खबर:शिवपुरी जिले में बुधवार शाम से गुरुवार शाम तक हुई बारिश भले ही हल्की रही हो, लेकिन इस दौरान सामने आई दो तस्वीरों ने शहर और आसपास के इलाकों की चिंता बढ़ा दी। एक ओर नवग्रह मंदिर के पास अचानक पेड़ धराशाई होने से एक नाबालिग बालिका घायल हो गई और कार क्षतिग्रस्त हो गई, तो दूसरी ओर लगातार बारिश के चलते अटल सागर मड़ीखेड़ा बांध 83.52 प्रतिशत भर चुका है। पेड़ गिरने की घटना ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि मंदिर के पुजारी का दावा है कि हादसे से पहले ही पेड़ के गिरने की आशंका को लेकर नगर पालिका को सूचना दी गई थी।
शिकायत के बाद भी नहीं हटा पेड़, अचानक भरभराकर गिरा
गुरुवार दोपहर नवग्रह मंदिर के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक पेड़ अचानक भरभराकर जमीन पर आ गिरा। पेड़ की चपेट में आने से एक नाबालिग बालिका घायल हो गई, जबकि पास खड़ी एक कार को भी नुकसान पहुंचा।
हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया। बारिश के बीच पेड़ गिरने से रास्ते पर भी अव्यवस्था की स्थिति बनी। गनीमत रही कि पेड़ गिरने की चपेट में ज्यादा लोग नहीं आए, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
मंदिर के पुजारी मनीष शर्मा ने बताया कि पेड़ काफी समय से खतरा बना हुआ था। उनके अनुसार पेड़ के कमजोर होने और कभी भी गिरने की आशंका को लेकर नगर पालिका को पहले ही सूचना दी गई थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद समय रहते पेड़ को हटाने या उसकी सुरक्षा को लेकर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
अब हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि अगर खतरे की सूचना पहले मिल चुकी थी तो कार्रवाई हादसे के बाद ही क्यों? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा था? हालांकि इन आरोपों पर नगर पालिका का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
बाल-बाल टला बड़ा हादसा
बारिश के दौरान पेड़ गिरने की घटना ने शहर में जर्जर और कमजोर पेड़ों की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। शहर में कई स्थानों पर पुराने और सूखे पेड़ खड़े हैं, जो तेज हवा या बारिश के दौरान कभी भी गिर सकते हैं।
नवग्रह मंदिर के पास हुई घटना में एक बच्ची के घायल होने और कार के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब लोगों की मांग है कि नगर पालिका ऐसे पेड़ों का सर्वे कराए, जो सड़क, मंदिर, बाजार या रिहायशी इलाकों के आसपास खतरा बने हुए हैं।
लोगों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद यदि समय रहते खतरे वाले पेड़ों की जांच और छंटाई कर दी जाए तो हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
दूसरी तरफ मड़ीखेड़ा बांध ने पकड़ी रफ्तार
बारिश का असर जिले के सबसे महत्वपूर्ण जलस्रोतों में शामिल अटल सागर मड़ीखेड़ा बांध पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बांध में लगातार पानी की आवक के चलते जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
27 अगस्त की शाम 4 बजे बांध का जलस्तर 344.15 मीटर दर्ज किया गया। बांध का पूर्ण जलाशय स्तर 346.25 मीटर है। यानी बांध अपने अधिकतम जलस्तर से करीब 2.10 मीटर नीचे है।
बांध में वर्तमान में 697.26 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीयूएम) पानी मौजूद है। यह बांध की कुल क्षमता का 83.52 प्रतिशत है।
बांध के गेट फिलहाल बंद रखे गए हैं। हालांकि पावर हाउस की 24 मशीनों के माध्यम से पानी छोड़ा जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पावर हाउस से 45.14 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है और बांध से कुल डिस्चार्ज भी 45.14 क्यूमेक्स दर्ज किया गया है।
अभी गेट बंद, लेकिन नजर लगातार जलस्तर पर
मड़ीखेड़ा बांध का जलस्तर बढ़ने के साथ प्रशासन और जल संसाधन विभाग की नजर अब बारिश और पानी की आवक पर बनी हुई है। यदि आगामी दिनों में बारिश का दौर जारी रहता है और बांध में पानी की आवक बढ़ती है, तो जलस्तर और ऊपर जा सकता है।
फिलहाल बांध के गेट बंद हैं और पानी पावर हाउस के जरिए छोड़ा जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में बांध का जलस्तर कितना बढ़ता है, यह बारिश और जल आवक पर निर्भर करेगा।
एक हादसा, कई सवाल
नवग्रह मंदिर के पास पेड़ गिरने की घटना ने जहां एक बच्ची को घायल कर दिया, वहीं इसने नगर पालिका की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी ओर मड़ीखेड़ा बांध का 83.52 प्रतिशत भर जाना जिले के लिए राहत के साथ-साथ लगातार बारिश की स्थिति में निगरानी की जरूरत भी दर्शाता है।
बारिश ने शहर को पानी तो दिया, लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ दिया कि क्या शहर के खतरनाक पेड़ों की पहचान और समय पर कार्रवाई की व्यवस्था पर्याप्त है?
नवग्रह मंदिर की घटना में सबसे गंभीर बात यही है कि यदि पुजारी के दावे के मुताबिक नगर पालिका को पहले ही सूचना मिल गई थी, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। फिलहाल बच्ची के घायल होने के बाद लोगों की नजर इस बात पर है कि नगर पालिका इस घटना को महज एक हादसा मानती है या फिर शहर के अन्य खतरनाक पेड़ों को लेकर कोई ठोस अभियान शुरू करती है।