चार महीने से 78 परिवारों को नहीं मिला राशन:जांच में खुली पोल; सेल्समैन को भेजा जेल

Nikk Pandit
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खबर:शिवपुरी जिले के कोलारस अनुविभाग की ग्राम पंचायत दीघोद में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन दुकान से जुड़ी गंभीर अनियमितता सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। ग्रामीणों की शिकायत पर की गई जांच में चार महीने से 78 परिवारों को राशन नहीं मिलने की शिकायत सही पाई गई। इसके बाद प्रशासन ने राशन दुकान के सेल्समैन दिलीप जाटव के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेज दिया।

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद राशन से वंचित 78 परिवारों को तत्काल राहत भी मिली। अधिकारियों ने मौके पर ही राशन दुकान के प्रबंधक को बुलाया और पात्र हितग्राहियों को राशन का वितरण शुरू कराया। लंबे समय से राशन का इंतजार कर रहे परिवारों को प्रशासन की कार्रवाई के बाद खाद्यान्न मिलना शुरू हुआ।

कलेक्टर से ग्रामीणों ने की थी शिकायत

दीघोद पंचायत के ग्रामीणों ने हाल ही में कलेक्टर अर्पित वर्मा के समक्ष अपनी समस्या रखी थी। ग्रामीणों का कहना था कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान से उन्हें लगातार चार महीने से राशन नहीं दिया जा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि राशन उनके परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और सरकारी राशन व्यवस्था पर निर्भर हैं। ऐसे में चार महीने तक खाद्यान्न नहीं मिलने से उनके सामने परेशानी की स्थिति बनी हुई थी।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए।

तहसीलदार और खाद्य विभाग की टीम पहुंची गांव

कलेक्टर के निर्देश के बाद तहसीलदार सचिन भार्गव और जिला आपूर्ति अधिकारी तुलेश्वर कुर्रे दीघोद पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर ग्रामीणों से बातचीत की और राशन वितरण से संबंधित जानकारी जुटाई।

जांच के दौरान अधिकारियों ने राशन दुकान से जुड़े रिकॉर्ड और हितग्राहियों की शिकायतों की स्थिति को देखा। ग्रामीणों द्वारा चार महीने से राशन नहीं मिलने की शिकायत जांच में सही पाई गई।

प्रशासन ने चार महीने तक पात्र हितग्राहियों को राशन से वंचित रखे जाने को गंभीर लापरवाही और अनियमितता माना। इसके बाद संबंधित राशन दुकान के सेल्समैन दिलीप जाटव के खिलाफ कार्रवाई की गई और उसे जेल भेज दिया गया।

78 परिवारों को मौके पर ही दिलाया राशन

प्रशासन ने कार्रवाई के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया कि ग्रामीणों को आगे राशन के लिए दोबारा परेशान न होना पड़े। अधिकारियों ने तत्काल राशन दुकान के प्रबंधक को मौके पर बुलाया।

इसके बाद चार महीने से राशन से वंचित 78 परिवारों को राशन का वितरण शुरू कराया गया। प्रशासन की मौजूदगी में पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया।

ग्रामीणों के लिए यह कार्रवाई राहत भरी रही। लंबे समय से राशन नहीं मिलने की शिकायत कर रहे परिवारों को मौके पर ही खाद्यान्न मिलना शुरू हो गया।

चार महीने तक राशन नहीं मिलने पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों को यदि लगातार चार महीने तक राशन नहीं मिला तो स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी समय रहते संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची, यह भी जांच का विषय हो सकता है।

सरकार की राशन व्यवस्था का उद्देश्य पात्र और जरूरतमंद परिवारों को नियमित रूप से खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। ऐसे में किसी पात्र परिवार को लंबे समय तक राशन से वंचित रखना गंभीर मामला माना जाता है।

प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई के बाद अब यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने कहा—राशन वितरण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को समय पर राशन उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राशन वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कलेक्टर ने जिले के ग्रामीणों से अपील की है कि यदि उन्हें समय पर राशन नहीं मिलता है या राशन वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो वे तत्काल जिला प्रशासन को इसकी सूचना दें।

उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि पात्र हितग्राहियों को उनके अधिकार का राशन समय पर मिल सके।

प्रशासन की कार्रवाई से बढ़ी सख्ती

दीघोद में हुई कार्रवाई को सार्वजनिक वितरण प्रणाली में निगरानी और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक ओर जहां शिकायत की जांच कर जिम्मेदार सेल्समैन के खिलाफ कार्रवाई की गई, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने मौके पर ही 78 परिवारों को राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी कराई।

इस कार्रवाई से उन हितग्राहियों को तत्काल राहत मिली है, जो पिछले चार महीने से सरकारी राशन का इंतजार कर रहे थे। अब प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि इन परिवारों को भविष्य में नियमित रूप से पात्रता के अनुसार राशन मिलता रहे।

ग्रामीणों से अपील—समस्या हो तो शिकायत करें

प्रशासन ने ग्रामीणों से कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित किसी भी समस्या को दबाकर न रखें। यदि राशन दुकान पर कम खाद्यान्न दिया जाता है, राशन देने से इनकार किया जाता है, समय पर वितरण नहीं होता या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।

दीघोद की घटना के बाद प्रशासन की कार्रवाई से स्पष्ट है कि शिकायतों को गंभीरता से लेकर जांच की जा सकती है और अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है।

फिलहाल चार महीने से राशन से वंचित 78 परिवारों को खाद्यान्न मिलना शुरू हो गया है और संबंधित सेल्समैन के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि भविष्य में राशन वितरण व्यवस्था कितनी नियमित और पारदर्शी रहती है।

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