जानकी सेना ने निकाली मांग पदयात्रा:कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

Nikk Pandit
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सीता नवमी को ‘मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस’ घोषित करने की मांग, एक माह में निर्णय नहीं हुआ तो भोपाल में बड़े आंदोलन की चेतावनी

बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस घोषित करने की मांग को लेकर मंगलवार को शिवपुरी में अंतर्राष्ट्रीय जानकी सेना संगठन द्वारा मांग पदयात्रा निकाली गई। ‘मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस घोषित हो’ राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत आयोजित इस पदयात्रा में संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। पदयात्रा के माध्यम से संगठन ने सरकार से सीता नवमी को प्रदेश स्तर पर आधिकारिक रूप से ‘मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस’ घोषित करने की मांग उठाई।

पदयात्रा की शुरुआत मां जानकी लवकुश पार्क, पोलो ग्राउंड से हुई। यहां से संगठन के सदस्य नारे लगाते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे। पदयात्रा कोर्ट रोड, माधव चौक, गुरुद्वारा, राजेश्वरी रोड और तात्या टोपे मार्ग होते हुए वापस पोलो ग्राउंड पहुंची। इसके बाद संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जिलाधीश कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।

सीता नवमी को प्राकट्योत्सव दिवस घोषित करने की मांग

ज्ञापन में संगठन ने मांग की कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी, जिसे देशभर में सीता नवमी के रूप में मनाया जाता है, उसे मध्य प्रदेश में आधिकारिक रूप से ‘मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस’ घोषित किया जाए।

संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि माता सीता भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, त्याग, सम्मान, धैर्य और संस्कार की प्रतीक हैं। उनके जीवन से समाज को परिवार, कर्तव्य, त्याग और मर्यादा की प्रेरणा मिलती है। ऐसे में उनके प्राकट्योत्सव को प्रदेश स्तर पर विशेष रूप से मनाने की घोषणा की जानी चाहिए।

संगठन की मांग है कि इस अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इसके माध्यम से बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और माता सीता के आदर्शों से परिचित कराया जा सके।

शिवपुरी से शुरू हुआ राष्ट्रव्यापी अभियान

अंतर्राष्ट्रीय जानकी सेना संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रम सिंह रावत ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत 6 जून 2026 को शिवपुरी से की गई थी। संगठन द्वारा अभियान के पहले चरण में सरकार के सचिवालय को करीब 10 हजार मांग ज्ञापन भेजे जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि संगठन ने ई-मेल के माध्यम से भी अपनी मांग सरकार तक पहुंचाई है। अब अभियान को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में ‘मां सीता सम्मान मांग पदयात्रा’ आयोजित की जा रही है। इन पदयात्राओं के माध्यम से जिला कलेक्टर के जरिए सरकार तक ज्ञापन पहुंचाए जा रहे हैं।
रावत के अनुसार, संगठन का उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को खड़ा करना नहीं, बल्कि माता जानकी के सम्मान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। उनका कहना है कि सीता नवमी को प्रदेश स्तर पर विशेष दिवस के रूप में घोषित किए जाने से समाज में महिला सम्मान का संदेश और मजबूत होगा।

चित्रकूट से जोड़ा अभियान का संबंध

जानकी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अभियान की शुरुआत मध्य प्रदेश से किए जाने के पीछे चित्रकूट का विशेष महत्व बताया। उनका कहना है कि भगवान श्रीराम और माता सीता ने वनवास के दौरान चित्रकूट में लगभग साढ़े 11 वर्ष बिताए थे। चित्रकूट आज भी मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है।

संगठन का मानना है कि मध्य प्रदेश में मां जानकी के प्राकट्योत्सव को आधिकारिक रूप से मनाने की घोषणा करने से प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही आने वाली पीढ़ियों को भगवान श्रीराम और माता सीता के जीवन एवं आदर्शों से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

महिला इकाई ने भी उठाई आवाज

पदयात्रा में संगठन की महिला इकाई की पदाधिकारी भी शामिल रहीं। महिला इकाई की अध्यक्ष श्रीमती अनुषा भटनागर ने कहा कि माता जानकी भारतीय नारी के त्याग, सम्मान, धैर्य और शक्ति की प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण और नारी उत्थान के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे समय में माता सीता की नवमी को प्रदेश स्तर पर आधिकारिक दिवस घोषित किया जाना महिलाओं के लिए गौरव की बात होगी।

भटनागर ने मांग की कि यदि सरकार सीता नवमी को ‘मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस’ घोषित करती है तो प्रदेश के सभी जिलों में इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इन आयोजनों में छात्र-छात्राओं, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, जिससे नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जुड़ सके।

एक माह में निर्णय नहीं हुआ तो भोपाल में आंदोलन
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने सरकार के सामने अपनी मांग रखते हुए आगे की आंदोलनात्मक रणनीति की भी जानकारी दी। संगठन ने कहा है कि यदि एक माह के भीतर मांग पर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन के अगले चरण में राजधानी भोपाल में बड़ी मांग पदयात्रा आयोजित की जाएगी।

संगठन का दावा है कि इस पदयात्रा में प्रदेशभर से हजारों जानकी सैनिकों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचकर सरकार के सामने मांग रखी जाएगी।

संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि इसके बाद भी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। पदाधिकारियों ने कहा कि यह अभियान मां जानकी के सम्मान और उनके आदर्शों को समाज तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, आगे की रणनीति पर नजर

शिवपुरी में निकली पदयात्रा के दौरान संगठन के सदस्यों ने अपनी मांग को लेकर शहर में लोगों का ध्यान आकर्षित किया। पदयात्रा के बाद कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया। अब संगठन की नजर सरकार की ओर से मिलने वाली प्रतिक्रिया पर है।

शिवपुरी से शुरू हुआ यह अभियान अब प्रदेश के अन्य जिलों तक पहुंच रहा है। संगठन द्वारा सीता नवमी को ‘मां जानकी प्राकट्योत्सव दिवस’ घोषित किए जाने की मांग को लेकर लगातार ज्ञापन और पदयात्राएं आयोजित की जा रही हैं। आने वाले दिनों में सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है, यह देखने वाली बात होगी।
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