नरवर में घर में घुसा दुर्लभ पैंगोलिन:रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा

Nikk Pandit
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खतरा महसूस होते ही गेंद की तरह सिमट जाता है ‘चींटीखोर’, देखने के लिए जुटी लोगों की भीड़; वन विभाग ने लोगों से वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचाने की अपील की

खबर:शिवपुरी जिले के नरवर में रविवार रात उस समय हड़कंप मच गया, जब कोटिया मोहल्ले में एक घर के अंदर दुर्लभ पैंगोलिन घुस आया। रात करीब 10 बजे घर में पैंगोलिन दिखाई देने के बाद परिवार के लोगों ने इसकी सूचना सर्पमित्र सलमान पठान को दी। सूचना मिलते ही सर्पमित्र सलमान पठान और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू की कार्रवाई शुरू की।

काफी सावधानी के साथ पैंगोलिन को सुरक्षित पकड़ा गया। रेस्क्यू के दौरान मौके पर आसपास के लोगों की भीड़ भी जमा हो गई। टीम ने लोगों को पैंगोलिन से दूरी बनाए रखने की समझाइश दी और किसी भी तरह से उसे परेशान या नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील की। रेस्क्यू के बाद पैंगोलिन को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर जंगल में छोड़ दिया गया।

खतरा महसूस होते ही गेंद की तरह सिमट जाता है

सर्पमित्र सलमान पठान ने बताया कि घर में मिला वन्यजीव पैंगोलिन है, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘चींटीखोर’ के नाम से भी जाना जाता है। पैंगोलिन की सबसे खास पहचान उसका शल्कों से ढका शरीर है। इसके शरीर पर कठोर शल्क होते हैं, जो इसे दूसरे वन्यजीवों से अलग बनाते हैं।

पैंगोलिन खतरा महसूस होने पर अपनी सुरक्षा के लिए शरीर को इस तरह मोड़ लेता है कि वह लगभग गेंद के आकार में दिखाई देने लगता है। इसकी मजबूत बाहरी परत और शरीर को समेटने की क्षमता इसे संभावित हमलावरों से बचाने में मदद करती है।

रात में अधिक सक्रिय रहता है पैंगोलिन

पैंगोलिन मुख्य रूप से निशाचर वन्यजीव है, यानी यह दिन की अपेक्षा रात के समय अधिक सक्रिय रहता है। रात में भोजन की तलाश में यह अपने ठिकाने से बाहर निकलता है। इसका प्रमुख भोजन चींटियां और दीमक हैं। इसी कारण इसे स्थानीय भाषा में ‘चींटीखोर’ भी कहा जाता है।

पैंगोलिन अपने लंबे और मजबूत पंजों की मदद से मिट्टी या दीमक की बांबी को खोदकर भोजन तलाशता है। इसकी लंबी और चिपचिपी जीभ चींटियों तथा दीमकों को पकड़ने में मदद करती है। प्रकृति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है, क्योंकि यह बड़ी संख्या में चींटियों और दीमकों को खाकर पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में योगदान देता है।

दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीव है पैंगोलिन

सर्पमित्र सलमान पठान ने बताया कि पैंगोलिन एक दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीव है। इसके शल्कों और शरीर के अन्य हिस्सों को लेकर अवैध मांग के कारण दुनिया के कई हिस्सों में इसका शिकार और तस्करी की जाती है। अवैध वन्यजीव व्यापार के चलते पैंगोलिन की कई प्रजातियों पर गंभीर खतरा बना हुआ है।

पैंगोलिन को पकड़कर अपने पास रखना, उसका शिकार करना या उसे नुकसान पहुंचाना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से गंभीर मामला हो सकता है। ऐसे वन्यजीव यदि गलती से आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच जाएं तो लोगों को स्वयं उन्हें पकड़ने या भगाने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

घर में पैंगोलिन मिलने से मची हलचल

रविवार रात कोटिया मोहल्ले में जैसे ही घर के अंदर पैंगोलिन के होने की जानकारी लोगों को मिली, आसपास के लोग उसे देखने के लिए पहुंचने लगे। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। हालांकि सर्पमित्र और वन विभाग की टीम ने स्थिति को संभालते हुए लोगों को वन्यजीव से पर्याप्त दूरी बनाए रखने को कहा।

रेस्क्यू टीम ने सावधानी से पैंगोलिन को सुरक्षित पकड़ा। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि वन्यजीव को किसी प्रकार की चोट न पहुंचे। बाद में उसे उसके प्राकृतिक वातावरण में वापस छोड़ दिया गया।

वन्यजीव दिखे तो विभाग को दें सूचना

रेस्क्यू के बाद सर्पमित्र सलमान पठान और वन विभाग की ओर से लोगों से अपील की गई कि यदि किसी के घर, खेत, सड़क या आबादी वाले क्षेत्र में कोई जंगली जानवर दिखाई देता है, तो उसे खुद पकड़ने की कोशिश न करें। वन्यजीव को घेरने, पत्थर मारने या भीड़ लगाकर परेशान करने से वह आक्रामक हो सकता है और वन्यजीव के साथ-साथ लोगों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।

ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देना सबसे सुरक्षित तरीका है। विशेषज्ञों की मदद से वन्यजीव को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सकता है।

सुरक्षित जंगल में लौटाया गया ‘चींटीखोर’

नरवर के कोटिया मोहल्ले में घर के अंदर पहुंचा दुर्लभ पैंगोलिन अब सुरक्षित रूप से जंगल में वापस पहुंच चुका है। इस पूरे रेस्क्यू अभियान में सर्पमित्र सलमान पठान और वन विभाग की टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही। घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि मानव बस्तियों के आसपास दिखाई देने वाले वन्यजीवों के साथ संवेदनशीलता और सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

पैंगोलिन जैसे दुर्लभ वन्यजीव हमारे प्राकृतिक पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आम लोगों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचने पर उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय विशेषज्ञों को सूचना देकर सुरक्षित रेस्क्यू कराना ही सबसे उचित कदम है।

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