ई-रिक्शा और थ्री-व्हीलर के अवैध परिवहन पर रोक की मांग:बस ऑपरेटरों ने एसपी को सौंपा ज्ञापन

Nikk Pandit
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शिवपुरी:शहर में परमिट वाली बसों के समानांतर कथित रूप से सवारियां ढो रहे ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक व सीएनजी थ्री-व्हीलर, ईको और टैक्सी वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बस ऑपरेटरों ने गुरुवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। प्राइम रूट बस ऑनर्स एसोसिएशन जिला शिवपुरी के सदस्यों ने पुलिस अधीक्षक से नियम विरुद्ध संचालित वाहनों की जांच कराने और अवैध सवारी परिवहन पर रोक लगाने की मांग की।

बस ऑपरेटरों का कहना है कि छोटे यात्री वाहनों द्वारा परमिट वाली बसों के समानांतर उन्हीं मार्गों पर सवारियां ले जाने से बस संचालकों की आय प्रभावित हो रही है। ऑपरेटरों ने दावा किया कि लंबे समय से इस समस्या को लेकर संबंधित विभागों को शिकायतें दी जा रही हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण स्थिति लगातार बनी हुई है।

प्रमुख मार्गों पर समानांतर परिवहन का आरोप

एसोसिएशन की ओर से दिए गए ज्ञापन में बताया गया कि शिवपुरी से ग्वालियर, गुना, पोहरी, करैरा, बदरवास और मोहना सहित कई प्रमुख मार्गों पर परमिट वाली बसों का संचालन होता है। बस ऑपरेटरों का आरोप है कि इन्हीं मार्गों और बस स्टैंडों के आसपास ईको, इलेक्ट्रिक वाहन, सीएनजी थ्री-व्हीलर और टैक्सी चालक सवारियां बैठाकर समानांतर रूप से परिवहन कर रहे हैं।

ऑपरेटरों के मुताबिक इन छोटे वाहनों का संचालन यदि निर्धारित नियमों और परमिट की शर्तों के विपरीत हो रहा है तो संबंधित विभागों को इसकी जांच करनी चाहिए। उनका कहना है कि नियमों का पालन करने वाले बस संचालकों और कथित रूप से नियमों को दरकिनार कर सवारी ढोने वाले वाहनों के बीच प्रतिस्पर्धा असमान हो रही है।

बसों की आय प्रभावित होने का दावा

बस ऑपरेटर मुकेश चौहान ने कहा कि समानांतर सवारी परिवहन के कारण परमिट वाली बसों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है। यात्रियों को रास्ते में छोटे वाहनों द्वारा उठाए जाने से बसों में यात्रियों की संख्या कम हो रही है, जिससे बस संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ऑपरेटरों का यह भी कहना है कि यदि कोई वाहन सवारी परिवहन के लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रहा है तो उसके खिलाफ परिवहन विभाग और पुलिस को संयुक्त रूप से कार्रवाई करनी चाहिए। इससे न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि सड़क पर यातायात व्यवस्था भी बेहतर हो सकेगी।

छोटे वाहनों की बढ़ती संख्या पर भी सवाल

बस ऑपरेटरों ने सड़कों पर बढ़ती संख्या में छोटे यात्री वाहनों को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि कई मार्गों पर बसों के साथ बड़ी संख्या में ई-रिक्शा, थ्री-व्हीलर और टैक्सी चलने से यातायात का दबाव बढ़ता है।

ऑपरेटरों के अनुसार, यदि छोटे वाहन बिना उचित अनुमति या नियमों के विपरीत सवारी परिवहन करते हैं तो इससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने संबंधित विभाग से सभी ऐसे वाहनों के परमिट, दस्तावेज, फिटनेस और संचालन की जांच कराने की मांग की है।

बस रोकने और विवाद की स्थिति का आरोप

ज्ञापन में बस ऑपरेटरों ने यह आरोप भी लगाया कि जब बस संचालक कथित रूप से अवैध रूप से सवारी परिवहन करने वाले वाहनों को रोकने का प्रयास करते हैं तो कई स्थानों पर विवाद की स्थिति बन जाती है। ऑपरेटरों के मुताबिक कुछ मामलों में उनकी बसों को रुकवाने और रास्ते में विवाद पैदा होने की शिकायतें सामने आई हैं।

उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों को लेकर पूर्व में सिटी कोतवाली थाना, यातायात पुलिस और आरटीओ विभाग को भी शिकायतें दी जा चुकी हैं। हालांकि ऑपरेटरों का दावा है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

पुलिस और परिवहन विभाग से संयुक्त कार्रवाई की मांग

बस ऑपरेटरों ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि शहर और प्रमुख मार्गों पर नियम विरुद्ध सवारी परिवहन करने वाले वाहनों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। वाहनों के परमिट, फिटनेस, दस्तावेज और निर्धारित रूट की जांच की जाए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ऑपरेटरों का कहना है कि कार्रवाई किसी विशेष वाहन या चालक के खिलाफ नहीं, बल्कि नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए होनी चाहिए। यदि कोई वाहन वैध परमिट और निर्धारित नियमों के तहत सवारी परिवहन कर रहा है तो उसे परेशान नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन नियमों के विपरीत संचालन पर रोक लगनी चाहिए।

कार्रवाई नहीं हुई तो बसें खड़ी करने की चेतावनी

बस ऑपरेटरों ने कहा कि यदि कथित अवैध समानांतर परिवहन पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में वे अपनी बसें खड़ी करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

फिलहाल बस ऑपरेटरों के ज्ञापन के बाद गेंद पुलिस और परिवहन विभाग के पाले में है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग परमिट और सवारी परिवहन के नियमों की जांच के लिए क्या कदम उठाते हैं। वहीं, इस पूरे मामले में ई-रिक्शा, थ्री-व्हीलर, ईको और टैक्सी संचालकों का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा। जांच और कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन वाहनों का संचालन नियमों के अनुरूप है और किन पर कार्रवाई की जरूरत है।

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