खबर:शिवपुरी सरकारी स्कूलों में वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों का सब्र अब जवाब देता नजर आ रहा है। अपने भविष्य और नियमितीकरण की मांग को लेकर रविवार को शिवपुरी जिला मुख्यालय पर अतिथि शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे और धरना देकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर 2 सितंबर 2023 की अतिथि शिक्षक महापंचायत में की गई घोषणाओं को लागू करने की मांग की।
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे कोई कुछ महीने या एक-दो साल से नहीं, बल्कि लगातार करीब 18 वर्षों से सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद आज भी उनके सामने नौकरी की स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ा है। शिक्षकों ने कहा कि लंबे समय तक सरकारी स्कूलों में काम लेने के बाद भी उनके नियमितीकरण को लेकर ठोस नीति लागू नहीं की गई।
18 साल की सेवा के बाद भी स्थायी भविष्य नहीं
प्रदर्शन के दौरान अतिथि शिक्षकों ने सरकार के सामने सबसे प्रमुख मांग नियमितीकरण की रखी। उनका कहना है कि वर्षों से सरकारी स्कूलों में पढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था को संभालने में योगदान देने के बावजूद उन्हें आज भी अस्थायी व्यवस्था में काम करना पड़ रहा है।
अतिथि शिक्षकों ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 2 सितंबर 2023 को आयोजित अतिथि शिक्षक महापंचायत में नियमितीकरण सहित भविष्य सुरक्षित करने को लेकर घोषणाएं की गई थीं। अब शिक्षक इन घोषणाओं को जमीन पर लागू करने की मांग कर रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि घोषणा के बाद उन्हें उम्मीद जगी थी कि लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान होगा, लेकिन समय बीतने के बावजूद उनकी प्रमुख मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
तिरंगा लेकर प्रदर्शन में पहुंचे कांग्रेस विधायक
अतिथि शिक्षकों के प्रदर्शन में पोहरी से कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाह भी तिरंगा लेकर शामिल हुए। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का समर्थन किया और सरकार पर अतिथि शिक्षकों से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।
विधायक ने कहा कि अतिथि शिक्षकों की मांगों को लेकर उनकी लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक जारी रहेगी। उनके प्रदर्शन में शामिल होने से आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला और मौके पर मौजूद शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज और बुलंद की।
सुरेंद्र मुदगल बोले- योग्य नहीं थे तो 18 साल काम क्यों लिया?
प्रदर्शन के दौरान अतिथि शिक्षक सुरेंद्र मुदगल ने सरकार की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि अतिथि शिक्षक योग्य नहीं हैं तो सरकार ने उनसे पिछले 18 वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं क्यों लीं?
मुदगल ने कहा कि अतिथि शिक्षक लगातार बच्चों को पढ़ाने और सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में अपना योगदान देते आ रहे हैं। इसके बावजूद उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
उन्होंने 2 सितंबर 2023 की घोषणाओं का हवाला देते हुए सरकार से मांग की कि अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण और भविष्य की सुरक्षा के लिए जल्द ठोस नीति बनाई जाए।
मुदगल ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर भी अतिथि शिक्षकों को दिए गए आश्वासनों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने इन आश्वासनों को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे शिक्षकों के साथ छलावा बताया।
गुरुजियों की तर्ज पर विशेष परीक्षा की मांग
अतिथि शिक्षकों ने केवल नियमितीकरण की मांग ही नहीं की, बल्कि इसके लिए विशेष विभागीय परीक्षा आयोजित करने का रास्ता भी सुझाया है।
आम अतिथि शिक्षक संघ, जिला शिवपुरी के बैनर तले सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षकों ने मांग की कि जिस तरह गुरुजियों के लिए विशेष व्यवस्था के माध्यम से नियमितीकरण का रास्ता तैयार किया गया था, उसी तर्ज पर वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के लिए भी विशेष विभागीय परीक्षा आयोजित की जाए।
शिक्षकों का कहना है कि लंबे अनुभव और वर्षों की सेवा को ध्यान में रखते हुए उन्हें नियमित होने का अवसर मिलना चाहिए।
सत्र के बीच सेवा से बाहर नहीं करने की मांग
अतिथि शिक्षकों ने मांग रखी कि उन्हें शैक्षणिक सत्र के बीच में सेवा से बाहर नहीं किया जाए। उनका कहना है कि बार-बार सेवा की अनिश्चितता के कारण उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बना रहता है।
उन्होंने पूरे 12 महीने का सेवा अनुबंध देने की मांग भी रखी, ताकि उन्हें हर साल नौकरी को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना न करना पड़े।
इसके अलावा शिक्षक चयन परीक्षा में अतिथि शिक्षक के रूप में किए गए प्रत्येक वर्ष के कार्य अनुभव के आधार पर बोनस अंक दिए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।
मानदेय बढ़ा, तो पूरा भुगतान भी समय पर हो
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 के अतिथि शिक्षकों के मानदेय में की गई वृद्धि का पूरा भुगतान समय पर किए जाने की मांग भी उठाई।
शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से कम मानदेय पर सेवाएं देने के बावजूद वे स्कूलों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं। ऐसे में सरकार को मानदेय संबंधी निर्णयों का लाभ समय पर मिलना सुनिश्चित करना चाहिए।
बाहर हुए शिक्षकों को अनुभव के आधार पर फिर मौका
अतिथि शिक्षकों ने ट्रांसफर, प्रमोशन, शिक्षक भर्ती या अन्य कारणों से सेवा से बाहर हुए शिक्षकों के लिए भी राहत की मांग की है।
उन्होंने कहा कि जिन अतिथि शिक्षकों ने वर्षों तक सरकारी स्कूलों में सेवाएं दी हैं, उन्हें उनके अनुभव के आधार पर रिक्त पदों पर दोबारा अवसर दिया जाना चाहिए। शिक्षकों का तर्क है कि उनके पास सरकारी स्कूलों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव है, इसलिए उस अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
हजारों शिक्षकों के भविष्य का सवाल
प्रदर्शन के दौरान अतिथि शिक्षकों ने कहा कि प्रदेश में हजारों शिक्षक वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। वे बच्चों की शिक्षा व्यवस्था में लगातार अपनी भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन खुद अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित हैं।
शिक्षकों ने सरकार से मांग की कि 2 सितंबर 2023 की अतिथि शिक्षक महापंचायत में की गई घोषणाओं के अनुरूप जल्द नीतिगत आदेश जारी किए जाएं।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर साफ संदेश- अब सिर्फ आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए
शिवपुरी में अतिथि शिक्षकों का रविवार का प्रदर्शन महज एक ज्ञापन देने तक सीमित नहीं रहा। 18 वर्षों की सेवा, नियमितीकरण की मांग और भविष्य की सुरक्षा को लेकर शिक्षकों ने सरकार के सामने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक सरकारी स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवारा है, अब सरकार उनकी जिंदगी और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित करे। शिक्षकों की मांग साफ है—पुरानी घोषणाओं को अमल में लाया जाए, नियमितीकरण का रास्ता निकाला जाए और वर्षों की सेवा का सम्मान किया जाए।