मरीज को अटेंड न करने और रेफर करने के मामले में दो जूनियर डॉक्टर निलंबित:वायरल वीडियो के बाद जांच में हुई कार्रवाई

Nikk Pandit
0


खबर:शिवपुरी श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय शिवपुरी में मरीज के उपचार और रेफर किए जाने से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में मृतक के पुत्र द्वारा मेडिकल कॉलेज में पदस्थ चिकित्सकों पर उसके पिता को ठीक से नहीं देखने और उपचार के दौरान रेफर किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। मामले को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा महाविद्यालय प्रबंधन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराई। जांच समिति की रिपोर्ट और अनुशंसा के आधार पर दो जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

मामले में आकस्मिक चिकित्सा विभाग में पदस्थ जूनियर रेजीडेंट डॉ. राज यादव तथा मेडिसिन विभाग की जूनियर रेजीडेंट डॉ. प्रियंका ठाकुर को आगामी आदेश तक निलंबित किया गया है। कार्रवाई के बाद चिकित्सा महाविद्यालय में मरीजों के उपचार, समय पर चिकित्सकीय परीक्षण और रेफर प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित हुआ है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था वीडियो

पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद सामने आया। वीडियो में एक व्यक्ति ने अपने पिता के उपचार को लेकर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों पर गंभीर आरोप लगाए थे। मृतक के पुत्र के अनुसार उसके पिता को उपचार के लिए शिवपुरी मेडिकल कॉलेज लाया गया था। उसका आरोप था कि अस्पताल पहुंचने के बाद जूनियर रेजीडेंट डॉ. राज यादव और डॉ. प्रियंका ठाकुर ने उसके पिता को ठीक से नहीं देखा और उन्हें रेफर कर दिया।

वीडियो में मृतक के पुत्र ने यह भी आरोप लगाया था कि जब उसके पिता मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे, तब उनकी स्थिति सामान्य थी। उसके अनुसार उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज लाए जाने के बाद उन्हें रेफर किया गया और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। उसने एंबुलेंस एवं मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों को अपने पिता की मृत्यु के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की थी।

वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया और चिकित्सा महाविद्यालय प्रबंधन ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए।

तीन सदस्यीय जांच समिति ने की मामले की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। समिति को मामले से जुड़े तथ्यों, मरीज के उपचार, चिकित्सकीय परीक्षण, रेफर किए जाने की प्रक्रिया तथा संबंधित चिकित्सकों की भूमिका की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी गई।

जांच समिति द्वारा उपलब्ध तथ्यों एवं मामले से जुड़े बिंदुओं की समीक्षा के बाद अपनी रिपोर्ट प्रबंधन को सौंपी गई। समिति की रिपोर्ट एवं अनुशंसा के आधार पर चिकित्सा महाविद्यालय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अधिष्ठाता द्वारा दो जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।

दो जूनियर डॉक्टर तत्काल प्रभाव से निलंबित

जांच के बाद आकस्मिक चिकित्सा विभाग के जूनियर रेजीडेंट डॉ. राज यादव और मेडिसिन विभाग की जूनियर रेजीडेंट डॉ. प्रियंका ठाकुर को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक निलंबित किया गया है।

प्रबंधन की ओर से की गई इस कार्रवाई को मरीजों के उपचार में लापरवाही के मामलों को गंभीरता से लेने के रूप में देखा जा रहा है। अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को समय पर चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी चिकित्सकीय स्टाफ की होती है। ऐसे में मरीज को समय पर अटेंड न करने अथवा रेफर प्रक्रिया में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने जैसे मामलों पर प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाया है।

दो चिकित्सकों को चेतावनी पत्र

जांच के दौरान मामले में दो अन्य चिकित्सकों की भूमिका को लेकर भी जिम्मेदारी तय की गई। मेडिसिन विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. रीतेश यादव तथा आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. निर्मल कदम को चेतावनी पत्र जारी किया गया है।

प्रबंधन के अनुसार मरीज को समय पर नहीं देखने और बिना हस्ताक्षर के रेफर किए जाने के मामले में दोनों चिकित्सकों को जिम्मेदार पाया गया। इसी आधार पर उन्हें भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं होने की सख्त चेतावनी दी गई है।

चिकित्सा महाविद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही या निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन दोबारा सामने आता है, तो संबंधित चिकित्सकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मरीजों की सुरक्षा और उपचार व्यवस्था पर जोर

इस कार्रवाई के बाद मेडिकल कॉलेज में मरीजों के उपचार की व्यवस्था, चिकित्सकों की जवाबदेही और रेफर प्रक्रिया को लेकर जिम्मेदारी तय करने का संदेश गया है। अस्पताल में गंभीर अवस्था में पहुंचने वाले मरीजों को समय पर चिकित्सकीय परीक्षण, आवश्यक उपचार और उचित चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

प्रबंधन द्वारा की गई कार्रवाई से यह भी स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाले किसी मामले को केवल आरोप के स्तर पर छोड़ने के बजाय तथ्यों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया अपनाई गई। तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दो डॉक्टरों के निलंबन और दो चिकित्सकों को चेतावनी दिए जाने से मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई पूरी की गई है।

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से मरीजों के उपचार में निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)