खबर:शिवपुरी जिले के उदयपुरा गांव में शुक्रवार शाम राशन वितरण को लेकर नाराज आदिवासी परिवारों ने सड़क पर चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों ने उचित मूल्य की राशन दुकान से पात्रता के अनुसार खाद्यान्न नहीं मिलने और शक्कर का वितरण नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। सड़क पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों के जमा होने से कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित रहा।
ग्रामीणों का आरोप है कि बक्सनपुर, सिहमर्रा और उदयपुरा गांव की उचित मूल्य राशन दुकान पर कार्डधारकों को तय मात्रा से कम खाद्यान्न दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने राशन वितरण में मनमानी का आरोप लगाते हुए संबंधित सेल्समैन के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई।
ग्रामीणों के अनुसार, राशन दुकान पर तैनात सेल्समैन शिवाजी राजा चौहान द्वारा कार्डधारकों को निर्धारित मात्रा की तुलना में करीब 10 किलो तक गेहूं कम दिए जाने का आरोप है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने शक्कर नहीं मिलने की शिकायत भी की। उनका कहना है कि गरीब और पात्र परिवारों को शासन की ओर से निर्धारित खाद्यान्न पूरा मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें कई बार कम राशन देकर वापस कर दिया जाता है।
तीन गांवों के ग्रामीणों में नाराजगी
प्रदर्शन में बक्सनपुर, सिहमर्रा और उदयपुरा गांव के ग्रामीणों के शामिल होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है और राशन लेने के लिए दुकान पर पहुंचने के बावजूद उन्हें निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब वे कम राशन देने का विरोध करते हैं तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की जाती है। कुछ ग्रामीणों ने इसमें सरपंच की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का बयान सामने आना बाकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि राशन जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें बार-बार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि समय पर राशन नहीं मिलने से गरीब परिवारों के सामने घरेलू जरूरतें पूरी करने में परेशानी खड़ी हो रही है।
रात में खाद्यान्न गायब करने का भी आरोप
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने राशन वितरण व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कभी-कभी उन्हें समय पर राशन उपलब्ध नहीं कराया जाता। कुछ ग्रामीणों ने रात के समय खाद्यान्न गायब करने का आरोप भी लगाया।
इसके अलावा ग्रामीणों ने राशन तौलने वाले कांटे में कथित रूप से चुंबक लगाकर तौल में हेराफेरी किए जाने का आरोप लगाया है। हालांकि यह आरोप भी ग्रामीणों के दावे पर आधारित है और इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आ सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि राशन दुकान की निष्पक्ष जांच कराई जाए, स्टॉक और वितरण रजिस्टर की जांच की जाए तथा पात्र हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जाए।
गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे थे करीब 80 ग्रामीण
ग्रामीणों के मुताबिक, राशन वितरण की समस्या को लेकर गुरुवार को करीब 80 लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखी और राशन दुकान की व्यवस्था में सुधार की मांग की थी।
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद भी तत्काल समाधान नहीं होने से उनमें नाराजगी बढ़ गई। इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया।
चक्काजाम के दौरान ग्रामीणों ने राशन वितरण व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा। प्रदर्शन के कारण सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे
चक्काजाम की सूचना मिलते ही खोड़ चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसके बाद नायब तहसीलदार प्रतिभा पांडे भी मौके पर पहुंचीं और ग्रामीणों की शिकायत सुनी।
प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से पूरे मामले की जानकारी ली। ग्रामीणों ने राशन दुकान पर कम खाद्यान्न देने, शक्कर नहीं देने और कथित अनियमितताओं की शिकायत अधिकारियों के सामने रखी।
फूड इंस्पेक्टर ने दिया जांच और पूरा राशन दिलाने का भरोसा
मामले को शांत कराने के लिए प्रशासन की ओर से फूड इंस्पेक्टर को भी मौके पर बुलाया गया। फूड इंस्पेक्टर ने ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी शिकायतों को सुना।
प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया कि पात्रता के अनुसार उन्हें पूरा राशन उपलब्ध कराया जाएगा। राशन वितरण में यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने सड़क से जाम हटा लिया। इसके साथ ही प्रदर्शन समाप्त हो गया और सड़क पर वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई।
अब राशन दुकान की जांच पर नजर
चक्काजाम समाप्त होने के बाद अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। ग्रामीण चाहते हैं कि उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और राशन वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
मामले में राशन दुकान के स्टॉक, वितरण रिकॉर्ड, हितग्राहियों को दिए गए खाद्यान्न की मात्रा और तौल व्यवस्था की जांच महत्वपूर्ण होगी। वहीं, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए कम राशन, शक्कर नहीं देने और तौल में हेराफेरी जैसे आरोपों की भी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद सड़क से जाम हट चुका है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उन्हें पात्रता के अनुसार पूरा खाद्यान्न मिलेगा और राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।