सियार के हमले से नहीं डरी 70 साल की बुजुर्ग:लाठी से किया मुकाबला;गंभीर घायल

Nikk Pandit
0


शिवपुरी:शिवपुरी जिले के पोहरी अनुविभाग के मोहनपुरा परिच्छा गांव में खेत की रखवाली कर रही 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर सियार ने हमला कर दिया। अचानक हुए हमले के बावजूद महिला ने हिम्मत नहीं हारी और लाठी उठाकर सियार का मुकाबला किया। काफी संघर्ष के बाद महिला सियार को वहां से भगाने में सफल रहीं और अपनी जान बचाई। हालांकि हमले में उनके दोनों हाथों और सिर में गंभीर चोटें आई हैं। परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका उपचार जारी है।

झोपड़ी में सो रही थीं महिला

जानकारी के अनुसार, मोहनपुरा परिच्छा गांव निवासी दुस्सा बाई उम्र 70 वर्ष खेत में लगी फसल की रखवाली कर रही थीं। खेत में कुएं के पास बनी झोपड़ी में वह रात के समय सो रही थीं। इसी दौरान अचानक एक सियार झोपड़ी के पास पहुंचा और महिला पर हमला कर दिया।

अचानक हुए हमले से महिला घबरा गईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। सियार के हमले से बचने के लिए उन्होंने पास रखी लाठी उठा ली और उससे सियार का मुकाबला शुरू कर दिया। महिला ने लाठी से सियार को पीछे हटाने का प्रयास किया।

लाठी के सहारे बचाई जान

सियार ने महिला पर लगातार हमला करने की कोशिश की, लेकिन दुस्सा बाई ने लाठी के सहारे उसका सामना किया। संघर्ष के दौरान महिला घायल हो गईं, फिर भी उन्होंने सियार का सामना करना जारी रखा। आखिरकार महिला के प्रतिरोध के बाद सियार वहां से भाग गया।

इस घटना में दुस्सा बाई के दोनों हाथों और सिर में गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद महिला की हालत देखकर परिजन घबरा गए। उन्हें बिना देर किए उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।

70 वर्ष की उम्र में महिला द्वारा जिस तरह साहस दिखाकर जंगली जानवर का मुकाबला किया गया, उसकी जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण भी हैरान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि महिला घबराकर भागने लगतीं तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। उन्होंने साहस दिखाते हुए लाठी के सहारे अपनी जान बचाई।

घटना के बाद गांव में चिंता

सियार के हमले की घटना के बाद मोहनपुरा परिच्छा और आसपास के गांवों में चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में फसल की रखवाली करने के लिए उन्हें अक्सर रात के समय खेतों में रहना पड़ता है। ऐसे में जंगली जानवरों की मौजूदगी उनके लिए खतरा बन सकती है।

खासतौर पर बारिश के मौसम में खेतों और आसपास के इलाकों में घनी झाड़ियां और वन क्षेत्र होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ने की आशंका रहती है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और लोगों को आवश्यक सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।

वन विभाग की टीम ने शुरू की जांच

घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग भी सक्रिय हो गया है। रेंजर श्रुति राठौर ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद टीम को गांव भेजा गया है। वन विभाग की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्षेत्र में सियार की मौजूदगी कितनी है।

टीम द्वारा आसपास के क्षेत्र में सियार की गतिविधियों और उसके आने-जाने वाले संभावित रास्तों की जानकारी जुटाई जा रही है। ग्रामीणों से भी बातचीत की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इससे पहले भी क्षेत्र में सियार या किसी अन्य जंगली जानवर की गतिविधि देखी गई थी या नहीं।

वन विभाग ग्रामीणों को खेतों में जाते समय और रात के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दे रहा है। लोगों से कहा जा रहा है कि यदि किसी जंगली जानवर की मौजूदगी दिखाई दे तो उसके करीब जाने या उसे घेरने की कोशिश न करें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें।

खेतों में रखवाली करने वालों के लिए बढ़ी चिंता

ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अक्सर फसल को जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से बचाने के लिए रात में खेतों पर ही रुकते हैं। ऐसे में वन्यजीवों की गतिविधियां उनके लिए अतिरिक्त खतरा पैदा कर सकती हैं। दुस्सा बाई के साथ हुई घटना ने एक बार फिर खेतों में रात के समय सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित करे और जरूरत पड़ने पर वहां निगरानी बढ़ाई जाए। साथ ही किसानों को यह भी बताया जाए कि सियार या अन्य जंगली जानवर सामने आने की स्थिति में क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

फिलहाल दुस्सा बाई जिला अस्पताल में उपचाराधीन हैं। वन विभाग की टीम घटना की जांच में जुटी है। महिला ने जिस साहस के साथ सियार का सामना कर अपनी जान बचाई, वह इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। अब ग्रामीणों को वन विभाग की जांच और क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी कदमों का इंतजार है।

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)