खबर:शिवपुरी जिले में लगातार हो रही तेज बारिश अब ग्रामीण इलाकों में मुसीबत का सबब बनने लगी है। बदरवास जनपद के धंधेरा गांव में रविवार को तेज बारिश और पानी के तेज बहाव के चलते सड़क पर बनी पुलिया पूरी तरह बह गई। पुलिया के बह जाने से गांव का रास्ता प्रभावित हो गया है। गनीमत रही कि ग्रामीणों ने पुलिया की जर्जर हालत को समय रहते भांप लिया था और एक दिन पहले ही भुजरियां विसर्जन के लिए जा रही महिलाओं को पुलिया पार करने से रोक दिया था।
ग्रामीणों की इस सतर्कता के चलते बड़ा हादसा टल गया।
घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन और जिम्मेदार विभाग को लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया की हालत लंबे समय से खराब थी और इसकी मरम्मत को लेकर समय रहते ध्यान दिया जाता तो बारिश के दौरान यह स्थिति नहीं बनती।
तेज बारिश के बाद बढ़ा पानी का दबाव
जानकारी के अनुसार, शनिवार को शिवपुरी जिले के कई हिस्सों में तेज बारिश हुई। बदरवास क्षेत्र में भी बारिश के बाद नदी-नालों और छोटे जलस्रोतों में पानी का बहाव तेज हो गया।
बामौर और इचोनिया गांवों की ओर से आने वाला बारिश का पानी धंधेरा गांव की ओर पहुंचने लगा। पानी का बहाव बढ़ने के साथ ही सड़क पर बनी पुलिया पर भी दबाव बढ़ गया।
शनिवार को ही पुलिया के आसपास पानी का तेज बहाव दिखाई देने लगा था। पानी के दबाव के कारण पुलिया में कटाव शुरू हो गया था। ग्रामीणों ने जब पुलिया की स्थिति देखी तो उन्हें खतरे का अंदेशा हो गया।
भुजरियां विसर्जन के दौरान ग्रामीणों ने दिखाई समझदारी
शनिवार को भुजरियां विसर्जन के लिए गांव की महिलाएं इसी रास्ते से होकर गुजरने वाली थीं। महिलाओं के पुलिया की ओर पहुंचने पर ग्रामीणों ने उन्हें रोक दिया।
ग्रामीणों ने महिलाओं को समझाया कि पुलिया की हालत ठीक नहीं है और पानी का बहाव भी काफी तेज है इसके बाद महिलाओं को दूसरे रास्ते से जाने के लिए कहा गया। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि ग्रामीणों का यह फैसला अगले ही दिन कितनी बड़ी घटना को टाल देगा।
अगर महिलाएं शनिवार को पुलिया पार करने की कोशिश करतीं और उसी दौरान पानी का बहाव अचानक बढ़ जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। ग्रामीणों की सतर्कता के कारण महिलाओं की जान जोखिम में जाने से बच गई।
रविवार को पानी के दबाव में पूरी तरह बह गई पुलिया
शनिवार के बाद रविवार को भी बारिश का असर बना रहा। बामौर और इचोनिया की ओर से आने वाले पानी का बहाव लगातार बढ़ता गया। पानी का दबाव इतना ज्यादा हुआ कि सड़क पर बनी पुलिया उसे सहन नहीं कर सकी।
देखते ही देखते पुलिया में कटाव बढ़ता गया और आखिरकार रविवार को पुलिया पूरी तरह बह गई।
पुलिया के बह जाने से सड़क का एक हिस्सा भी प्रभावित हुआ है। अब इस रास्ते से आवागमन को लेकर ग्रामीणों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।
ग्रामीणों ने पहले ही जता दिया था खतरा
धंधेरा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया की हालत अचानक खराब नहीं हुई थी। पुलिया पहले से ही क्षतिग्रस्त थी और बारिश के दिनों में यहां खतरा बढ़ जाता था।
ग्रामीणों ने बताया कि शनिवार को जब पानी का बहाव बढ़ा तो उन्हें लगा कि पुलिया कभी भी टूट सकती है। इसी वजह से उन्होंने भुजरियां विसर्जन के लिए जाने वाली महिलाओं को वहां से गुजरने नहीं दिया।
अब रविवार को पुलिया के पूरी तरह बह जाने के बाद ग्रामीणों का कहना है कि उनका अंदेशा सही साबित हुआ।
2009 में हुआ था पुलिया का निर्माण
धंधेरा निवासी और कोलारस कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बलभद्र सिंह धाकड़ ने पुलिया के निर्माण से जुड़ी जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, इस पुलिया का निर्माण वर्ष 2009 में उनके पिता के सरपंच कार्यकाल के दौरान आरईएस विभाग द्वारा कराया गया था।
बलभद्र सिंह धाकड़ के मुताबिक, पुलिया कुछ साल पहले ही क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद से इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई, लेकिन समय रहते इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि क्षतिग्रस्त पुलिया की समय रहते मरम्मत या पुनर्निर्माण करा दिया जाता तो बारिश के दौरान इसके बहने की नौबत नहीं आती।
बड़ा सवाल- पहले से खराब थी तो मरम्मत क्यों नहीं हुई?
पुलिया के बह जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब इसकी हालत पहले से खराब थी तो जिम्मेदार विभाग ने इसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई?
ग्रामीणों के मुताबिक पुलिया गांव के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग का हिस्सा है। रोजाना ग्रामीणों का आना-जाना इसी रास्ते से होता है। बारिश के मौसम में जब आसपास के गांवों से पानी आता है, तब पुलिया पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में पहले से क्षतिग्रस्त पुलिया को लेकर समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो ग्रामीणों की परेशानी बढ़ना तय है।
ग्रामीणों की सतर्कता बनी सुरक्षा कवच
धंधेरा में हुई घटना का सबसे अहम पहलू ग्रामीणों की जागरूकता रही। शनिवार को जब भुजरियां विसर्जन के लिए महिलाएं पुलिया की तरफ बढ़ीं, तब ग्रामीणों ने स्थिति को गंभीरता से समझा और उन्हें आगे जाने से रोक दिया।
एक दिन बाद जिस पुलिया को पानी ने पूरी तरह बहा दिया, उसी पुलिया को शनिवार को महिलाओं ने पार कर लिया होता तो हालात बेहद गंभीर हो सकते थे। ग्रमीणों की सतर्कता ने संभावित हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई।
बारिश ने खोल दी व्यवस्था की पोल
धंधेरा गांव की यह घटना केवल एक पुलिया के बहने की कहानी नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण इलाकों में बारिश से पहले जर्जर पुल-पुलियों की जांच और मरम्मत की जरूरत भी सामने लाती है।
बारिश ने पुलिया की कमजोर हालत को उजागर कर दिया। ग्रामीणों ने समय रहते खतरा पहचान लिया, इसलिए बड़ा हादसा टल गया। लेकिन अब पुलिया बह जाने के बाद सवाल यह है कि प्रशासन कब तक इस रास्ते को सुरक्षित करेगा और ग्रामीणों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कब तक उपलब्ध कराई जाएगी।
फिलहाल धंधेरा की बह चुकी पुलिया ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। ग्रामीणों की मांग है कि जिम्मेदार विभाग मौके का निरीक्षण कर जल्द से जल्द स्थायी समाधान करे, ताकि अगली बारिश में ग्रामीणों को किसी बड़े खतरे का सामना न करना पड़े।