सोचिए, अगर बाइक समेत बहा युवक पानी से बाहर नहीं निकल पाता... अगर ग्रामीण समय पर दूसरी बाइक सवार युवकों तक नहीं पहुंचते... तो रक्षाबंधन का दिन कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन सकता था।
गनीमत रही कि इस बार मौत की धार से जिंदगी जीतकर बाहर आ गई।
प्रशासन की अपील को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से बारिश के दौरान लगातार लोगों से अपील की जाती है कि जलभराव वाले स्थानों, नदी-नालों और उफान पर चल रहे पुल-पुलियाओं को पार करने का जोखिम न लें।
इसके बावजूद कई लोग पानी का बहाव कम आंककर उसे पार करने की कोशिश करते हैं। खासकर बाइक सवारों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
मुतलेड़ी नदी की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लोग कुछ मिनट बचाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी दांव पर क्यों लगा देते हैं?
पुलिया के ऊपर से पानी बह रहा हो तो रास्ता बंद समझना ही समझदारी है। कुछ देर इंतजार करने से शायद घर पहुंचने में देर हो सकती है, लेकिन गलत फैसला जिंदगी भर का इंतजार बन सकता है।
इस घटना में ग्रामीणों की सूझबूझ और साहस ने कई जिंदगियां बचा लीं। अब जरूरत है कि लोग भी सबक लें—बारिश में उफनती नदी रास्ता नहीं, खतरे की घंटी होती है।