खबर:शिवपुरी जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा के निर्देश पर करैरा क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्र दबरा-2 में सामने आई गंभीर लापरवाही के मामले में संबंधित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती रानी यादव को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक कर दिया गया है।
कलेक्टर श्री वर्मा ने गत दिवस आंगनवाड़ी केंद्र दबरा-2 का आकस्मिक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर कमियां सामने आईं। केंद्र में साफ-सफाई की स्थिति खराब मिली और बच्चों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाएं भी संतोषजनक नहीं पाई गईं। निरीक्षण में बच्चों की उपस्थिति भी काफी कम मिली।
बच्चों की बुनियादी शिक्षा में भी मिली कमी
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि केंद्र में आने वाले बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप बुनियादी शिक्षा और गतिविधियां नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराई जा रही थीं। आंगनवाड़ी केंद्रों का उद्देश्य बच्चों के पोषण के साथ-साथ उनके प्रारंभिक विकास और शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है, लेकिन निरीक्षण में इन व्यवस्थाओं में कमी पाई गई।
कलेक्टर ने केंद्र की स्थिति का जायजा लेते हुए संबंधित व्यवस्थाओं को गंभीरता से लिया और जिम्मेदार कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की जानकारी ली।
पोषण ट्रैकर पर जानकारी दर्ज करने में भी लापरवाही
निरीक्षण के दौरान पोषण ट्रैकर ऐप पर दर्ज की जाने वाली आवश्यक जानकारियों को लेकर भी लापरवाही सामने आई। बच्चों से संबंधित पोषण एवं अन्य जरूरी जानकारियों को नियमित रूप से दर्ज नहीं किया जा रहा था।
विशेष रूप से कुपोषित बच्चों के खान-पान और उनकी निगरानी को लेकर भी अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। कुपोषित बच्चों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने के साथ उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखना आंगनवाड़ी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसके अलावा, गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में नियमित रूप से भर्ती कराने की प्रक्रिया में भी लापरवाही सामने आने की बात कही गई है।
ग्रामीणों ने भी की कार्यकर्ता की शिकायत
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने भी आंगनवाड़ी केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें कीं। ग्रामीणों का कहना था कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कई बार समय पर केंद्र पर नहीं आती हैं, जिसके कारण बच्चों और हितग्राहियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बताया गया कि संबंधित पर्यवेक्षक द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को पहले भी अपने कार्य में सुधार लाने के लिए समझाइश दी गई थी। इसके बावजूद कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं होने का आरोप सामने आया।
कारण बताओ नोटिस के बाद हुई कार्रवाई
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास करैरा के परियोजना अधिकारी अमित यादव द्वारा संबंधित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती रानी यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
नोटिस के माध्यम से केंद्र में मिली कमियों और कार्य में बरती गई कथित लापरवाही के संबंध में जवाब मांगा गया। कार्यकर्ता द्वारा प्रस्तुत जवाब का विभागीय स्तर पर परीक्षण किया गया, लेकिन अधिकारियों के अनुसार जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
इसके बाद मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की गई।
एसडीएम के अनुमोदन के बाद सेवा से पृथक
विभागीय कार्रवाई के बाद करैरा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के अनुमोदन उपरांत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती रानी यादव को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक कर दिया गया।
प्रशासन की इस कार्रवाई को आंगनवाड़ी केंद्रों में लापरवाही के प्रति सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर बच्चों के पोषण, कुपोषण की निगरानी, नियमित उपस्थिति और केंद्र की साफ-सफाई जैसे विषयों को लेकर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
बच्चों के पोषण और व्यवस्था पर प्रशासन की नजर
आंगनवाड़ी केंद्र ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बच्चों एवं महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यहां बच्चों को पोषण आहार, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ कुपोषित बच्चों की पहचान और उनकी निगरानी की जाती है।
ऐसे में केंद्रों पर साफ-सफाई, बच्चों की नियमित उपस्थिति, पोषण संबंधी रिकॉर्ड और कुपोषित बच्चों की उचित देखभाल को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही सीधे तौर पर हितग्राहियों को प्रभावित कर सकती है।
दबरा-2 आंगनवाड़ी केंद्र में निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों के बाद हुई कार्रवाई से प्रशासन ने यह संकेत दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक सही तरीके से पहुंचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
कलेक्टर के निरीक्षण से बढ़ी जवाबदेही
कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण के बाद हुई इस कार्रवाई ने आंगनवाड़ी केंद्रों में काम करने वाले कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। आकस्मिक निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियां तलाशना नहीं, बल्कि योजनाओं का वास्तविक लाभ बच्चों और परिवारों तक पहुंच रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित करना भी है।
प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब अन्य आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं को लेकर भी निगरानी और निरीक्षण की प्रक्रिया को गंभीरता से लिए जाने की उम्मीद है। खासतौर पर बच्चों के पोषण, कुपोषित बच्चों की पहचान एवं उपचार, पोषण ट्रैकर पर रिकॉर्ड और केंद्र की नियमित संचालन व्यवस्था पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
दबरा-2 की कार्रवाई से साफ संदेश है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों में लापरवाही प्रशासन बर्दाश्त नहीं करेगा और जिम्मेदारी तय होने पर कार्रवाई की जाएगी।